भामसंघ- महाराष्ट्र प्रदेश का व्हिजन डाक्युमेंट

भारतीय मजदूर संघ महाराष्ट्र प्रदेशका त्रै-वार्षिक अधिवेशन फरवरी माह मे सातारा मे संपन्न हुआ। इस अधिवेशन मे व्हीजन डाक्युमेंट (प्रदेश का संकल्प) 2012-2015 प्रस्तुत किया गया। अगले तीन वर्ष में प्रदेश का कार्य कैसा रहेगा, कौन कौन से उद्योग में कार्य बढाने के लिए प्राधान्य दिया जायेगा इसका ब्योरा व्हिजन डाक्युमेंट में है। महाराष्ट्र प्रदेशमें 24 जिले है। विदर्भ छोडकर इन्ही जिले को नजर रखते हुये व्हीजन डाक्युमेंट तयार किया गया है।

मजदूर संघ की कार्य की दृष्टीसे भौगोलिक महाराष्ट्र में दो प्रदेश है। महाराष्ट्र प्रदेश एवं विदर्भ प्रदेश महाराष्ट्र प्रदेश मे 24 जिले और 238 तहसील है। प्रदेश को चार विभाग बनाये गये, पश्चिम महाराष्ट्र, मराठवाडा, कोकण और उत्तर महाराष्ट्र। प. महाराष्ट्र- कोल्हापूर, सोलापूर, सांगली, सातारा, अहमदनगर, पुणे। कोकण विभाग- मुंबई, ठाणे, पालघर, रायगड, सिंधूदुर्ग, रत्नागिरी। मराठवाडा- औरंगाबाद, उस्मानाबाद, बीड, परभणी, जालना, नांदेड, लातूर, हिंगोली। उत्तर महाराष्ट्र विभाग- जलगांव, नाशिक, नंदूरबार, धुळे। प्रदेश के इन जिले मे से पश्चिम महाराष्ट्र, उत्तर महाराष्ट्र और कोकण विभाग में कार्य अच्छा है। पश्चिम महाराष्ट्र के 4, कोकण के 5, मराठवाडा के 3 और उत्तर महाराष्ट्र के 2 जिलेमें कार्य अच्छा है। बाकी जिले में कार्य साधारण है। संकल्पमें इन्ही जिले को विशेष ध्यान में रखा गया है। इन जिले सर्वानासे सक्षम बनानेकी योजना कि है।
व्हीजन डाक्युमेंट में असंघटित क्षेत्र के घरेलू निर्माण उद्योग, मत्स्य व्यवसाय, बांधकाम, अंगणवाडी, तथा कृषि विभाग को ध्यान मे रखा गया है। तथा संघटित क्षेत्र के नगरपालिका, सहकारी बँक इन उद्योगोको विचार किया गया है। पूर्णकालिक कार्यकर्ता की संख्या बढाकर हर जिलेमें कमसे कम एक पूर्णकालिक, हर जिले में मजदूर संघ का कार्यालय और 238 तहसिल तक नेटवर्क खडा करना है। हर जिला/उद्योग तथा प्रदेश स्तरपर प्रवासी कार्यकर्ताओंकी निश्चित सूची बनाकर उनको विहीत क्षेत्रमें पूर्वनियोजित सतत प्रवास की योजना कार्यान्वित करने का आग्रह रखा गया है। जिलास्तर पर अन्य अन्य संघटन तथा परिवार के विभिन्न क्षेत्रोमें समन्वय और संपर्क रहें इसका आग्रह रखा गया है। जिला और उद्योग स्तरपर मजदूर संघसे जुडे हुए नये कार्यकर्ताओंकी सूची बनाकर उनका संघ परिचय वर्ग करनेका प्रयास होगा।

घरेलू मजदूर संघटन प्रदेशमें 1972 से है। स्व. रमण भाई शहा ने घरेलू कामगार संघ की नीव रखी थी। इस तरह का विश्वमें अपने तरह का यह पहिला संघटन है। घरेलू मजदूर की समस्याओंको लेकर मुंबई में 25 हजार घरेलू मजदूर की रॅली निकली थी। घरेलू मजदूरोंको न्यूनतम वेतन, बोनस, पेंशन, साप्ताहिक सुट्टी, मेडिकल सुविधा, विमा आदि मांगो को लेकर गत 40 साल से मजदूर संघ ने सतत आंदोलन किया। प्रारंभ मे संघटन का कार्य मुंबई मे सुरू हुआ। मजदूर संघ के आंदोलन को अच्छा प्रतिसाद मिला। आखिर सरकारको घरेलू मजदूर के लिए बोर्ड स्थापित करना पडा। बोर्ड हो जाने से मजदूरोंको सटीक वेतन, पेंशन, विमा योजना के लाभ मिलेंगे। प्रदेश में इस संघटन को प्रदेश के सभी जिले में फैलाने का निश्चय किया है। चंद दिनो में ही संघटन प्रदेश के 10 जिलेमें मजबुतीसे खडा हुआ है। सरकारी आकडों के अनुसार प्रदेश मे तीन लाख के करीब घरेलू मजदूर है। व्हीजन डाक्युमेंट के तहत 24 जिले मे घरेलू मजदूरोंका संघटन खडा करना है। इस संघटन के कार्यकर्ता इस काम में जूट गये है। 2015 तक प्रदेश के सभी जिलोमें सबसे बडा संघटन यही होगा।

बांधकाम क्षेत्र मे भी काम बढाने का लक्ष रखा गया है। बांधकाम कर्मियोंके लिए महाराष्ट्र सरकार द्वारा बोर्ड बनाया गया है जिसकी वजहसे इस उद्योगके मजदूरोंको कल्याणकारी तथा सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिलेगा। प्रदेश के सभी जिलो बांधकाम मजदूरोंका संघटन खडा करना है। पश्चिम महाराष्ट्र, कोकण और उत्तर महाराष्ट्र विकास मे बांधकाम मजदूर उद्योगमें काम सुरु हो चुका है। मराठवाडा विभाग मे कार्यकर्ता जुडे है और जल्दही इस विभाग में कार्य सुरु हो जायेगा।

प्रदेश में 750 किलोमीटर का समुद्र किनारा है। मुंबई से मालवण तक का यह विशाल क्षेत्र मच्छवारोंका है। मुंबई और ठाणे को छोडकर 500 किलोमीटर के क्षेत्र मजदूर संघ का कार्य खडा करने का लक्ष है। इस क्षेत्र में करीब 20 हजार तक मच्छवारे है। सिंधुदुर्ग, रायगड, एवम ठाणे जिले कुछ विभाग में मजदूर संघ कार्य खडा करना है। मच्छवारोंकी बहोत समस्याए है। राजनिती के चलते सरकारी योजनाओंका लाभ इन मच्छावारोंको नही मिल रहा है। समाज के ठेकेदार बीच मे ही खा जा रहे है। इस क्षेत्र में काम बढाना एक चुनौती है। गुंडो से टक्कर लेकर ही आगे बढाना पडेगा। मत्स व्यवसाय से जुडे कुछ ओर उद्योग है। वहा भी संघटन खडा करने का लक्ष है। 2015 तक 28 हजार की सदस्यता लक्ष रखा है।

प्रदेश में तालाब और बांध बडी तादात में है। इन मिठे पाणी में मत्सव्यवसाय बडी मात्रा में है। प्रदेश के जलगांव जिले में मछवारोंका बडा संघटन खडा हो चुका है। 2500 के करीब मच्छवारे संघटन से जुडे है। प्रदेश के अन्य जिलोमें भी मच्छवारोका संघटन खडा करना है। इस क्षेत्र मे मत्सव्यवसाय करने के लिए सरकार द्वारा सोसायटी को ठेका दिया जाता है। यह ठेका समाज के ठेकेदार लेते है। जिस वजहसे मच्छवारोंका बडा पैमाने पर शोषण होता है। हमेशा गुंडोसे हाथापाई होती है। इस संघर्षमय वातावरण में भी मजदूर संघके कार्यकर्ता लगन से काम कर रहे है। मच्छवारोंकी सदस्यता 10 हजार तक ले जाने का लक्ष रखा गया है।

संघटित क्षेत्र :-

प्रदेशमें संघटित क्षेत्र मे अच्छा काम है। अन्यन्य उद्योगोमें अन्यन्य युनियने है। मजदूर संघ का प्रयास है की इन उद्योगोमें काम बढते रहे। संघटित क्षेत्र के उद्योगोके कार्यकर्ता अपने अपने उद्योगोमें संघटन बढाने की कोशिश कर रहे है। महाराष्ट्र में नगरपालिका की संख्या करीब 226 है। जीन में 50 के करीब नगरपालिका में काम है, आठ महानगरपालिका में काम है तथा 3 नगरपंचायत में कार्य है। प्रदेश के 170 नगरपालिका में संघटन नही है और है तो कमजोर है। सफाई मजदूर काँग्रेस का संघटन पेपर पर है। 170 नगरपालिका में अगले तीन वर्ष में काम शुरु करना है। इसके लिए नगरपालिका महानगरपालिका मजदूर संघ के कार्यकर्ता सक्रिय है। उसी तरह जिले के कार्यकर्ता भी कोशीश कर रहे है। इन क्षेत्र में मजदूर संघ के कुछ कार्यकर्ता है। उनके आधार पर प्रदेश के 170 नगरपालिका में काम शुरु करने का प्रयास है।
संघटित क्षेत्र में एक और उद्योग दुर्लक्षित है। प्रदेश में सहकारी बँकोका नेटवर्क अच्छा है। उसी तरह सहकारी पतसंस्था भी बडे पैमाने पर है। लेकीन कुछ ही जिलों में सहकारी बैंको में संघटन है। ठाणे, सोलापूर, में अपनी मान्यता प्राप्त संघटन है। पुना, जलगांव, नाशिक, औरंगाबाद, नांदेड, कोल्हापूर इन जिलोमें बैंकों मे संघटन है। लेकीन सभी बैंकोमें नही। वहा किसी भी संघटन का संघटन नही है। ऐसे सहकारी बैंको की सूची तयार की गई है। तथा इन बैंको में आगामी तीन वर्ष में संघटन खडा करने की जिम्मेवारी कुछ कार्यकर्तापर सोपी गई है।

अन्यन :-

प्रदेश में 24 जिले तथा 238 तहसिल है। 24 जिलो में जिला कार्यकारिणी है। इसमें आठ जिले विकसीत है तथा 10 जिले विकसनसील है। और 6 जिले अविकसीत है। आगामी तीन वर्ष में इन विकसनसिल तथा अविकसित जिले में कमसे कम 5 उद्योगोंके संघटन खडा करने का लक्ष है। 238 तहसिल है। उसमें से 100 के करीब तहसिलोमें कार्यसमिती है। बाकी तहसिलोमें संपर्क कार्यकर्ता है। व्हीजन डाक्युमेंट की अंतर्गत इन सभी 238 तहसिल को सक्षम करने का प्रयास है। इसलिए प्रदेश के हर जिले में जिला कार्यालय शुरु करना है। जिला कार्यालय के बाद हर जिलेमें एक पूर्णकालिक कार्यकर्ता नियुक्त करना है। प्रदेश के चार विभाग में हर साल एक विभागस्तरीय अभ्यास वर्ग और प्रदेश स्तर पर चिंतन वर्ग का आयोजन कि योजना है। इस प्रशिक्षण वर्ग से काम बढाने मे मदत मिलेगी, संघटन खडा करने के लिए प्रेरणा मिलेगी। जिल्हास्तर की बैठके हर माह में, विभाग स्तर की बैठके हर चार माह में, प्रदेश कार्यकारिणी हर छह माह में और प्रदेश पदाधिकारी की बैठके हर तीन माह में लेने का दंडक दिया गया है। इन बैठको में व्हीजन डाक्युमेंट पर (संकल्प) विचार विनिमय और प्रगती का लेखाजोखा लिया जायेगा। महाराष्ट्र प्रदेश का व्हीजन डाक्युमेंट 2012-2015 पुरा हो यह संकल्प सभी कार्यकर्ताओंका है।

 

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