अपारंपरिक ऊर्जा निर्माण की नई तकनीक

भूगर्भीय औष्णिक (जियोथर्मल) ऊर्जा निर्माण पद्धति

– जिओ भूगर्भ, थर्मल ऊष्णता का आशय ही है भूगर्भीय ऊष्णता से बिजली का उत्पादन करना
-भूगर्भीय ऊर्जा से बनने वाली बिजली प्रदूषण विरहित होने के साथ-साथ प्रकल्प के प्लांट लोड़ फैक्टर लगभग 85 से 90 प्रतिशत रहता है
– जी. एस. आई. सर्वेक्षण के अनुसार भारत में भूगर्भीय ऊर्जा निर्माण करने की अपार संभावनाएं हैं
– महाराष्ट्र के 18 स्थानों पर लगभग 60 गरम पानी के झरने होने के साथ- साथ इस पानी का तापमान 34 से 71 डिग्री है। ठाणे, रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग, रायगड, नर्मदा-तापी क्षेत्र, धुलिया, यवतमाल, अमरावती तथा जलगांव में भूगर्भीय ऊर्जा निर्माण की प्रबल संभावनाएं हैं
– अब तक भारत में कहीं भी भूगर्भीय ऊर्जा निर्माण प्रकल्प स्थापित नहीं किया गया है। महाराष्ट्र में नई तकनीक पर आधारित भूगर्भीय ऊर्जा केंद्र स्थापित करने के लिए महाऊर्जा मेसर्स थरमैक्स लि. तथा मेसर्स टाटा पावर लिमिटेड ने सामूहिक रूप से कार्य किए हैं

महाराष्ट्र के भूगर्भीय ऊर्जा क्षेत्र

-जिओलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ( जी.एस.आई) की रिपोर्ट के अनुसार महाराष्ट्र के निम्न तीन संभागों में भूगर्भीय ऊर्जा निर्माण की अपार संभावनाएं हैं-

1- पश्चिम किनारा पट्टी, ठाणे, रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग तथा रायगड
2- नर्मदा- तापी क्षेत्र
3- यवतमाल, अमरावती तथा जलगांव जिलों के विभिन्न स्थलों जी एस आई के सर्वेक्षण महाराष्ट्र में रत्नागिरी जिले के उन्हावरे ( तहसील खेड़) में भूपृष्ठभाग का अधिकतम तापमान 71 डिग्री है, और गरम होने पर ऊष्ण झरने का तापमान 43.920 लीटर प्रति घंटा बढ़ती जाता है। तूरल (खेड़ तहसील)में भूपृष्ठ के नीचे का अधिकतम तापमान 61डिग्री से.है, यहां गरम पानी के झरने का तापमान 20.160 लीटर प्रति घंटा है।

मेसर्स टाटा पावर ने भूगर्भीय ऊर्जा निर्माण की निम्न स्थानों पर अपार संभावनाएं हैं-

1- सालबर्डी (जिला अमरावती)
2- सातपुड़ा तापी क्षेत्र
3- उनपदेव ( जिला जलगांव)

मेसर्स थॉमक्स लि. की ओर से ऊर्जा निर्माण के लिए निम्न संभागों का चयन किया गया है-

1- पश्चिमी किनारे के दक्षिण भाग ( खेड़ से राजापुर तथा पाली से उनावरे जिला रत्नागिरी, पश्चिमी किनारे का उत्तरी भाग)
2- कोकणेरे से अकलोली (जिला ठाणे)

समुद्री लहरों से ऊर्जा निर्माण

हवा की रफ्तार वाली गतिज ऊर्जा, समुद्री लहरों की ऊंचाई, गति तथा समय-सीमा मौसम के अनुसार बदलती रहती है। लहरों में उपस्थित ऊर्जा की शक्ति को अब आसानी से नापा जा सकता है। भारतीय समुद्री किनारे पर लगभग 40,000 मेगावॉट ऊर्जा का निर्माण किया जा सकता है। भारतीय के समुद्री किनारे से 5 से 10 किलोवॉट ऊर्जा निर्माण की जा सकती है। तकनीक का उपयोग करके कुल 40,000 मेगावॉट क्षमता की ऊर्जा का निर्माण किया जा सकता है, इसमें से कम से कम 15 प्रतिशत बिजली का भी निर्माण कर लिया गया तो 6000 मेगावॉट ज्यादा बिजली मिल सकेगी।
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