घाटी में हो रहे बदलाव को नहीं स्वीकार कर पा रहे स्थानीय नेता!

जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाने के बाद केंद्र सरकार ने सभी स्थानीय नेताओ को उनके ही घर में कैद कर दिया था जिसका उस समय विरोध भी हुआ था लेकिन अब यह सभी को समझ आ रहा है कि उनको नजरबंद करना जरुरी था क्योंकि जिस तरह से एक के बाद एक नेता देश विरोधी बयान दे रहे है उससे यह साबित होता है कि अगर यह लोग उस समय बाहर होते तो दंगे होना निश्चित था। हाउस अरेस्ट से बाहर आने के बाद पहले फारुख अबदुल्ला ने देश के खिलाफ बयान दिया जिसका हर तरफ जमकर विरोध हुआ। वहीं अब महबूबा मुफ्ती ने भी धारा 370 खत्म करने को लेकर देश विरोधी बयान दिया है। महबूबा मुफ्ती के बयान से दंगा भी भड़क सकता है।

पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती को करीब 14 महीने बाद रिहा किया गया जिसके तुरंत बाद महबूबा ने एक ऑडियो क्लीप जारी किया और जम्मू कश्मीर के लिए युद्द छेड़ने की बात कही। मुफ्ती ने कहा कि जिस दिन धारा 370 खत्म की गयी वह दिन जम्मू कश्मीर के लिए काला दिन था। यह हर दिन मेरे दिमाग में खटकता है इसलिए मेरा संघर्ष जारी रहेगा। महबूबा मुफ्ती ने अपने ट्ववीटर अकाउंट पर एक ऑडियो क्लीप पोस्ट किया जिसमें वह कह रही है कि ‘मैं करीब 1 साल बाद रिहा हुई हूं लेकिन फिर भी मेरी जम्मू कश्मीर के लिए लड़ाई जारी रहेगी। केंद्र सरकार ने पिछले साल 5 अगस्त को जो गैर लोकतांत्रिक और गैर कानूनी तरीके से हमसे हमारा हक छीन लिया है उसे फिर से वापस लाना होगा। 5 अगस्त को हुई भारी बेज्जती को भी हम कभी नहीं भूल सकते है इसके लिए हमें जंग जारी रखनी होगी।

5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने जम्मू कश्मीर से धारा 370 और आर्टिकल 35ए को खत्म कर दिया था उसी दौरान जम्मू कश्मीर के स्थानीय नेताओं को एहतियात के तौर पर नजर बंद कर दिया गया था क्योंकि यह सभी स्थानीय नेता सरकार के इस फैसले का विरोध कर रहे थे। इस सभी नेताओं को धारा 107 और 151 के तहत हिरासत में लिया गया था और बाद में इनके खिलाफ जन सुरक्षा अधिनियम का मामला भी दर्ज किया गया था। सरकार को इस बात की जानकारी थी कि अगर इन नेताओं को बाहर रखा गया तो यह महौल बिगाड़ सकते है और जनता को गुमराह कर दंगा भड़काने की कोशिश करेंगे।

जम्मू कश्मीर में धारा 370 की आड़ में राजनीतिक दल पिछले कई सालों से अपनी राजनीति कर रहे थे। जिस देश की रोटी खाते थे उसी के खिलाफ बयानबाज़ी करते थे और घाटी की स्थानीय जनता को देश के खिलाफ ही भड़काते थे। ऐसे में धारा 370 के खत्म होने के बाद अब महबूबा मुफ्ती समेत तमाम दलों के पास जनता को गुमराह करने का कोई रास्ता नहीं बचा है जिससे यह लोग अब फिर से केंद्र सरकार पर हमला कर रहे है। घाटी से धारा 370 और आर्टिकल 35ए के हटने से वहां के स्थानीय लोगों के अधिकार सुरक्षित हो गये। अब बाहर के लोग भी घाटी में कहीं पर भी जमीन ले कर अपना कारोबार शुरु कर सकते है और वहां रोजगार के अवसर पैदा कर सकते है। इससे ना सिर्फ घाटी के युवाओं को रोजगार मिलेगा बल्कि हिंसात्मक घटनाएं भी कम हो जायेंगी। जम्मू कश्मीर के राजनीतिक दल इसी बात से परेशान हो रहे है कि अगर सभी युवा रोजगार की तरफ चले गये तो फिर उनकी पार्टी की रोटी किस के भरोसे बनेगी।

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