अर्थव्यवस्था में सकारात्मक संकेत

भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ कृषि में अच्छे उपज के संकेत है। औद्योगिक क्षेत्र में सरकारी पैकेज के साथ धीरे-धीरे सुधार आ रहा है। किसानों के हित में दो नए कानून हाल में बनाए हैं, जो उन्हें आर्थिक मुक्ति की दिशा में अग्रसर करेंगे।

कोविड-19 के कारण दुनिया एक बड़े आर्थिक संकट का सामना कर रही है। भारत भी इससे अछूता नहीं है। दुनिया भर में माना जा रहा है कि आर्थिक विकास को पुन: गति देने के लिए सरकारों को निर्णायक भूमिका निभानी होगी। भारत में भी केंद्र सरकार ने इस दिशा में कुछ कदम उठाए हैं जिनके परिणाम भी सामने आने आरंभ हो गए हैं।

अगर हम मौजूदा आर्थिक परिदृश्य पर नज़र डालें तो भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले कृषि क्षेत्र से विशेष रूप से सकारात्मक संकेत आ रहे हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार खरीफ फसल का बुवाई क्षेत्र पिछले साल 1053.52 लाख हेक्टेयर की तुलना में इस साल 18 सितंबर तक कुल 1113.63 लाख हेक्टेयर था। इस प्रकार देश में पिछले साल की तुलना में यह बुवाई क्षेत्र 5.71 प्रतिशत अधिक है।

इसके अलावा बिचौलियों को दूर कर किसानों को और सशक्त बनाने के लिए केंद्र सरकार ने संसद के मौजूदा सत्र में दो विधेयक भी पारित करवाए हैं। । ये हैं- कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक, 2020, कृषक (सशक्तिककरण व संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक, 2020।

इन विधेयकों के विषय में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्यााण, ग्रामीण विकास तथा पंचायती राज मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि इनके माध्यम से अब किसानों को कानूनी बंधनों से आजादी मिलेगी, वहीं उन्होंने पुनः स्पष्ट किया है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को बरकरार रखा जाएगा तथा राज्यों के अधिनियम के अंतर्गत संचालित मंडियां भी राज्य सरकारों के अनुसार चलती रहेंगी। श्री तोमर ने कहा कि विधेयकों से कृषि क्षेत्र में आमूलचूल परिवर्तन आएगा, खेती-किसानी में निजी निवेश से होने से तेज विकास होगा तथा रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, कृषि क्षेत्र की अर्थव्यवस्था मजबूत होने से देश की आर्थिक स्थिति और सुदृढ़ होगी।

कुल मिलोकर इन विधेयकों द्वारा नियमों में प्रस्तावित बदलाव के बाद अब किसानों को कृषि उत्पाद मंडियों में अपनी उपज बेचने की विवशता से छुटकारा मिलेगा। उन्हें शोषण से मुक्ति मिलेगी और वे अपनी मनमर्जी के दाम व स्थान पर अपनी उपज बेच सकेंगे।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने भारत में कोविड-19 महामारी से लड़ने के लिए 12 मई, 2020 को 20 लाख करोड़ रुपये के विशेष आर्थिक और व्यापक पैकेज की घोषणा की जो भारत की जीडीपी के 10% के बराबर है। उन्होंने ‘आत्मनिर्भर भारत’ आंदोलन के लिए स्पष्ट आवाहन किया। उन्होंने आत्मानिर्भर भारत के पांच स्तंभों- अर्थव्यवस्था, अवसंरचना, प्रणाली, युवा आबादी और मांग को भी रेखांकित किया।

प्रधानमंत्री के आवाहन के बाद वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने 13 मई 2020 से लेकर 17 मई 2020 तक आत्म्निर्भर भारत पैकेज का विवरण श्रृंखलाबद्ध ढंग से  जनता के सामने रखा।

विभिन्न मंत्रालयों ने आत्मबनिर्भर भारत अभियान के तहत आर्थिक पैकेज से संबंधित घोषणाओं को तुरंत लागू करना शुरू कर दिया। इस दिशा में सरकार की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि लगभग हर दिन नियमित समीक्षा के साथ-साथ आर्थिक पैकेज के कार्यान्वयन का विवेचन भी किया जा रहा है।

इन योजनाओं के कार्यान्वयन में अब तक हुई प्रगति पर नज़र डालें तो सकारात्मक संकेत साफ दिखते हैं।

नाबार्ड के जरिए किसानों के लिए 30,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आपातकालीन कार्यशील पूंजी राशि देने का लक्ष्य था, 28 अगस्त 2020 तक इसमें से 25,000 करोड़ रुपये का वितरण किया जा चुका था। विशेष तरलता सुविधा (एसएलएफ) के तहत 5000 करोड़ रुपये की शेष राशि छोटी एनबीएफसी और एनबीएफसी-एमएफआई के लिए आरबीआई द्वारा नाबार्ड को आवंटित की गई। नाबार्ड इसे शीघ्र ही शुरू करने के लिए परिचालन संबंधी दिशा-निर्देशों को अंतिम रूप दे रहा है।

इसके अलावा, नाबार्ड ने दो एजेंसियों एवं बैंकों के साथ मिलकर ‘संरचित वित्त और आंशिक गारंटी योजना’ भी शुरू की है, ताकि ऋणदाताओं से कर्ज प्राप्त करने में बिना रेटिंग वाली एनबीएफसी/एमएफआई की मदद की जा सके। इस तरह की दो एजेंसियां और बैंकों के साथ मिलकर तैयार की गई इस व्यवस्था से उन छोटे एमएफआई के लिए ऋण की पात्रता 5-6 गुना बढ़ जाएगी जिन्हें कोई भी रेटिंग प्राप्त नहीं है। जब एक बार इस योजना के लिए निर्धारित समस्त 500 करोड़ रुपये का इस्तेमाल सही ढंग से हो जाता है, तो इन छोटी एनबीएफसी/एमएफआई द्वारा 2500 से 3000 करोड़ रुपये तक की ऋण प्राप्ति की उम्मीद है। यह सुदूर और दुर्गम क्षेत्रों के लोगों, विशेषकर महिलाओं तक पहुंचने में एक गेम चेंजर साबित होगा।

एमएसएमई और व्यक्तियों को नए सिरे से ऋण देने हेतु एनबीएफसी, एचएफसी और एमएफआई के लिए 45,000 करोड़ रुपये की आंशिक ऋण गारंटी योजना 2.0 के तहत 28 अगस्त 2020 तक बैंकों ने 25,055.5 करोड़ रुपये के पोर्टफोलियो की खरीद को मंजूरी दे दी है और वे वर्तमान में अतिरिक्त 4,367 करोड़ रुपये के लिए अनुमोदन/बातचीत की प्रक्रिया में हैं।

   एनबीएफसी/एचएफसी/एमएफआई के लिए 30,000 करोड़ रुपये की विशेष तरलता योजना ने भी अच्छी प्रगति की है। योजना को लागू करने के लिए एसबीआईकैप को एक एसपीवी स्थापित करने का जिम्मा सौंपा गया था। यह योजना 1 जुलाई, 2020 को जारी की गई एक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से शुरू की गई थी। उसी दिन नियामक आरबीआई ने भी इस योजना पर एनबीएफसी और एचएफसी  को एक परिपत्र जारी कर दिया। 11 सितंबर, 2020 तक सैंतीस (37) प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है जिनमें 10590 करोड़ रुपये की राशि शामिल है। 783.5 करोड़ रुपये के वित्तपोषण के लिए छह (06) आवेदन प्रक्रियाधीन हैं।

एमएसएमई सहित कारोबारियों के लिए 3 लाख करोड़ रुपये का गारंटी-मुक्त स्वत: ऋण – व्यवसाय को राहत देने के लिए 29 फरवरी 2020 तक बकाया ऋण के 20% के बराबर अतिरिक्त कार्यशील पूंजी वित्तह रियायती ब्याज दर पर सावधि ऋण के रूप में प्रदान किया जाएगा। यह 25 करोड़ रुपये तक के बकाया ऋण और 100 करोड़ रुपये तक के कारोबार वाली उन इकाइयों के लिए उपलब्ध होगा, जिनके खाते मानकों के अनुरूप हैं। इन इकाइयों को स्वयं की ओर से कोई गारंटी या जमानत प्रदान नहीं करनी होगी। इस राशि पर 100% गारंटी भारत सरकार द्वारा दी जाएगी जो 45 लाख से भी अधिक एमएसएमई को 3 लाख करोड़ रुपये की कुल तरलता (लिक्विडिटी) प्रदान करेगी।

20 मई 2020 को कैबिनेट की मंजूरी लेने के बाद वित्तीय सेवा विभाग ने 23 मई को योजना के लिए परिचालन दिशा-निर्देश जारी किए और आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना (ईसीएलजीएस) फंड 26 मई को पंजीकृत किया गया था। व्यवसाय  के लिए व्यक्तिगत ऋणों को शामिल करने, बकाया ऋण सीमा को बढ़ाकर 50 करोड़ रुपये करने और वार्षिक कारोबार की सीमा को बढ़ाकर 250 करोड़ रुपये करने के लिए 4 अगस्त को दिशा-निर्देशों में संशोधन किए गए।

10 सितंबर 2020 तक 42 लाख से अधिक कर्जदारों को 1,63,226.49 करोड़ रुपये की अतिरिक्त ऋण राशि मंजूर की गई है। 10 सितंबर 2020 तक 25,01,999 कर्जदारों को 1,18,138.64 करोड़ रुपये की राशि वितरित की गई है। यह जानकारी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और निजी क्षेत्र के शीर्ष 23 बैंकों द्वारा जानकारी दी गई है।

आयकर रिफंड:

1 अप्रैल, 2020 से लेकर 8 सितंबर, 2020 तक की अवधि के बीच 27.55 लाख से ज्यादा करदाताओं को 1,01,308 करोड़ रुपये से भी अधिक के रिफंड जारी किए गए हैं। 25,83,507 मामलों में 30,768 करोड़ रुपये के आयकर रिफंड जारी किए गए हैं और 1,71,155 मामलों में 70,540 करोड़ रुपये के कॉरपोरेट टैक्स रिफंड जारी किए गए हैं। दरअसल, उन समस्त मामलों में 50 करोड़ रुपये तक के सभी कॉरपोरेट टैक्स रिफंड जारी कर दिए गए हैं, जहां भी देय थे। अन्य रिफंड प्रक्रियाधीन हैं।

 

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