एक नजर अपने अस्तित्व पर

‘मेरा भारत महान’ यह वाक्य हम आसानी से, सहजता से और बातों ही बातों में बोल लेते है, सुनते है और लिख भी देते है।
मैं भी तो इस लेख का शुभारम्भ इसी वाक्य से कर रही हूँ पर मेरा इसके पीछे कुछ गहरा उद्देश्य है।

आइये, आज इस पर कुछ सोचेंगे, ठहरेंगे, अब सोचने का वक्त आ गया है, न केवल सोचनेका…पर कुछ करने का भी।
मेरा भारत महान क्यों है? इसकां मूल है नारी। जी हां नारी…। नारी ही तो है निर्मात्री, जन्मदात्री, केवल जन्मदात्री ही नही संस्कारदात्री भी।
कितनी बड़ी बात है इस तरह नारी का जन्मदात्री और संस्कारदात्री होना।

इतिहास इस बात की गंवाही दे रहा है कि अगर न होती माता कौशल्या तो न होते पुरुषोत्तम श्री राम, न होती माता देवकी तो न होते सुदर्शन चक्रधारी योगीराज श्री कृष्ण, न होती माता विद्यावती तो न होते क्रान्तिवीर भगतसिंह, न होती इंदोर के एक छोटे से कस्वेमे रहनेवाली माता राधाबाई तो न होते वीर सावरकर।

इस भारत की भूमि आर्यो की भूमि है, आर्य यानि श्रेष्ठ। अर्थात श्रेष्ठों की भूमि। यहाँ वेदों के वचनो का पालन करने और कराने वाली विदुषी नारीओं से निर्माण हुए है, संत महन्त, योगी, यति, ऋषि, महर्षि, महापुरुष, क्रान्ति कारी, वीर-वीरांगनाएँ। इसीलिए तो कहलाया जगदगुरु और आज भी हम गर्व से कहते है ‘मेरा भारत महान’।

अन्तरिक्ष की यात्रा करके जब राकेश शर्मा जी इस भारत की भूमि पर वापस आये तब बडा प्रधान की भूमिका अदा करते हुए श्रीमति इन्दिरा गांधी ने सलामी भरी थी और पूछा था कि आपने अन्तरिक्ष से क्या देखा?

मुझे इस बात को लिखते हुए गर्व हो रहा है कि राकेशजी ने उत्तर दिया था ‘सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा’।
नारी का त्याग, समर्पण और मर्यादापूर्ण जीवन ही तो भारत को विश्व गुरु बनाने वाली निंव थी और उस निंव के कारण ही तो आज भी हम कह रहे है ‘मेरा भारत महान’। कितना मजबूत इतिहास बना दिया है उन नारियों नो। हमें इस इतिहास को और ऊंचाई पर रहे? कुछ तो सोचना ही होगा। आईए, आठ मार्च अन्तर राष्ट्रीय महिला दिन को साकार करने के लिए हम नारी जगत (यानिकी इतिहास बनानेवाली निंव) को कुछ आत्मनिरीक्षण करना होगा और अपने आपको गहराईयों में ले जा कर के एक नज़र करनी होगी अपने अस्तित्व पर कि हमारा अस्तित्व कही खो तो नहीं गया है? अपना गौरव यानिकि नारी का गौरव पश्चिमी डोर में बंध तो नहीं गया है? पश्चिमी रंगों में रंग तो नही गया है? पश्चिमी बहाव में बह तो नहीं रहा है? ऐसे विश्वगुरु भारत देश में एक जन्मदात्री और संस्कार दात्री की भूमिका में अपने आपको तोलने के लिए निम्न सवालों के जवाबों में ढूंढ़ना अपने अस्तित्व को। तो निम्न सवालों के उत्तर देते हुए नज़र करें अपने अस्तित्व पर।

1) क्या मैं नारी की भूमिका में संतुष्ट और खुश हूँ दिल के एक कोने में गर्व या दर्द है?

2) रात्रि में जल्दी सोना और सुबह जल्दी उठाने का क्रम बना हुआ है या बनाने की इच्छा है या होती है?

3) सुबह उठने के पश्चात प्रभु स्मरण करके उषापान, तदपश्चात सुबह चलना और व्यायाम, प्राणायाम, ध्यान आदि अपनी दैनिक दिनचर्या में सामिल है?

4) अपने इस विश्व गुरु भारत देश के लिए और भारतीय वैदिक संस्कृति की रक्षा के लिए कुछ करने की ईच्छा हो रही है?

5) अंग्रेजी भाषा, अंग्रेजी पहनावा, अंग्रेजी खानपान और अंग्रेजी सोच पर अधिक रुचि और आस्था है कि हिन्दी भाषा, हिन्दी खानपान, हिन्दी पहनावा और हिन्दी सोच पर?

6) हाई हैलो, मॉम, डॅड, बाय आदि शब्द प्रयोग से प्यार है या नमस्ते, धन्यवाद, माता, पिता, शुभ रात्रि आदि से?

7) ईश्वर की भेट रूप इस शरीर को खुला करना या रखना, शरीर के अंगों पर टेटू करना, इस शरीर पर कम कपडे डालकर नाच करना, चुस्त कपडे पहनना, ये सब ठीक लग रहा है जो बलात्कार जैसी घटनाओं को जन्म देकर पनपनेमे कारण भूत है। क्या आप इस बिंदु पर सहमत हो? किसी नारी या बेटी के शरीर पर कम कपडे देखकर पीड़ा या करुणा होती है?

8) पार्लर में जाकर अपने बाह्य रूप को सजाना ही सुन्दरता मानतें हो? क्या सादगी, सभ्यता, मर्यादा आदि के बिना नारी की सुन्दरता सम्भव है? क्या सोच है? प्रमाणिकता से उत्तर देना।

9) 31 दिसम्बर, रात को बारह बजे के बाद बड़े उमंग के साथ बड़े चाव के साथ मनाना और वेलेंटाईन डे मनाना ठीक लग रहा है, और खास करके अपने भारतवर्ष की युवा धरोहर का? चिन्ताए हुई है कभी इस बिन्दुओं को लेकर? की आप भी सामिल हो इस प्रवाह में?

10) परतन्त्र भारत को आजाद करने मे जिन्होंने अपना सर्वस्व लुटा दिया और विराशत में देकर चले गये आजादी। कम से कम उनको साल में केवल दो बार हाजी केवल दो बार सलामी भरने को जी चाहता है? कि हिल स्टेशन जाने को मन भागता है? बड़ा गहरा सवाल है कहीं नजर शर्म से जुक तो नहीं गई है न?

11) गर्भाधान संस्कार से लेकर अन्त्येष्टि तक के सोलह संस्कार के विषय में जानकारी है? क्या अपनी संतान निर्माण से पहले गर्भाधान संस्कार और गर्भ ठहर ने के पश्चात पुंसवन, सिमन्तोन्नयन आदि संस्कार किये है कि पता ही नहीं था?

12) क्या अपनी संतान को देश रक्षक, संस्कृति रक्षक और धर्मरक्षक बनाना चाहती हो या आजके माहोलमें ही जी ले यह ठीक मान रही हो?
सो बार सोच कर अपने आपको उत्तर देना। कठिन है ये बिंदू।

थक गई न इतने ढेर सारे सवालों के उत्तर देते देते?? हे समग्र नारी जगत। थकना नहीं है अब तो सारी थकान को भगाकर अपने आपको टटोलना होगा, नींद से जगना और जगाना होगा क्योंकि हम ही तो है पुराने और नए इतिहास की निंव। हम नारीयों से ही तो बना है मेरा भारत महान। आओं, बढ़ाएं इनकी आन बन और शान। तो फिर से करेगा सारा जहां प्रणाम ये है चारों वेदों का बयान।

आपकी प्रतिक्रिया...