मुस्लिम आबादी की रफ़्तार चिंताजनक

स्वाधीनता के बाद से सर्वधर्मीय हिन्दुओं की जनसंख्या के मुकाबले मुस्लिम जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है। इसी कारण विभिन्न राजनीतिक दल, मुस्लिमों के सामाजिक व धार्मिक संगठन अपने अस्तित्व के लिए मुसलमानों के वोटों की राजनीति कर रहे हैं। मुस्लिम राष्ट्रीय प्रवाह में तभी आ सकेंगे; जब उनकी आबादी की रफ्तार नियंत्रित होगी। विश्व जनसंख्या दिवस 11 जुलाई के अवसर पर पेश है; लेखक की पुस्तक ‘मुस्लिम जनसंख्या : एक चिंता’ के हालम में प्रकाशित हिन्दी संस्करण के एक अध्याय का सम्पादित अंश‡

भारत के पश्चिम बंगाल, असम, उत्तर प्रदेश, उत्तरांचल, बिहार, झारखंड, जम्मू-कश्मीर, केरल इन राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों में लक्षद्वीप में मुस्लिम जनसंख्या अधिक तेजी से बढ़ रही है। इसके बाद नम्बर आता है महाराष्ट्र, आंध प्रदेश, कर्नाटक, राजस्थान, ग्ाुजरात, दिल्ली, त्रिपुरा, मणिपुर राज्यों का जहां कुछ निश्चित जिलों में मुस्लिम जनसंख्या बढ़ रही है। पाकिस्तान, बांग्लादेश व नेपाल की सीमा से लगे जिलों में मुस्लिम आबादी बहुत तेजी से बढ़ रही है। इसके खतरे के रूप में इतिहास की पुनरावृत्ति हो सकती है। भारत के एक और विभाजन का खतरा पैदा हो गया है। इसी कारण मुस्लिम आबादी पर नियंत्रण करना समय की मांग है और देशहित की दृष्टि से भी आवश्यक है।

जम्मू-कश्मीर, लक्षद्वीप व असम में हिंदू आबादी की तुलना में मुस्लिम आबादी 50 फीसदी से अधिक है। अगले दस वर्षों में पश्चिम बंगाल व केरल तथा अगले 30 वर्षों में उत्तर प्रदेश, उत्तरांचल, बिहार, झारखंड ये राज्य 50 फीसदी से अधिक मुस्लिम जनसंख्या वाले राज्य बन जाएंगे। इन राज्यों में मुस्लिम वोटों पर सत्ता हथियाने की स्पर्धा चल रही है। इस स्पर्धा में नेताओं और दलों की विजय हो रही है, लेकिन भारत माता की पराजय हो रही है।

मुस्लिम जनसंख्या वृध्दि की रफ्तार का परिणाम भारत के भौगोलिक व राजनीतिक क्षेत्रों पर हो रहा है। 2011 की जनगणना के अनुसार विभिन्न राज्यों में मुस्लिम आबादी के आंकड़े देखें तो साफ है कि भारत के सीमावर्ती प्रदेशों में निश्चित रूप से खतरा मंडरा रहा है। भारत के कुछ प्रदेशों में 1961 से हिंदू जनसंख्या कम होती दिखाई दे रही है। इस समस्या की ओर गंभीरता से ध्यान देना और उपाय करना आवश्यक है।

1. पश्चिम बंगाल में 1961 में हिंदू जनसंख्या 79.41 प्रतिशत थी, जो 2011 में घट कर 71.76 प्रतिशत हुई। 1961 में मुस्लिम जनसंख्या 20 प्रतिशत थी, जो 2011 में बढ़कर 27.64 प्रतिशत हो गई।

2. असम में 1961 में हिंदू जनसंख्या 70.27 प्रतिशत थी, जो 2011 में घटकर 63.08 हो गई। मुस्लिम आबादी 1961 में 23.29 प्रतिशत थी, जो 2011 में बढ़कर 33.22 प्रतिशत हो गई।

3. उत्तर प्रदेश में 1961 में हिंदू जनसंख्या 85.23 प्रतिशत थी, जो 2011 में घट कर 79.38 प्रतिशत हुई। 1961 में मुस्लिम जनसंख्या 14.63 प्रतिशत थी, जो 2011 में बढ़कर 20.50 प्रतिशत हो गई।

4. बिहार में 1961 में हिंदू जनसंख्या 86.46 प्रतिशत थी, जो 2011 में घट कर 81.44 प्रतिशत हुई। 1961 में मुस्लिम जनसंख्या 12.45 प्रतिशत थी, जो 2011 में बढ़कर 18.50 प्रतिशत हो गई।

5. जम्मू-कश्मीर में 1961 को हिंदू जनसंख्या 31.62 प्रतिशत थी, जो 2011 में घट कर 30.80 प्रतिशत हुई। 1961 में मुस्लिम जनसंख्या 68.30 प्रतिशत थी, जो 2011 में बढ़कर 69.00 प्रतिशत हो गई।

6. केरल में 1961 में हिंदू जनसंख्या 60.87 प्रतिशत थी, जो 2011 में घट कर 54.40 प्रतिशत हुई। 1961 में मुस्लिम जनसंख्या 17.91 प्रतिशत थी, जो 2011 में बढ़कर 25.50 प्रतिशत हो गई।

मुस्लिम जनसंख्या की तुलना में हिंदू जनसंख्या इसी तरह कम होती रही तो विघटनवादी तत्वों व आंदोलनों को बल मिल सकता है। क्योंकि 1990 के बाद बड़े पैमाने पर आतंकवाद बढ़ा है। मुंबई, दिल्ली, अहमदाबाद, ग्ाुवाहाटी, बेंगलुरू आदि अनेक शहरों में आतंकवादी कार्रवाइयां हुई हैं। इसमें मासूम भारतीय बलि चढ़े व भारत की राष्ट्रीय सम्पदा की हानि हुई। इन आतंकवादी गतिविधियों पर गौर करें तो दिखाई देगा कि इनमें अधिकतर मुस्लिम लिप्त हैं। पाकिस्तान व विदेशी मुस्लिम आतंकवादी अपने इरादे पूरे करने के लिए भारत के मुस्लिमों को साथ लेकर कार्रवाइयां कर रहे हैं। भारत की एकात्मता के लिए आतंकवाद को समूल नष्ट करना अत्यंत जरूरी है। कश्मीर के बारे में तथा इस निमित्त आतंकवादी कार्रवाइयों के बारे में मुस्लिम जनसंख्या में विस्फोट पैदा करने की साजिश कुछ भारतीय व मुस्लिम संगठन कर रहे हैं। उपर्युक्त प्रदेशों में मुस्लिम संख्या अधिक रफ्तार से बढ़ती रही तो विघटनकारी आंदोलनों को बल मिल सकता है।
2001 की जनगणना में 593 जिलों की धार्मिक जनसंख्या के आंकड़े आधिकारिक रूप से प्रकाशित किए गए हैं। इन आँकड़ों पर सन 2001 में गंभीरता से गौर किया जाता तो सन 2011 में मुस्लिम जनसंख्या नियंत्रित करने में सफलता मिलती। लेकिन हम मुस्लिम वोटों की राजनीति करने में ही मशग्ाूल हैं। सन 2001 में 593 जिलों में से 233 जिलों में 10 फीसदी से अधिक मुस्लिम जनसंख्या का प्रतिशत चिंताजनक है।

1. असम 1, जम्मू-कश्मीर 8, लक्षद्वीप 1 इस तरह कुल 10 जिलों में 70 प्रतिशत से अधिक मुस्लिम आबादी हो गई है।

2. पश्चिम बंगाल 2, असम 5, उत्तर प्रदेश 1, बिहार 1, जम्मू-कश्मीर 2 इस तरह कुल 11 जिलों में 50 प्रतिशत से अधिक मुस्लिम आबादी है।

3. पश्चिम बंगाल 1, असम 1, उत्तर प्रदेश 4, बिहार 2, आंध प्रदेश 1, हरियाणा 1 इस तरह कुल 10 जिले ऐसे हैं जहां मुस्लिम आबादी 40 प्रतिशत से अधिक है।

4. पश्चिम बंगाल 2, असम 3, उत्तर प्रदेश 6, बिहार 1, झारखंड 2, केरल 2, तमिलनाडु 2, पांडिचेरी 1 इस तरह कुल 19 जिले ऐसे हैं जहाँ 30 प्रतिशत से अधिक मुस्लिम आबादी है।

5. पश्चिम बंगाल 2, असम 4, उत्तर प्रदेश 4, उत्तरांचल 1, बिहार 3, झारखंड 2, जम्मू-कश्मीर 1, केरल 4, महाराष्ट्र 4, कर्नाटक 3, राजस्थान 1, ग्ाुजरात 2, मध्य प्रदेश 1, मणिपुर 1 इस तरह कुल 33 जिले ऐसे हैं जहां मुस्लिम आबादी 20 प्रतिशत से अधिक है।

6. पश्चिम बंगाल 3, असम 2, उत्तर प्रदेश 31, उत्तरांचल 1, बिहार 20, झारखंड 4, जम्मू-कश्मीर 1, केरल 4, महाराष्ट्र 15, आंध प्रदेश 9, कर्नाटक 16, राजस्थान 14, ग्ाुजरात 7, मध्य प्रदेश 9, तमिलनाडु 4, दिल्ली 3, हरियाणा 2, पाँडिचरी 1, त्रिपुरा 2, मणिपुर 1, मेघालय 1 इस तरह 150 जिले ऐसे हैं जहां मुस्लिम आबादी 10 प्रतिशत से अधिक है।

सन 2011 की जनगणना के अनुसार 640 जिलों में से 252 जिलों में 10 प्रतिशत से अधिक मुस्लिम आबादी चिंता का विषय है। 2001 की तुलना में यह जनसंख्या अधिक तेजी से ब.ढी। ऐसे जिलों की संख्या देखने पर ऐसा लगता है कि अगले कुछ दशकों में मुस्लिम जनसंख्या वाले जिले अधिक होंगे। विशेष रूप से पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल की सीमा से लगे जिलों में मुस्लिम आबादी की वृध्दि चिंता की बात है।
सन 2001 में 10 प्रतिशत से अधिक मुस्लिम आबादी वाले जिलों की संख्या 233 थी, जो सन 2011 में बढ़कर 252 हो गई। सन 2021 तक यह संख्या कम से कम 25 प्रतिशत से अधिक होगी। इसके अलावा जो जिले आज 10 प्रतिशत मुस्लिम जनसंख्या वाले हैं वे अगले दस वर्षों में 20 प्रतिशत मुस्लिम जनसंख्या वाले जिले हो जाएंगे। मुस्लिम जनसंख्या में यह वृध्दि धीरे-धीरे एक समस्या (स्लो पॉयजनिंग) बन रही है। क्योंकि, सन 2011 में कुल जनसंख्या में से 11 करोड़ 89 लाख 74 हजार 202 मुस्लिम आबादी पश्चिम बंगाल, असम, उत्तर प्रदेश, उत्तरांचल, बिहार, झारखंड, जम्मू-कश्मीर, केरल, लक्षद्वीप इन राज्यों में थी। यह आबादी कुल भारतीय मुस्लिम आबादी के 67.06 प्रतिशत है। शेष भारत में केवल 33 प्रतिशत मुस्लिम लोग हैं। उपर्युक्त राज्यों में कुल 229 जिले हैं तथा इनमें से 75 जिलों में मुस्लिम जनसंख्या भारी मात्रा में बढ़ गई है। इनमें से ज्यादातर जिले पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल की सीमा के पास हैं। इन खतरों के बावजूद मुस्लिम वोटों की राजनीति चल रही है।

पिछले 40 वर्षों की राजनीति में मुस्लिम मतदाताओं का महत्व बढ़ गया है। विभिन्न राजनीतिक दल, मुस्लिम सामाजिक व धार्मिक संगठन अपने अस्तित्व के लिए मुस्लिम समाज को बंधक बनाकर मुस्लिम वोटों की राजनीति कर रहे हैं। भारत की संसद में 543 प्रतिनिधि हैं। इनमें से विभिन्न राज्यों में 167 निर्वाचन क्षेत्रों में मुस्लिम मतदाताओं का महत्व अधिक है। सन 2009 में हुए लोकसभा चुनाव में निर्वाचन क्षेत्र निहाय मुस्लिम मतदाताओं का प्रतिशत इस प्रकार है-

1. पश्चिम बंगाल 1, असम 2, बिहार 1, जम्मू-कश्मीर 2, केरल 1, लक्षद्वीप 1 इस तरह कुल 8 निर्वाचन क्षेत्रों में 70 प्रतिशत से अधिक मुस्लिम मतदाता हैं।

2. पश्चिम बंगाल 1, असम 1, उत्तर प्रदेश 3, बिहार 1, जम्मू-कश्मीर 1, आंध प्रदेश 1 इस तरह कुल 8 निर्वाचन क्षेत्रों में 50 प्रतिशत से अधिक मुस्लिम मतदाता हैं।

3. पश्चिम बंगाल 1, उत्तर प्रदेश 2, बिहार 3, केरल 1 व दिल्ली 1 इस तरह कुल 8 निर्वाचन क्षेत्रों में 40 प्रतिशत से अधिक मुस्लिम मतदाता हैं।

4. पश्चिम बंगाल 2, असम 1, उत्तर प्रदेश 3, बिहार 1, झारखंड 1, केरल 1, महाराष्ट्र 2, कर्नाटक 2, राजस्थान 1, मध्य प्रदेश 1, दिल्ली 1 इस तरह कुल 16 निर्वाचन क्षेत्रों में 30 प्रतिशत से अधिक मुस्लिम मतदाता हैं।

5. पश्चिम बंगाल 7, असम 2, उत्तर प्रदेश 12, उत्तरांचल 1, बिहार 3, झारखंड 2, जम्मू-कश्मीर 1, केरल 2, महाराष्ट्र 1, कर्नाटक 2, राजस्थान 1, ग्ाुजरात 2, मध्य प्रदेश 1, तमिलनाडु 2, हरियाणा 1 इस तरह कुल 40 निर्वाचन क्षेत्रों में 20 प्रतिशत से अधिक मुस्लिम मतदाता हैं।

6. पश्चिम बंगाल 10, असम 3, उत्तर प्रदेश 18, उत्तरांचल 1, बिहार 10, झारखंड 5, केरल 3, महाराष्ट्र 5, आंध प्रदेश 8, कर्नाटक 6, राजस्थान 4, ग्ाुजरात 3, मध्य प्रदेश 6, तमिलनाडु 4, त्रिपूरा 1 इस तरह कुल 87 निर्वाचन क्षेत्रों में 10 प्रतिशत से अधिक मुस्लिम मतदाता हैं।

इन निर्वाचन क्षेत्रों में मुस्लिम मतदान निर्णायक बन गया है। क्योंकि, मुस्लिम मतदाता देश के समक्ष समस्याओं को ध्यान में रख कर नहीं अपितु धार्मिक विचारों को महत्व देकर अधिक मात्रा में मतदान करते हैं। पिछले 65 वर्षों में मुस्लिम समाज के विकास के बजाय उनका विभिन्न कारणों से उपयोग किया गया। यदि राजनेता और मुस्लिम संगठन मुस्लिम समाज का केवल उपयोग भर करने की नीति जारी रखे तो भारतीय मुस्लिम राष्ट्रीय प्रवाह में कभी आ नहीं सकेंगे। ऐसे में मुस्लिम जनसंख्या की वृध्दि पर कभी नियंत्रण नहीं हो सकेगा।

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