RSS नाम से नया संगठन बनाने की कोशिश, कोर्ट ने पूछा “लाखो स्वंय सेवकों को गुमराह करना चाहते हो क्या”

राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ (RSS) के नाम से एक और संगठन बनाने की साजिश चल रही है और इसके लिए सुप्रीम कोर्ट तक का दरवाजा खटखटाया गया है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस धनंजय चंद्रचूड़ ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए इसे खारिज कर दिया और याचिकाकर्ता को फटकार लगाते हुए कहा कि आखिर एक ही नाम से दूसरा संगठन बनाने के पीछे की वजह क्या है? सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश ने याचिकाकर्ता से पूछा कि आखिर एक ही नाम से दूसरा संगठन क्यों बनाने की कोशिश की जा रही है क्या इसके पीछे पहले संगठन को बदनाम करने की साज़िश है? सुप्रीम कोर्ट की तरफ से कहा गया कि जब पहले से ही आरएसएस नाम से एक संगठन रजिस्टर्ड है तो फिर उस नाम से किसी और को रजिस्ट्रेशन की अनुमति नहीं दी जा सकती है।

आप को बता दें कि महाराष्ट्र के नागपुर निवासी जनार्दन मून ने आरएसएस नाम से रजिस्ट्रेशन के लिए आयुक्त पास आवेदन दिया था जिस पर आयुक्त ने स्वीकृति देने से मना कर दिया। जनार्दन मून ने आयुक्त को नागपुर हाई कोर्ट में चैलेंज किया था लेकिन हाई कोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई करने से ही मना कर दिया जिसके बाद उन्होने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया लेकिन यहां से भी जनार्दन मून को निराशा ही हाथ लगी और सुप्रीम कोर्ट ने यह कहते हुए याचिका को खारिज कर दिया कि जब पहले से उस नाम से रजिस्ट्रेशन हुआ है तो फिर एक नाम पर दो संगठनों को चलाने की इजाज़त सरकार कैसे दे सकती है जबकि याचिकाकर्ता की तरफ से यह दलील दी गयी कि अभी तक राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ नाम से कोई भी पंजीकरण नहीं किया गया है जिससे इस नाम से पंजीकरण करने से मना नहीं किया जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील से कई सवाल पूछे गये। कोर्ट ने कहा कि आखिर आप उस नाम का उपयोग क्यों करना चाहते है जो पहले से ही पूरी दुनिया में विख्यात है? क्या आप उन लाखों स्वंय सेवकों को गुमराह करना चाहते है जो देश और समाज की सेवा में हमेशा लगे रहते है? कोर्ट ने पूछा कि आखिर आप जिस संगठन को स्थापित करना चाहते है उसका उद्देश्य क्या होगा। कोर्ट की तरफ से पूछे गये तमाम सवालों के जवाब याचिकाकर्ता के पास नहीं थे जिसके बाद कोर्ट ने इस याचिका का खारिज कर दिया।

राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ की जन्मभूमि नागपुर है और याचिकाकर्ता भी वहीं का निवासी है ऐसे में यह कहा जा सकता है कि कहीं ना कहीं याचिकाकर्ता के मन में संघ को लेकर कुछ विरोधाभास होगा जिससे वह उसी नाम से संगठन तैयार कर संघ की गरिमा को कम करने का प्रयास करना चाहता है। फिलहाल कोर्ट की तरफ से याचिकाकर्ता जनार्दन मून को बेबुनियाद याचिका दायर करने को लेकर फटकार लगायी गयी है और याचिका भी खारिज कर दी गयी।

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