दंगाईयों की रिहाई के बाद किसान संगठनों का मोबाइल टॉवर पर हमला, क्षतिग्रस्त किये 1500 से अधिक टॉवर

किसान और सरकार के बीच का फ़ासला लगातार बढ़ता ही जा रहा है। किसान संगठन कृषि क़ानूनों को वापस लेने पर अड़े हुए है जबकि सरकार भी पीछे हटने के मूड में नजर नहीं आ रही है। सरकार और किसान दोनों के बीच बैठकें जारी है अगली बैठक 30 दिसंबर को फिर से होने वाली है। ऐसी उम्मीद बताई जा रही है इस बार की बैठक में शायद कुछ अंतिम निर्णय निकल सके। अगर सरकार और किसान संगठन के बीच बातचीत सार्थक नहीं होती है तो 31 दिसंबर को किसान संगठन की तरफ से ट्रैक्टर मार्च निकाला जायेगा। 
 
किसान आंदोलन को लेकर यह आरोप लगाया जा रहा था कि विपक्ष किसानों को सहयोग दे रहा है और सरकार के खिलाफ हो रहे आंदोलन को बढ़ावा दे रहा है जबकि किसान संगठन की तरह से यह बयान सामने आया है कि विपक्ष किसानों के साथ खड़ा नहीं है। किसान संगठन ने यहां तक आरोप लगा दिया कि अगर देश का विपक्ष मजबूत होता तो किसानों को आंदोलन करने की जरुरत नहीं होती। भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि किसान अपने हक के लिए अकेले लड़ रहा है जबकि विपक्ष अपनी भूमिका नहीं निभा रहा है जिससे आज देश का किसान लाचार हो रहा है। राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार द्वारा लाया गया कृषि बिल किसानों के हित में नहीं है इसलिए सरकार को इसे वापस लेना चाहिए। 
आम आदमी पार्टी अक्सर अपने फ़ैसलों को लेकर विवादों में रहती है। इस बार भी आप सरकार की तरफ से ऐसा ही कुछ देखने को मिल रहा है। आप सरकार की तरफ से ऐलान किया गया है कि वह दिल्ली की सीमाओँ पर विरोध कर रहे किसानों को वाईफाई की सुविधा मुहैया कराएगी। आप सरकार के इस फैसले को लेकर उसका मज़ाक बनाया जा रहा है क्योंकि इस फैसले से किसानों का कोई फायदा नहीं हो रहा है वह सरकार के खिलाफ विरोध कर रहे है जिसमें वाईफाई से उनको कोई लाभ नहीं है। 
 
किसान संगठन करीब 30 दिन से आंदोलन कर रहे है लेकिन अभी तक उनके हाथ कुछ भी सार्थक परिणाम नहीं लगे है जिससे परेशान होकर किसान अब अलग अलग तरह से विरोध प्रदर्शन कर रहे है। सरकार के विरोध के बाद अब किसानों ने पेट्रोल पंप और मोबाइल टॉवर को नुकसान पहुंचाना शुरु कर दिया है। किसान विशेष तौर पर रिलायंस के टावर को अपना निशाना बना रहे है इससे पहले किसानों ने जियो सिम का बहिष्कार किया था। जानकारी के मुताबिक किसानों ने करीब 1500 मोबाइल टॉवर को नुकसान पहुंचाया है जिसके बाद वहां की दूरसंचार व्यवस्था बिगड़ गयी है और बच्चों की शिक्षा और घर से काम कर रहे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। टेलीकॉम कंपनियों ने पुलिस से टॉवर की सुरक्षा की मांग की है। 
 

दिल्ली की सीमाओं पर किसान के नाम पर आंदोलन जारी है लेकिन जिस तरह से लगातार आराजकता बढ़ती जा रही है उससे यह संदेह पैदा होता है कि आखिर यह कैसे किसान है जो संपत्तियों का नुकसान कर रहे है और विशेष सुविधाओं के साथ लैस होकर विरोध कर रहे है। किसान आंदोलन के दौरान कुछ अर्बन नक्सलियों और दिल्ली दंगों के आरोपियों की रिहाई की भी मांग उठी थी जिससे यह साफ हो गया कि यह आंदोलन किसानों का नहीं हो सकता है। यह भी कहा जा सकता है कि किसानों ने आंदोलन शुरु किया था लेकिन अब यह उनके हाथ से निकल चुका है और इसे राष्ट विरोधी दल संचालित कर रहे है। 

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