दुनिया में लहराया भारत का परचम, भारत ने 24 देशों को दी मुफ्त वैक्सीन

कोरोना काल में भारत उन देशों में शामिल था जो कोरोना से अत्यधिक पीड़ित थे। विश्व में दूसरे नंबर पर भारत में कोरोना से संक्रमित लोग थे हालांकि यहां सरकार की सफल नीति की वजह से मृतकों की संख्या में भारी कमी थी जो ना सिर्फ लोगों के लिए बल्कि सरकार के लिए भी राहत की बात थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सशक्त नेतृत्व और दूरगामी फ़ैसलों की वजह से भारत इस बड़ी आपदा से आराम से निपटने में सफल रहा है। कोरोना आपदा के दौरान पीएम ने देशवासियों से यह अपील भी की थी कि वह इस आपदा को अवसर में बदलें। पीएम की अपील काफी हद तक कारगर साबित हुई और तमाम क्षेत्रों में हम पूर्ण रुप से आत्मनिर्भर हो गये।

 
 
कोरोना संक्रमण के साथ ही वैक्सीन को लेकर भी लड़ाई तेज हो गयी थी। पूरा विश्व कोरोना वैक्सीन बनाने के लिए मेहनत कर रहा था जिसमें से कुछ देशों को सफलता मिली है जिसमें भारत भी शामिल है। भारत के डॉक्टरों और वैज्ञानिकों ने दो वैक्सीन तैयार कर लिया था और इसको लोगों को लगाने का काम भी जारी है। पहले चरण में स्वास्थ्य कर्मियों को दिया जा रहा है क्योंकि वह संक्रमित लोगों से सबसे नज़दीक होते है। सरकार की नीति के मुताबिक अब दूसरे चरण से यह आत्यावश्यक लोगों को दिया जायेगा और फिर आम लोगों तक भी पहुंचाया जायेगा। 
 
 
केंद्र की मोदी सरकार जितनी अपने लोगों के लिए चिंतित है उतनी ही दूसरे देशों के लिए भी चिंतित है। भारत में जहां वैक्सीन देने का काम जारी है वहीं दूसरे देशों को भी मुफ्त की वैक्सीन दी जा रही है जिसके लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन और संयुक्त राष्ट्र भारत की प्रशंसा कर चुके है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के मुताबिक अब तक 24 देशों वैक्सीन की मांग आ चुकी है यह सभी देश भारत में बनी वैक्सीन कोविशील्ड और कोवैक्सीन की मांग कर रहे है जबकि भारत 87 लाख डोज वैक्सीन दूसरे देशों को बांट चुका है। भारत ने अभी तक बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, अफगानिस्तान, अल्जीरिया, म्यांमार, बहरीन, मिस्र, मंगोलिया, मालदीव, सऊदी अरब, ओमान, निकारागुआ, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात जैसे कई देशों को वैक्सीन भेज दिया है। 
 
  
भारत में दो वैक्सीन को मंजूरी मिल चुकी है जबकि अभी और कई कंपनियां वैक्सीन की रेस में चल रही है ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि इस साल दिसंबर तक करीब 8 और नई वैक्सीन को सरकार से मंजूरी मिल सकती है। अगर ऐसा होता है तो भारत ना सिर्फ वैक्सीन के मामले में पूर्णरुप से आत्मनिर्भर होगा बल्कि विश्व में सबसे ज्यादा वैक्सीन आपूर्ति करने वाला देश बनेगा। भारतीय वैक्सान कोविशील्ड की उच्च गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है। अधिक प्रभावशाली होने की वजह से पूरे विश्व के अलग अलग देश इस वैक्सीन की मांग कर रहे है। इसकी गुणवत्ता को इस बात से भी आंका जा सकता है कि डब्लूएचओ ने भी इसके इस्तेमाल को मंजूरी दे दी थी। 
 
WHO द्वारा भारतीय वैक्सीन को मंजूरी दिये जाने के बाद अब इसे बाकी देशों में भी भेजा जा सकता है इसके साथ ही कोवैक्स प्रोग्राम के तहत यह वैक्सीन उन देशों को भी मिलेगी जिनके पास इसे खरीदने के लिए पैसे नहीं है। WHO उन गरीब देशों को वैक्सीन मुहैया कराता है जिनकी आर्थिक हालात अच्छी नही होती है। पाकिस्तान को भी कोवैक्स प्रोग्राम के तहत वैक्सीन मुहैया करायी जायेगी क्योंकि आतंक के सहारे चल रहे पाकिस्तान की हालत किसी से भी छुपी नही है। अपनी हरकतों की वजह से पाकिस्तान पूरे विश्व की आंख पर चढ़ा हुआ है और भारत के साथ तो संबंध बिल्कुल भी अच्छे नही है। कोवैक्स प्रोग्राम के तहत पाकिस्तान को 1.70 करोड़ वैक्सीन खैरात में दी जायेगी।  
 
 
भारत में जिन दो वैक्सीन को मंजूरी मिली है उनमें से एक है कोविशील्ड और दूसरी है कोवैक्सीन। कोविशील्ड को महाराष्ट्र के पुणे में सीरम इस्टीट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा तैयार किया जा रहा है। यह दुनिया की सबसे बड़ी वैक्सीन उत्पादक कंपनी है। सीरम इस्टीट्यूट ऑफ इंडिया दुनिया की 60 फीसदी वैक्सीन अकेले तैयार करती है। अगर वर्तमान की बात करें तो सीरम की तरफ से हर महीने करीब 7 करोड़ वैक्सीन का उत्पादन किया जा रहा है। वहीं भारत बायोटेक कोवैक्सीन का उत्पादन कर रहा है जो एक साल में करीब 20 करोड़ वैक्सीन का उत्पादन कर सकती है फिलहाल में भारत बायोटेक के पास करीब 2 करोड़ कोवैक्सीन के डोज उपलब्ध है। 

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