दक्षिणी राज्यों में अपनी-अपनी जीत के दावे

केरल में इस बार भाजपा के नेतृत्व वाले राजग गठबंधन ने राज्य की कई सीटों पर लड़ाई को त्रिकोणीय बना दिया है और पहली बार राज्य में उसकी सशक्त उपस्थिति को नजरंदाज नहीं किया जा सकता।

दक्षिणी राज्यों तमिलनाडु व केरल के साथ-साथ केंद्र शासित प्रदेश पुड्डुचेरी में छ: अप्रैल को एक चरण में मतदान शांतिपूर्ण तरीके से सम्पन्न हो चुका है। सबसे कम 72.78 प्रतिशत मतदान तमिलनाडु में हुआ है। जबकि केरल में 74.02 प्रतिशत और केन्द्रशासित प्रदेश पुड्डुचेरी में 81.88 प्रतिशत मतदान हुआ है। जनमत का निर्णय और उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला ईवीएम मशीनों में बंद हो गया है। अब सबको दो मई का इंतजार है, जिस दिन मतगणना होगी और नतीजे सामने आएंगे। आमतौर पर चुनाव के बाद आने वाले एक्जिट पोल पर भी चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में अंतिम चरण का मतदान पूरा होने तक रोक लगा रखी है। चुनाव परिणाम के लिए इतनी लंबी प्रतीक्षा राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के लिए बहुत भारी है। इस बीच सभी राजनीतिक दल अपने आन्तरिक सर्वेक्षण का आंकलन कर अपनी-अपनी जीत का दावा कर रहे हैं। लेकिन, हार-जीत का अंतिम फैसला तो अब दो मई को ही होगा।

जहाँ तक चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों की बात की जाए तो केन्द्र शासित प्रदेश पुड्डुचेरी में राजग की सरकार बनना तय माना जा रहा है। जबकि केरल में पहले की अपेक्षा कम सीटों पर जीत के साथ वाममोर्चे के गठबंधन की सरकार बनने और तमिलनाडु में मुख्य विपक्षी दल द्रमुक के नेतृत्व वाले गठबंधन की जीत होने की संभावना है। लेकिन, चुनाव पूर्व के ये अनुमान कितने सही साबित होते हैं यह तो सही वक्त आने पर ही पता चलेगा। हालांकि मतगणना से पूर्व आने वाले एक्जिट पोल में भी केरल व तमिलनाडु में चुनाव परिणाम की संभावनाओं के नये संकेत देखने को मिल सकते हैं। आमतौर पर इन दोनों राज्यों में हर पांच साल में सरकारें बदलने का चलन देखा जाता रहा है। लेकिन इस बार केरल में इसके विपरीत वाममोर्चे की सरकार की सत्ता में वापसी की संभावना व्यक्त की गयी है। अब देखना होगा कि दो मई को यह संभावना सही साबित होती है या नतीजे चौंकाने वाले होंगे। केरल में इस बार भाजपा के नेतृत्व वाले राजग गठबंधन ने राज्य की कई सीटों पर लड़ाई को त्रिकोणीय बना दिया है और पहली बार राज्य में उसकी सशक्त उपस्थिति को नजरंदाज नहीं किया जा सकता।

सबसे अधिक 234 विधानसभा सीटों वाले राज्य तमिलनाडु की राजनीति द्रमुक और अन्नाद्रमुक के इर्द-गिर्द ही घूमती रही है। दोनों राजनीतिक दल बारी-बारी से राज्य में सत्ता की बागडोर संभालते रहे हैं। जहां अन्नाद्रमुक के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार को इस बार भी सत्ता में अपनी वापसी की उम्मीद है, तो वहीं राज्य में 2011 से ही सत्ता से बाहर मुख्य विपक्षी दल द्रमुक के नेतृत्व वाले गठबंधन को भी अपनी जीत सुनिश्चितत दिखाई दे रही है। दरअसल 2019 के लोकसभा चुनाव में द्रमुक गठबंधन की एकतरफा जीत को देखते हुए उसके सत्ता में वापसी की संभावना अधिक मानी जा रही है और चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों में भी द्रमुक की जीत की संभावना के संकेत हैं। 2016 के विधानसभा चुनाव में 136 सीटें जीतने वाले सत्तारूढ़ गठबंधन अन्नाद्रमुक को 40.88 प्रतिशत वोट मिले थे। जबकि 39.85 प्रतिशत वोट पाने वाले द्रमुक गठबंधन ने 89 सीटें जीती थी। चुनाव पूर्व सर्वेक्षण के मुताबिक इस बार के विधानसभा चुनाव में द्रमुक गठबंधन को 46प्रतिशत वोट मिलने और लगभग 177 सीटें जीतने की संभावना है। जबकि अन्नाद्रमुक के नेतृत्व वाले गठबंधन को करीब 35 प्रतिशत वोट के साथ 50 सीटें मिलने का अनुमान है।तमिलनाडु में पहली बार राज्य की राजनीति की पहचान बन चुके दो प्रमुख राजनेताओं पूर्व मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि और जे. जयललिता की अनुपस्थिति में विधानसभा चुनाव सम्पन्न हुआ है। जहां एक ओर अपने पिता की विरासत संभालने वाले द्रमुक अध्यक्ष एवं विपक्ष के नेता एम.के. स्टॉलिन के सामने यह चुनाव जीतकर सत्ता में पार्टी की वापसी कराने की चुनौती है, वहीं दूसरी ओर सत्तारूढ़ अन्नाद्रमुक के मुख्यमंत्री ई.के. पलानीस्वामी व उप मुख्यमंत्री ओ. पन्नीरसेल्वम की जोड़ी के सामने चुनाव जीतकर सत्ता में वापसी करने के साथ ही पार्टी के राजनीतिक भविष्य को मजबूती प्रदान करने की चुनौती है। चुनाव परिणाम अन्नाद्रमुक की सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता के निधन के बाद दो खेमों में बंटी पार्टी को एकजुट कर पांच साल तक सरकार चलाने वाले मुख्यमंत्री ई. के. पलानीस्वामी के सुशासन और बीते एक साल में कोरोना महामारी के संकट के दौरान राज्य सरकार के कामकाज पर भी मुहर लगाएंगे। अगर, द्रमुक गठबंधन चुनाव जीतता है तो पूर्व मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि के निधन के बाद पहली बार उनके पुत्र और पार्टी अध्यक्ष एम.के. स्टॉलिन राज्य के मुख्यमंत्री की कुर्सी और सत्ता की बागडोर संभालेंगे। देश के दोनों प्रमुख राष्ट्रीय दल भाजपा और कांग्रेस यहां पर क्रमश: अन्नाद्रमुक और द्रमुक के साथ मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं। जबकि तमिल फिल्मों के सुपरस्टार और अभिनेता से राजनेता बने कमल हासन की राजनीतिक पार्टी मक्कल माईम निधि (एमएनएम) सहित कई अन्य छोटे राजनीतिक दल भी अपने बेहतर प्रदर्शन से द्रमुक और अन्नाद्रमुक का खेल बना और बिगाड़ सकते हैं। तमिलनाडु में पहली बार भाजपा को न केवल अपना खाता खुलने बल्कि बेहतर प्रदर्शन की भी उम्मीद दिखाई दे रही है अपितु राज्य की कन्याकुमारी लोकसभा सीट पर हो रहे उपचुनाव में भी भाजपा उम्मीदवार की जीत की संभावना प्रबल है। लोकसभा की इस सीट पर कांग्रेसी सांसद वसंत कुमार के कोरोना से निधन के बाद उपचुनाव कराया जा रहा है।

केरल देश का एकमात्र ऐसा राज्य है जहां वर्तमान में वामपंथी दल की सरकार सत्ता में है। 140 विधानसभा सीटों वाले इस राज्य में माकपा (सीपीएम) के नेतृत्व वाले लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट और कांग्रेस के नेतृत्व वाले युनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के बीच मुख्य मुकाबला माना जा रहा है। जहां एक ओर सत्तारूढ़ वाममोर्चा सत्ता में अपनी वापसी को लेकर आश्व्स्त है, वहीं यूडीएफ भी सत्ता में अपनी वापसी की उम्मीद लगाये बैठा है। मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के नेतृत्व वाला वाममोर्चा गठबंधन स्थानीय निकाय के चुनावों में पार्टी के बेहतर प्रदर्शन और अपने मुख्य प्रतिद्वंदी युनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट में नेतृत्व संकट की वजहों से अपनी जीत को लेकर आश्वस्त है। जबकि कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ को राज्य में पांच साल में सत्ता परिवर्तन की परम्परा के आधार पर अपनी जीत की संभावना दिखाई दे रही है। लेकिन, इस बार केरल विधानसभा चुनाव में पहली बार पूरी ताकत से चुनाव लड़ रहा भाजपा के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन एलडीएफ और यूडीएफ दोनों का खेल बिगाड़ सकता है। पिछले विधानसभा चुनाव में लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट को 43.1 प्रतिशत वोट के साथ 91 सीटों पर जीत हासिल हुई थी। जबकि युनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट ने 38.6 प्रतिशत वोट के साथ 47 सीटों पर जीत हासिल की थी। भाजपा के नेतृत्व वाले राजग को राज्य में 14.9 प्रतिशत वोट मिले थे, किन्तु उसे सिर्फ एक सीट पर जीत मिली थी। इस बार चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों के मुताबिक एलडीएफ को 42.4 प्रतिशत वोट के साथ 77 सीटें मिलने और यूडीएफ को 38.6 प्रतिशत वोट के साथ 62 सीटों पर जीत मिलने का अनुमान है। भाजपा के वोट प्रतिशत में 1.5 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 16.4 प्रतिशत होने की उम्मीद है किन्तु उसके एक ही सीट पर जीत हासिल होने की संभावना जताई गयी है। लेकिन, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व को इस बार राज्य में अपने वोट प्रतिशत और सीटों की संख्या दोनों में अप्रत्याशित सुधार होने की उम्मीद है।

राष्ट्रपति शासन वाले केन्द्रशासित प्रदेश पुड्डुचेरी में राजग गठबंधन की सरकार बनना तय माना जा रहा है। चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों में भी यही संभावना जताई गयी है। विधानसभा चुनाव के लिए एनआर कांग्रेस-भाजपा-अन्नाद्रमुक नीत राजग गठबंधन ने मिलकर चुनाव लड़ा है। इस गठबंधन की जीत होने पर एनआर कांग्रेस के नेता एन. रंगास्वामी के नेतृत्व में राजग की सरकार बनेगी। पुड्डुचेरी के चुनाव पूर्व सर्वेक्षण के मुताबिक राजग गठबंधन को 21 सीटें और यूपीए गठबंधन को 9 सीटें मिलने की उम्मीद जताई गयी है। पिछले विधानसभा चुनाव में यूपीए गठबंधन के सहयोगी दलों द्रमुक और कांग्रेस ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था। इस बार दोनों ने मिलकर चुनाव लड़ा है। पिछले विधानसभा चुनाव में 15 सीटें जीतने वाली कांग्रेस ने दो विधायकों वाली द्रमुक के साथ मिलकर सरकार बनाई थी।

 

आपकी प्रतिक्रिया...