बच्चों के लिए कितनी खतरनाक है कोरोना की तीसरी लहर!

देश में कोरोना की पहली लहर में लोगों को यह पता चला था कि कोई नया वायरस पैदा हुआ है जिससे लोगों की जान जा सकती है लेकिन दूसरी लहर में हो रही मौतों ने इसे पूरी तरह से साफ कर दिया कि कोरोना कितना भयानक हो सकता है। देश में दूसरी कोरोना लहर के दौरान प्रतिदिन संक्रमित लोगों की संख्या 4 लाख को पार कर चुकी है और देश की चिकित्सा व्यवस्था भी पूरी तरह से हिल चुकी है। मरीजों की संख्या बहुत अधिक हो चुकी है जिससे हास्पिटल में बेड और दवाओं की कमी हो रही है। इस महामारी के समय ही कुछ लोग अपना उल्लू सीधा कर रहे है और जरूरत का गलत फायदा उठाते हुए दवाओं और चिकित्सा संबंधी सामानों को दो गुने दाम पर बेच रहे है। पता नहीं किसी का ज़मीर उसे यह सब करने की कैसे गवाही देता है कि वह मरने वालों से भी पैसे कमाने के लिए तैयार है शायद यही कलयुग है।

इधर कोरोना की दूसरी लहर से लोग परेशान है तो उधर केंद्र सरकार के शीर्ष वैज्ञानिक सलाहकार ने कहा है कि अभी कोरोना की तीसरी लहर आनी बाकी है। शीर्ष वैज्ञानिक सलाहकार विजय राघवन ने कहा कि कोरोना के हालात को देखते हुए उसकी तीसरी लहर का आना तय है लेकिन अभी इसके समय का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता है। विजय राघवन के इस ऐलान के बाद से आम जनता में एक बार फिर से डर बढ़ गया है क्योंकि दूसरी लहर इतनी घातक हो रही है तो फिर तीसरी लहर के बारे में सोचकर ही रुह कांप जा रही है।

डॉक्टरों के मुताबिक कोरोना की पहली लहर में वायरस करीब 10 दिनों में फेफड़ों को पूरी तरह से संक्रमित करता था जबकि दूसरी लहर में यह वायरस मजबूत हो गये और मात्र 5-7 दिन में ही फेफड़ों को पूरी तरह से नष्ट कर दे रहे है जबकि तीसरी लहर को लेकर ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि यह 2-3 दिन में ही फेफड़ों को पूरी तरह से खत्म कर देगा। कोरोना के शुरुआती दौर में वायरस काफी कमजोर थे लेकिन यह समय और जगह के अनुसार बदलते गये और मजबूत होते गये जिससे इनका संक्रमण लगातार बढ़ता गया। अगर तीसरी लहर में वायरस 3 दिनों में फेफड़ों को खत्म करेंगे तो डाक्टर्स के पास भी जाने का समय नहीं मिलेगा। ऐसे में परिवार या अस्पताल की तरफ से थोड़ी सी भी देरी मरीज की जान ले लेगी।

तीसरी लहर की भविष्यवाणी करने वालों ने इस बार बच्चों को अधिक संक्रमित होने का खतरा बताया है। डॉक्टरों के अनुसार जब 18 साल तक के लोगों को वैक्सीन का डोज मिल जायेगा तो यह वायरस बच्चों पर ज्यादा असर करेगा और 6-12 वर्ष के बच्चों को अधिक प्रभावित कर सकता है। इसलिए तीसरी लहर में 6-12 वर्ष के बच्चों को अधिक बचाने की जरूरत होगी। तीसरी लहर को लेकर की गयी भविष्यवाणी अगर सही साबित होती है तो देश के स्कूलों को लम्बे समय तक के लिए बंद किया जा सकता है। अभी तक बच्चों के लिए कोई वैक्सीन नहीं बनी है इसलिए बच्चों पर खतरा ज्यादा होगा। बच्चों के लिए वैक्सीन बनाने का काम सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और कोवैक्सीन बनाने वाली कंपनी भारत बायोटेक इस पर काम कर रही है और उम्मीद है कि अक्टूबर तक इसे तैयार कर लिया जायेगा।

देश को अगर कोरोना से बचाना है तो सभी को इसके प्रति जागरूक रहना होगा और सभी को जागरूक करना भी होगा। मास्क, सेनेटाइजर, सोशल डिस्टेंसिंग सभी का पालन करना होगा। देश का हर नागरिक जब तक कोरोना वैक्सीन नहीं लगवा लेता तब तक सभी को कोरोना नियमों का पालन करना होगा।

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