चीन की चालाकी: अरुणाचल के करीब तैयार किया हाईवे, 6 हजार मीटर गहरी घाटी पर बनाया पुल

भारत के दोनों पड़ोसी देश पाकिस्तान और चीन हमेशा शांति भंग करने की कोशिश में लगे रहते है। पाकिस्तान की तरफ से आतंकी गतिविधियों को अंजाम दिया जाता रहता है जबकि चीन सीमा के करीब कुछ ना कुछ विवादित कार्य कर शांति भंग करता है। भारत और चीन के बीच हुए खूनी संघर्ष के बाद चीन ने पीछे जाने का निर्णय तो किया था लेकिन अब फिर से वह विवादित कार्यों को अंजाम देना शुरू कर रहा है जिससे भारत और चीन के बीच फिर से विवाद हो सकता है।

भारत की मोदी सरकार चीन की किसी भी चाल को कामयाब होने नहीं दे रही है और तमाम दबाव के बाद भी भारत डट कर चीन का मुकाबला कर रहा है। भारत चीन के बीच हुए 1962 की लड़ाई के आधार पर ही चीन भारत को आंखें दिखाना चाहता है लेकिन अब केंद्र की सरकार बदल चुकी है इसलिए चीन का यह चाल नाकाम हो जा रही है जबकि इससे पहले की सरकारों ने कभी भी चीन को आंख दिखाने की हिम्मत नहीं दिखायी वरना चीन कभी भी भारत के लिए मुसीबत ही नहीं बनता।

चीन ने अरुणाचल प्रदेश के समीप तिब्बत में अपना राष्ट्रीय राजमार्ग का कार्य पूरा कर लिया। यह काम सन 2014 से चल रहा था। भारत की ब्रह्मपुत्र नदी को तिब्बत में यारलुंग जांगबो नाम से जानते है। यारलुंग जांगबो के जिस घाटी पर पुल बनाया गया है उसकी गहराई 6000 मीटर से अधिक है और इसे दुनिया की सबसे गहरी घाटी के रूप में जाना जाता है। इस हाईवे पर 2 किमी लंबी सुरंग भी बनायी गयी है जो युद्ध के समय भारत के लिए एक खतरा बन सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक नया राजमार्ग निंगची पैड टाउनशिप और बाइचुंग टाउनशिप के बीच बना हुआ है।

भारत की तरफ से भी सियांग जिले में 150 किमी लंबा हाईवे बनाया जा रहा है लेकिन वह शहरों और लोगों के विकास को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है। चीन ने जिस हाईवे का निर्माण किया है वह भारतीय सीमा के बिल्कुल करीब है जिससे यह कहना गलत नहीं होगा कि आने वाले समय में भारत के लिए फिर से मुसीबत खड़ी हो सकती है। चीन का शासक विस्तारवादी सोच का व्यक्ति है जो हमेशा से अपनी सीमा को बढ़ाने पर ध्यान देता है। चीन ने अरुणाचल प्रदेश को भी तिब्बत का हिस्सा बताया है जिसे भारत ने कड़े शब्दों में खारिज कर दिया लेकिन चीन की इस दावे ने एक बार फिर से उसकी विस्तारवादी सोच को जाहिर कर दिया।

चीन को लेकर हाल ही में भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा था कि भारत और चीन के रिश्ते चौराहे पर खड़े है। भारत की तमाम कोशिश के बाद भी चीन की तरफ से शांति की पहल नहीं हो रही है। चीन का उकसाने वाला रवैया भारत और चीन के रिश्ते को खराब कर रहा है। पूर्वी लद्दाख में चीनी सैनिकों की सक्रियता फिर से बढ़ी है जिसके बाद भारत ने उन्हे तुरंत पीछे हटने को कहा है। भारत और चीन के बीच 3488 किमी सीमा को लेकर विवाद है जिस पर हजारो बैठकें हो चुकी है लेकिन चीन किसी भी दावे को मानने को तैयार नहीं होता है।

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