स्वामी विवेकानंद की विचारधारा को प्रत्यक्ष आचरण में उतारने वाले- श्री कांति सेन श्रॉफ

   श्री कांति सेन श्रॉफ

 

“देश से अज्ञान तथा दरिद्रता का उन्मूलन यही ईश्वर सेवा” यह विवेकानंद की विचारधारा पूरी निष्ठा के साथ प्रत्यक्ष आचरण में उतारने वाले मुंबई के एक्सेल उद्योग समूह के सहसंस्थापक श्री कांति सेन भाई श्रॉफ उर्फ पूज्य काका जी का 13 मई 2021 को 99 वर्ष में निधन हो गया। आज उनकी मासिक पुण्यतिथि के निमित्त उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि!

औद्योगिक रसायन एवं कृषि संबंधित कीटनाशकों के उत्पादन क्षेत्र में वैश्विक धरातल पर प्रसिद्धि प्राप्त एक्सल उद्योग समूह की गत आठ दशकों की उज्जवल परंपरा है। श्री कांतिभाई यशस्वी शास्त्रज्ञ थे। वह हमेशा नए नए प्रयोग करते रहते थे। अत्यंत सरल व्यक्तित्व परंतु उस सरलता में भी शक्ति, आकर्षण तथा दृढ़ निश्चय था। उत्पादकता एवं मानवता का मेल एक्सेल उद्योग में है, यह एक्सेल परिवार की खासियत है। केवल एक्सेल उद्योग समूह में ही नहीं वरन पूरे भारतीय उद्योग जगत में काका जी दीपस्तंभ के समान थे, इतना उनका व्यक्तित्व वंदनीय था। स्वदेशी टेक्नोलॉजी का उपयोग कर उनके मार्गदर्शन में अनेक उत्पादन सफल रहे हैं। ‘जो विदेशियों को संभव हुआ वह हम क्यों नहीं कर सकते’ इस धुन में एक्सेल के संस्थापक श्री चांपराज भाई श्रॉफ एवं श्री कांति भाई ने ‘एल्यूमिनियम फास्फाइड’ का उत्पादन एक्सेल में प्रारंभ किया। विदेशी वैज्ञानिकों के लिए यह एक आह्वान ही था। प्रत्येक संशोधन तथा उत्पादन में कर्मचारियों-मजदूरों को सहभागी बनाना, उनके विचार जानना एवं उनसे सलाह लेना यह उनकी कार्यप्रणाली थी। अशिक्षित मजदूर, वनवासी- आदिवासी मजदूर भी रासायनिक उत्पादन कर सकता है, यह उन्होंने सिद्ध किया। उन्होंने इस प्रकार सीधे-साधे मजदूरों के गुणों की पहचान कर उन से चर्चा कर उत्पादन पद्धति में बदल करना, उस पर जानकारों से सलाह लेना, यह कांति भाई के स्वभाव में ही था। काका जी कर्मयोगी थे। सफल उद्योगपति थे। दूरदर्शी व्यक्तित्व के थे। मुंबई कला तथा कच्छ की अनेक शिक्षा संस्थाओं को उनका मार्गदर्शन प्राप्त था। पुणे की ज्ञानप्रबोधिनी संस्था के वे उपाध्यक्ष भी थे।

एक्सेल उद्योग समूह के अध्यक्ष तथा कार्यकारी संचालक के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद वे कच्छ के रेगिस्तानी भाग में निवास हेतु गए। वहां उन्होंने तन मन धन से सेवा कार्य किया। काका जी के विचारों पर रामकृष्ण परमहंस, स्वामी विवेकानंद एवं महात्मा गांधी का बहुत प्रभाव था। भारत कृषि प्रधान देश होने के कारण युवा यदि गांवों में जाकर खेती करें, उद्योग धंधे शुरू करें तो गांवों से शहरों की ओर होने वाला युवकों का पलायन रोका जा सकता है, इस विचार से उन्होंने स्थान स्थान पर ग्राम विकास केंद्र प्रारंभ किए। ग्राम एवं ग्रामवासियों का यदि विकास होता है तो भारत का विकास होकर देश सुजलाम सुफलाम हो सकता है ऐसा उनका विश्वास था।कच्छ कि अनेक तहसीलों में उन्होंने इसे सार्थक कर दिखाया है। सन 1978 में उन्होंने मांडवी में “विवेकानंद रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट” की स्थापना की। इस संस्था के माध्यम से पानी की व्यवस्था, पशुपालन, गोशाला, दूध तथा उस पर प्रक्रिया कर उत्पादन, बंजर जमीन पर संशोधन कर कम पानी में ज्यादा से ज्यादा उत्पादन, यह सारा उन्होंने कर दिखाया। ‘पानी रोको और उसे जमीन में जाने दो’ इस संकल्पना के साथ छोटे बांध बांधकर कर खेती करना, जैसे कार्य आज भी किए जा रहे हैं। महाराष्ट्र से भी अनेक किसान मांडवी जाकर खेती के संबंध में प्रशिक्षण लेकर आए हैं। उनकी पत्नी चंदाबेन (काकी) तथा काका जी ने भुज में ‘सृजन’ संस्था की नींव रखी। इसके माध्यम से महिलाओं में बड़े पैमाने पर रोजगार वृद्धि हुई। वहां की हस्तकला आज विश्व स्तर पर प्रसिद्ध है। आज अनेक ग्राम वासियों के घरों में काका जी की फोटो लगी है। ‘काका जी हमारे भगवान हैं’ जैसी कृतज्ञता की भावना उनसे संवाद में प्रकट होती है।

एग्रोसेल  इंडस्ट्रीज कंपनी धोरडो गांव में स्थित है। भारत-पाकिस्तान सीमा पर, रेगिस्तान में, जहां नट-बोल्ट मिलना भी दुष्कर था, ऐसे स्थान पर उद्योग की स्थापना कर उसे बढ़ाना यह काम कांतिभाई के मार्गदर्शन में ही संभव हुआ।

लातूर हो या कच्छ का भूकंप, अंडमान निकोबार की सुनामी हो या उड़ीसा- मोरबी-आंध्र प्रदेश की बाढ़, इन सभी प्राकृतिक आपदाओं में एक्सेल के कार्यकर्ता स्वेच्छा से कार्य करते हैं। इसके पीछे कांति भाई की प्रेरणा ही है। “कचरा” यह मुंबई एवं अन्य शहरों की  बड़ी समस्या! कचरे से खाद तैयार करना, उसके लिए नए-नए यंत्र उपलब्ध कराना इत्यादि काम काका जी की प्रेरणा से आज भी शुरू हैं। वर्तमान सार्वजनिक जीवन में ऐसे लोग बिरले ही मिलते हैं जिनके चरण स्पर्श करने की इच्छा हो। औद्योगिक क्षेत्र में  ऐसा आदर्श एक्सेल के कांति भाई थे। कांति भाई अपने विचारों के कारण अजरामर हैं। उनके विचारों को आगे बढ़ाना, यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि!

इश्वर निर्मित इस सृष्टि में काली मिट्टी, पेड़-पौधे, फूल-पत्तों से जिन्होंने हमेशा प्रेम किया ऐसे श्री कांति सेन श्रॉफ, आनंद पूर्वक अपना सुख और संतोष से भरा जीवन, जिस प्रकार झाड़ से पत्ता सहज रूप से टूट कर गिर जाता है वैसे ही, ईश्वर को समर्पित कर अनंत में विलीन हो गए। उनका स्मरण हम सभी को सदा प्रेरणा देता रहेगा।

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