क्यों शुरु हुआ था असहयोग अंदोलन?

प्रथम विश्व युद्ध (1915-1918) के बाद देशवासियों को ऐसा लग रहा था कि उन्हें अंग्रेजी सरकार की तरफ से कुछ अच्छी खबर मिल सकती है लेकिन ऐसा नहीं हुआ और सिडनी रॉलेट की अध्यक्षता वाली एक कमेटी देश में रॉलेट एक्ट लागू कर दिया। इस रॉलेट एक्ट के तहत किसी को भी सरकार बिना मुकदमा चलाए ही उसे जेल में डाल सकती है। इस दौरान देश की प्रेस पर भी अंग्रेजी सरकार ने रोक लगा दिया और तमाम अखबारो को छापने पर प्रतिबंध लगा दिया गया।
 
अंग्रेजी सरकार के इस रवैये से देश में आक्रोश बढ़ने लगा। महात्मा गांधी ने इसका खुला विरोध शुरु कर दिया इसके विरोध में पूरे देश में दुकानें बंद होने लगी। पंजाब इसका बहुत की कड़ा विरोध हुआ। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान पंजाब सैनिकों ने अंग्रेजों के पक्ष में युद्ध लड़ा था इसलिए उन्हे उम्मीद थी कि युद्ध के बाद अंग्रेजी सरकार की तरफ से कुछ इनाम मिलेगा लेकिन यहां सरकार ने रॉलेट एक्ट लाकर सभी को चौंका दिया। 
 
पूरे देश में रॉलेट एक्ट का विरोध होने लगा। अलग अलग राज्यों और शहरों में राष्ट्रवादी लोग इकट्ठा होकर इसका विरोध करने लगे। यह बात अंग्रेजो तक भी पहुंच गयी और उन्होंने ऐसे लोगों की गिरफ्तारी भी शुरू कर दी यहां तक की महात्मा गांधी भी इससे नहीं बच सके और उन्हे भी पंजाब जाते समय रास्ते में गिरफ्तार कर लिया गया। 13 अप्रैल 1919 को रॉलेट एक्ट के विरोध में जलियांवाला बाग में हजारों की संख्या में लोग इकट्ठा हुए थे।
यहां एक मेला चल रहा था इसलिए भीड़ भी ज्यादा हो गयी इस दौरान कुछ नेता रॉलेट एक्ट को लेकर भाषण भी देने लगे जिससे भीड़ उन्हे सुनने के लिए इकट्ठा हो गयी ठीक इसी समय जनरल डायर अपने 90 सैनिकों के साथ इस पार्क में पहुंचा और पूरी भीड़ को घेर लिया। भाषण दे रहे नेता ने सभी को अपने स्थान पर बैठने के लिए कहा क्योंकि उन्हें भी होने वाली अनहोनी का अंदेशा नहीं था। तभी बिना किसी चेतावनी के डायर ने फायर का आदेश दे दिया। मात्र 10 मिनट में 1650 राउंड गोलिया चली थी जिसमें 1200 लोग शहीद हुए थे और करीब 1600 लोग घायल हुए थे। 
 
 
जलियांवाला बाग हत्याकांड के बाद देश में आक्रोश और फैल गया जिसके बाद महात्मा गांधी ने 1 अगस्त 1920 को असहयोग आंदोलन की घोषणा कर दी। इसके बाद 4 सितंबर 1920 को इसे कांग्रेस अधिवेशन में पारित भी कर दिया गया।उधर असहयोग आंदोलन की वजह से देश की जनता भी जागरूक और निडर हो गयी। अंग्रेजी शासन की सजा के प्रति लोगों में डर ही खत्म हो गया और देखते ही देखते यह आंदोलन जन आंदोलन में बदल गया।
महात्मा गांधी के आह्वान के बाद विद्यार्थियों ने सरकारी स्कूलों में जाना बंद कर दिया, वकीलों ने अदालत जाने से मना कर दिया, श्रमिक वर्ग हड़ताल पर चले गये जिससे अंग्रेजी सरकार का करीब 70 लाख का नुकसान हुआ था। सितंबर 1920 से शुरू हुआ असहयोग आंदोलन चौरी चौरा अग्निकांड के बाद वापस ले लिया गया। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में भीड़ ने चौरी चौरा पुलिस स्टेशन को आग लगा दी जिसमें कई पुलिसवालों की मौत हो गयी। इस घटना से गांधी जी बहुत आहत हुए और उन्होंने यह आंदोलन वापस ले लिया।    

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