गुजरात सरकार करेगी 900 पांजरापोल का विकास

गोवंश का पालन-पोषण सहित रक्षा, सुरक्षा एवं संवर्धन हेतु गुजरात सरकार राज्य में स्थित लगभग 900 पांजरापोल का ढांचागत विकास करेगी। इसके लिए गुजरात सरकार ने अपने बजट में 100 करोड़ रूपये का प्रावधान रखा है। जिसके माध्यम से पांजरापोल के इन्फ्रास्ट्रक्चर का कार्य किया जाएगा। यह जानकारी देते हुए समस्त महाजन संस्था के अध्यक्ष गिरीश भाई शाह ने कहा कि इस संदर्भ में मुख्यमंत्री श्री विजय भाई रुपानी के निवास स्थल पर एक बैठक की गई थी, जिसमें विस्तार से चर्चा की गई। इस दौरान जीवदया प्रेमी मुख्यमंत्री विजय रुपानी ने समस्त महाजन संस्था के उल्लेखनीय कार्यों की प्रशंसा की और गिरीश भाई शाह की सराहना भी की। इसके साथ ही उपमुख्यमंत्री नितिन भाई पटेल ने भी गुजरात के सभी पांजरापोल के इन्फ्रास्ट्रक्चर निर्माण में मदद करने का आश्वासन दिया।

पांजरापोल के इन्फ्रास्ट्रक्चर पर खर्च होंगे 100 करोड़ रूपये

पांजरापोल का मतलब होता है एनिमल सेल्टर, जहां पर अपाहिज-अपंग, जो किसी काम में नहीं आ रहे है, जो दूध नहीं दे रहे हैं, ऐसे पशुओं को रखा जाता है। कत्लखानों से बचाए गए पशुओं को भी इसमें रखा जाता है। उन पशुओं की देखभाल के लिए शेड, गोडाउन, कम्पाउंड वॉल, पानी की व्यवस्था, स्टाफ क्वार्टर, गोचर भूमि, देशी वृक्षों का वृक्षारोपण, तालाब, चारा आदि अनेक प्रकार की व्यवस्थाएं करनी पड़ती हैं। पांजरापोल के इन्फ्रास्ट्रक्चर को पूर्ण रूप से विकसित करने हेतु 100 करोड़ रूपये खर्च किए जाएंगे। जिसमें गोवंश सहित अन्य पशुओं का पालन पोषण किया जाएगा और सभी पशु आनंदपूर्वक यहां पर रहेंगे।

पशुधन से आत्मनिर्भर होगा भारत

समाज के मन में हमेशा यह प्रश्न उठता है कि जो गाय दूध नहीं दे रही है, जो बैल किसी काम में नहीं आ रहा है तो उसे क्यों रखा जाए? बेकार पशुओं की हमें क्या जरूरत है? इसलिए उन पशुओं को कसाइयों के दलालों को बेच दिया जाता है। जिन्हें वह कत्लखानों में भेज देते हैं, जिससे बड़ी संख्या में पशुओं की असमय निर्मम तरीके से हत्या हो जाती है। इससे देश के कीमती पशुधन की हानि होती है। इस विषय पर गिरीश भाई शाह ने कहा कि समाज की यह धारणा बिलकुल गलत है कि जो पशु काम का नहीं है उसे बेच दिया जाए या उसे सड़कों पर छोड़ दिया जाए। हमारे भारतीय परम्परा में पशुओं को धन की संज्ञा दी गई है। जिसे देश में पशुधन के रूप में जाना जाता है। ‘गोमय वसते लक्ष्मी’ अर्थात गाय के गोबर में लक्ष्मी का वास होता है। केवल गाय ही दूध देती है लेकिन अन्य पशुओं का अलग-अलग काम है। जैसे कि हम छोटे-छोटे बछड़ों को बैल बनाए और उसे वाहन के रूप में उपयोग में लाए। जैसे पहले हम प्रयोग करते थे बैलगाड़ी। उससे ट्रांसपोर्ट की समस्या भी कम हो जाएगी। हमारे डीजल-पेट्रोल की भी बचत होगी। हमारा खर्च भी बहुत कम हो जाएगा। गांवों से शहरों में सामान (माल) लाने का कार्य बैलगाड़ी से संभव है। इससे लोकल ट्रांसपोर्ट को बल मिलेगा और गांवों में बड़े-बड़े ट्रक एवं ट्रैक्टर की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। जैसे खेत में जुताई करनी है वह बैलों से कराई जाए। इससे खेतों में ट्रैक्टरों पर से निर्भरता खत्म हो जाएगी। ऐसा होने पर हमें मल्टीनेशनल कम्पनियों के आधार पर नहीं चलना पड़ेगा। वोकल फॉर लोकल यही होता है कि अपनी स्वदेशी व्यवस्थाओं का उपयोग करें। जिससे हमें विदेशों के संशाधनों पर निर्भर रहना नहीं पड़ेगा और हम आत्मनिर्भर बनने की ओर आगे बढ़ेंगे।

गोबर से करे ऑर्गेनिक खेती, 70 हजार करोड़ के सब्सिडी की नहीं पड़ेगी जरूरत

गिरीश भाई शाह ने आगे कहा कि कोई भी पशु हो जो हमें दूध देने के भी काम न आए, बैलगाड़ी के भी काम न आए, फिर भी वह गोबर तो देता ही है। जैसा कि पहले ही कहा है कि गोबर में लक्ष्मी का वास है। तो यह कैसे है? यदि सरकार गोबर से ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा दे तो हमें केमिकल फर्टिलाइजर की जरूरत नहीं पड़ेगी। हम खेती में आत्मनिर्भर बन जाएंगे और केमिकल खादों से भी हमें सदा के लिए मुक्ति मिल जाएगी। इससे हमारा स्वास्थ्य भी उत्तम होगा, हम निरोग रहेंगे और हमें डॉक्टर और हॉस्पिटल के चक्कर लगाना नहीं पड़ेगा। सरकार द्वारा दी जाने वाली 70 हजार करोड़ की सब्सिडी की भी जरूरत खत्म हो जाएगी। इससे यह भी सिद्ध होता है कि गोबर में लक्ष्मी का वास होता है यह जो कहावतें हमारे बुजुर्ग कह गए हैं वह पूरी तरह से सत्य है।

इसलिए मैं चाहता हूं कि हर गांव के पास एक अच्छा पांजरापोल हो, जहां पर गांव के सारे ही सामाजिक भाषा में बिन उपयोगी और हमारे भाषा में सबसे अधिक उपयोगी पशुओं का रखरखाव किया जाए। पांजरापोल से प्राप्त गोबर का खेतों में खाद के रूप में उपयोग किया जाए, जिससे पूरा गांव ऑर्गेनिक खेती की ओर आगे बढ़े। इसके अलावा गोबर के कंडे भी बनाए जाए जो रसोई बनाने के लिए भी काम आए। इस तरह से हम पूरी व्यवस्था कर सकते हैं। प्रत्येक किसान अपने खेतों में से कुछ चारा पांजरापोल को दे दें तो चारे की समस्या भी हल हो जाएगी। यदि इसके बाद भी चारा कम पड़ गया तो गांव की जो गौचरण भूमि होती है जिसे महाराष्ट्र में गायरान कहते हैं, उसमें से प्राप्त चारा से पशुपालन करना आसान हो जाएगा। गांव के सारे पशु सहजता से और आनंदपूर्वक पल जाएंगे।

गुजरात सरकार की तर्ज पर सभी राज्यों के मुख्यमंत्री करें बजट का प्रावधान

गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपानी और उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल का अभिनंदन करते हुए समस्त महाजन संस्था के अध्यक्ष गिरीश भाई शाह ने भारत के सभी राज्य सरकारों के मुख्यमंत्रियों से निवेदन किया है कि जैसे गुजरात सरकार ने अपने राज्य के सभी पांजरापोल के इन्फ्रास्ट्रक्चर को पूर्ण विकसित करने हेतु बजट में 100 करोड़ रूपये का प्रावधान किया है, उसी तर्ज पर अपने-अपने राज्यों में आप भी ऐसी व्यवस्था करें।

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