‘सेव वाटर’ भी राष्ट्रीय अभियान बने – संदीप आसोलकर चेयरमैन, एसएफसी एन्वायरमेन्टल टेक्नोलॉजीस प्रा. लि.

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नए भारत में ‘सेव टाइगर’ की तरह ‘सेव वाटर’ अभियान भी चलाना चाहिए। प्राकृतिक स्रोतों की रक्षा के साथ सीवेज वाटर पर पुनर्प्रक्रिया में तेजी आनी चाहिए। मोदी सरकार ने इस दिशा में जलशक्ति मंत्रालय बनाकर पहल की है। प्रस्तुत है एसएफसी एन्वायरमेन्टल टेक्नोलॉजीस प्रा. लि. के डायरेक्टर संदीप आसोलकर के साथ नया भारत और जल संरक्षण पर हुई विशेष बातचीत के महत्वपूर्ण अंशः-

पहले सेहत, फिर काम

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घर और दफ्तर की जिम्मेदारियां संभालती कामकाजी महिलाएं, कई बार खुद के प्रति जिम्मेदारी को गंभीरता से नहीं लेतीं। चूंकि आप पर दोहरी जिम्मेदारी होती है, इसलिए आपको अपनी सेहत के प्रति अधिक गंभीर और सचेत होना चाहिए।

जैसा मौसम वैसा फैशन

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हर मौसम का अपना एक मिजाज होता है और हमारी कोशिश यह होनी चाहिए कि हम भी मौसम के हिसाब से अपना लिबास तय करें। अतः गर्मी में आप क्या पहनना पसंद करेंगे?

ऊटपटांग कपडे पहनना फैशन नहीं

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राजनीतिक नेताओं और फिल्मी सितारों के लिए परिधान डिजाइन करने वालेे फिल्म उद्योग के मशहूर डिजाइनर पिता-पुत्र माधव एवं राहुल अगस्ती ने एक विशेष साक्षात्कार में भारतीय फैशन की दुनिया की एक से एक खासियतें उजागर की हैं। दोनों ने माना है कि फैशन ऊटपटांग नहीं होनी चाहिए, स्थान, माहौल, क्षेत्र और समय के अनुरूप होनी चाहिए।

बेमिसाल भारतीय गहनें

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भारतीय गहनों ने विकास का एक बहुत लंबा सफर तय किया है। लोगों की आवश्यकता के अनुसार नए-नए डिजाइन बाजार में आ रहे हैं, फिर भी पारंपरिक डिजाइन के गहनें आज भी अपने मनमोहक प्रभाव के कारण सबके आकर्षण का केन्द्र हैं।

दिव्यांगों के प्रति सकारात्मक रुझान

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दिव्यांगों के क्षेत्र में तेजी से सकारात्मक परिवर्तन हो रहा है। मूल बात यह है कि उन्हें दया नहीं, स्वावलम्बी बनने के लिए मदद चाहिए। प्रस्तुत है दिव्यांगों के क्षेत्र में आए बदलावों, संस्थाओं, समस्याओं पर पश्चिम महाराष्ट्र, सक्षम के अध्यक्ष एड. मुरलीधर कचरेजी से  हुई बातचीत के महत्वपूर्ण अंशः-

मोदीजी ने दिव्यांग शब्द दिया है

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मोदी सरकार के आने के बाद दिव्यांगों के लिए कानून पारित हुआ। उनका आरक्षण बढ़कर 4% हुआ। भले ही यह राज्य का विषय हो परंतु हर राज्य में दिव्यांगों की योजनाओं और उन पर अमल के लिए पुनरावलोकन किया गया। इतने बड़े पैमाने पर पहली बार ऐसा काम हुआ है। असल में ‘दिव्यांग’ शब्द भी मोदी की ही देन है। दिव्यांगों, उनकी समस्याओं, इस क्षेत्र में कार्य करनेवाली संस्थाओं आदि पर मुख्य आयुक्त दिव्यांगजन श्री कमलेश कुमारपाण्डेय से हुई बातचीत के महत्वपूर्ण अंश प्रस्तुत है-

सभी मावल्यांग से सबक लें

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: भारत-बांग्लादेश की सीमा के करीब बसा मेघालय का मावल्यांग गांव भारत ही नहीं, एशिया का सब से स्वच्छ गांव माना जाता है। देश के अन्य गांव भी इससे सबक लें तो गांवों में गंदगी का वर्तमान साम्राज्य ही खत्म होगा और तब भारत स्वच्छ होने में देर नहीं लगेगी।

दिल को छूती गांव की कहानियां

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सोनाली जाधव हिंदी-मराठी साहित्यिक एवं वरिष्ठ पत्रकार श्री गंगाधर ढोबले का ‘हरवलेलं गाव’ (गुम हो चुका गांव याने अंग्रेजी में The lost Village) मराठी कहानी संग्रह है. असल में ग्राम्य जीवन की दिल को छू लेनेवाली ये सत्यकथाएं हैं. भले काफी पहले ये कहानियां लिखी गई हों लेकिन वे आज भी उतनी ही तरोताजा है, आज भी अत्यंत जीवंत लगती हैं. सच है कि कहानी हमेशा ताजा होती है, कभी बासी नहीं होती. हालांकि लेखक का बचपन का वह गांव अब नहीं रहा; बहुत बदल चुका है. इस तरह वह गांव गुम हो चुका है; परंतु परिवर्तित गांव में भी वही पात

बेस्ट फ्रेंड्स

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सचमुच हमारी ज़िन्दगी में एक सच्चा दोस्त होना बहुत आवश्यक है । दोस्ती ऐसी हो कि हमें पता है कि चाहे कोई भी परिस्थिति आ जाये, ये इंसान हमारा साथ नहीं छोड़ेगा। दोस्त तो कई होते हैं, लेकिन सच्चे अर्थों में बेस्ट फ्रेंड का कर्तव्य निभाने वाले बहुत कम होते हैं।  क्या सभी दोस्त बेस्ट फ्रेंड्स हो सकते हैं? दोस्ती के बारे में जितना कहा जाए कम है । आजकल तो व्हाट्सएप, फेसबुक, ट्विटर पर दोस्ती के संदेशों की भरमार होती है । लेकिन आख़िरकार दोस्ती होती क्या है ? हमारे दिल में कई बातें होती हैं, कई जज़्बात होते हैं, जो हम

उपराष्ट्रपति पद के प्रबल दावेदार

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साल १९६६ के दूसरे पखवाड़े की बात है। दो साल पहले हुई नेहरू की मौत के बाद देश को बड़ी ही कुशलता से प्रगति के पथ पर ले जा रहे दूसरे प्रधान मंत्री लालबहादुर शास्त्री की तत्कालीन सोवियत संघ (रूस) के ताशकंद में मौत हो चुकी थी। १९६२ के घावों पर मरहम लगाने वाला सप

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