राष्ट्र विरोधी नारेबाजी में 4 पर रासुका, मंत्री ने दी तालिबान जाने की सलाह

एक समय था जब जम्मू कश्मीर में पाकिस्तान के समर्थन में नारे लगते थे लेकिन यह नारा अब धीरे धीरे देश के कई राज्यों तक पहुंच चुका है। ताजा मामला मध्य प्रदेश से सामने आया है जहां पाकिस्तान के समर्थन में नारे लगाते कुछ लोग नजर आए। हालांकि पुलिस ने इस मामले में कुल 7 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है और उन लोगों से पूछताछ की जा रही है। राज्य के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी इसकी आलोचना की और कहा कि इस तरह का व्यवहार कतई बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। 
 
मध्य प्रदेश के उज्जैन में मुहर्रम के मौके पर मुस्लिम समुदाय द्वारा निकाले गए एक जुलूस में पाकिस्तान व तालिबान जिंदाबाद के नारे लगाए गये। पुलिस की तरफ से जुलूस निकालने पर रोक थी लेकिन फिर भी कुछ लोगों ने मुहर्रम पर एक जुलूस निकाला और राष्ट्र विरोधी नारेबाजी की, उज्जैन के पुलिस अधीक्षक ने बताया कि इस मामले में कुल 10 लोगों से पूछताछ जारी है जबकि 4 लोगों पर रासुका लगा दी गयी है। राष्ट्र विरोधी नारेबाजी करने वाले अजहर उर्फ अज्जू, शादाब उर्फ बच्चा और समीर उर्फ बल्दी पर रासुका लगाई गयी है जबकि सोशल मीडिया पर इसे वायरल करने के लिए लाला उर्फ सोयम को भी इसके अतर्गत लिया गया है।  
 
मध्य प्रदेश के मंत्री मोहन यादव ने इस घटना की कड़ी निंदा की और कहा कि, “अगर देश में रहना है तो संविधान के अनुसार ही काम करना होगा। अगर भारत की धरती पर पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए गये तो उसकी भारी कीमत चुकानी होगी। हिंदुस्तान में रहना है तो उसके कायदे कानून के अनुसार ही रहना होगा और अगर इतना ही प्यार है तो तालिबान और पाकिस्तान में कुछ दिन रह कर दिखाओ। भारत विश्व का एकमात्र ऐसा देश है जो अपने दुश्मनों को भी सहारा देता है”  
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मध्य प्रदेश में घटित यह घटना सामान्य नहीं है किसी भी देश में रहकर उसकी आलोचना करना बहुत की गंभीर अपराध है और देश के लिए चिंता का विषय है क्योंकि ऐसे ही विरोधियों की वजह से देश में खतरा बढ़ सकता है। जिस देश का अनाज खाते है उसी के खिलाफ जहर कैसे उगल सकते है अगर किसी विशेष समुदाय को सरकार या फिर प्रशासन से परेशानी है तो वह उनके खिलाफ आवाज उठा सकते है लेकिन देश के खिलाफ नारेबाजी करना अपनी मातृभूमि से बगावत करना है। 

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  1. Shravan Kumar Shrivastava

    जब तक हम हिंदू , यथार्थ में हिंदुत्व का आचरण करते हुये , आचार्य चाणक्य की नीति नहीं अपनायेंगे , ऐसा होता रहेगा। पाँच हजार वर्ष पहले तो एक मामाश्री , एक तातश्री एवं आँखों से अंधे धृतराष्ट्र के साथ , इसी अफगानिस्तान की एक गांधारी ने , आँखों पर पट्टी बाँध कर , राष्ट्र को रसातल में पँहुचाया था। आज तो मामाश्री , ताऊ , बाबूजी , भैया जी के साथ दूसरी गांधारी अपने अपने बेटा सिक्योरिटी में व्यस्त हैं , और हम उनके द्वारा जूते में परोसे जूठे और झूठे व्यंजनों की लालसा में , हाथ फैलाये जीभ लपलपा रहे हैं। बिना हमारे स्वाभिमान को जगाये , किसी अन्य के बारे में कुछ भी कहना कहीं से भी उचित नहीं है। आज की स्थिति के लिये केवल और केवल हम ही उत्तरदायी है।

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