कुशल प्रबंधन की मिसाल बना मध्य प्रदेश

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जनता और जन प्रतिनिधियों के बीच सामंजस्य और समन्वय का ऐसा तालमेल स्थापित किया कि प्रदेश के हर व्यक्ति के सहयोग और सुरक्षा के लिए जनभागीदारी का मॉडल बनाया, जिसमें उन्होंने दलगत राजनीतिक प्रतिद्वंदता से ऊपर उठकर समाज कल्याण हेतु समाज प्रमुखों, राजनीतिक दलों और धर्म गुरुओं सहित समाजिक संस्थाओं को एक मंच पर लाकर खड़ा किया और संकट के समय प्रदेश की जनता की सुरक्षा को प्रमुख धर्म बताया।

हमारे देश भारत की संस्कृति और संस्कारों में सामूहिकता का वास है और जहां सामूहिकता होती है, वहां विपरीत परिस्थितियों में भी अनुकूल वातावरण का निर्माण हो जाता है और कठिन से कठिन संघर्ष व चुनौतियों से बाहर निकलने का मार्ग प्रशस्त दिखाई देता है। ये कहने में कोई अतिशयोक्ति नहीं होनी चाहिए कि भारतीयों ने कोविड काल के दौरान वीभत्स संकट में दुनिया को राह दिखाने का काम किया है। भारतीयता का दर्शन हमारे छोटे-छोटे गांवों कस्बों में देखने को मिल जाता है। पिछले डेढ़ वर्ष की समयावधि ने इस बात पर दुनिया को सोचने पर मजबूर कर दिया कि भारत की जीवन पद्धति अनमोल है, तो वहीं कोविड जैसे अदृश्य शत्रुओं से लड़ने का एक मात्र रास्ता भी।

कोविड की पहली लहर जब आई तो अप्रत्याशित शत्रु की तरह मानव जाति को अपने आगोश में लेता गया। समाज और न ही सरकार इससे बचने का उपाय खोज सकी क्योंकि सिवाय लॉकडाउन के न तो महामारी का आकलन था और न ही कोई उपचार था। समस्त मानव जाति संकट से जूझ रही थी और ऑक्सीजन के रूप में एक-एक सांस की कीमत आंकी जा रही थी। लोग अपनी और अपनों की  सुरक्षा के लिए घरों में कैद होने को ही सुरक्षित मान रहे थे। वहीं दूसरी लहर के भयानक दौर को भी विस्मृत कर पाना असंभव होगा। जनता भय व्याप्त थी और आर्थिक स्थितियां धराशायी हो रही थीं क्योंकि काम धंधे ठप्प हो गए थे।

मध्य प्रदेश ने स्थापित किए नए आयाम

ऐसी विपरीत परिस्थितियों के बावजूद मध्य प्रदेश ने अपने नए आयाम स्थापित किए और देश में कोरोना नियंत्रण के मामले में आदर्श मॉडल प्रस्तुत किया। एक ऐसा मॉडल जो भारत की भारतीयता, सामूहिक प्रयासों और जीवन पद्धति को दर्शाता है। गांव, गरीब और हर वर्ग की सुरक्षा और सम्मान को दर्शाता है। सक्षम नेतृत्व और कुशल प्रबंधन को दर्शाता है, जिसमें गांव के पंच, सरपंच से लेकर विधायक, सांसद, मंत्री हर जनप्रतिनिधि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाता है। जनभागीदारी का एक ऐसा मॉडल जिसकी सराहना देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी कर चुके हैं, तो वहीं अन्य राज्यों को भी कोरोना के खिलाफ लड़ने में मध्य प्रदेश मॉडल को सार्थक बताया।

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जनता और जन प्रतिनिधियों के बीच सामंजस्य और समन्वय का ऐसा तालमेल स्थापित किया कि प्रदेश के हर व्यक्ति के सहयोग और सुरक्षा के लिए जनभागीदारी का मॉडल बनाया, जिसमें उन्होंने दलगत राजनीतिक प्रतिद्वंदता से ऊपर उठकर समाज कल्याण हेतु समाज प्रमुखों, राजनीतिक दलों और धर्म गुरुओं सहित समाजिक संस्थाओं को एक मंच पर लाकर खड़ा किया और संकट के समय प्रदेश की जनता की सुरक्षा को प्रमुख धर्म बताया। यहां तक कि उपवास सत्याग्रह कर लोगों में जागरुकता फैलाई। परिणामस्वरूप कोविड संक्रमण के मामले में जो प्रदेश देश मे 7 वें स्थान पर था, वो सबसे निचले पायदान पर जा पंहुचा।

विपदा के सामने छोटी पड़ जाती है व्यवस्था

प्रदेश सरकार ने जनता को शासकीय व्यवस्थाएं देने में हर संभव मदद की लेकिन जब विपदा बड़ी हो तो व्यवस्थाएं भी छोटी पड़ जाती हैं। ऐसे में समाज का मनोबल बढ़ाने और हर नागरिक की सुरक्षा करना राजा का धर्म होता है। इसी बात को चरितार्थ करते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सबको एक सूत्र में बंधने के साथ ही मानवीय संवेदनाओं का परिचय दिया और जनहित से जुड़े हर मुद्दे पर राहत देने का काम किया। जनभागीदारी मॉडल को अपनाते हुए कोरोना वालंटियर्स बनाए गए, जिसमें 1 लाख 50 हजार से अधिक लोगों ने सहभागिता की। कोरोना को समाप्त करने किल कोरोना अभियान चलाया, जिसमें 15 हजार 308 सर्वे टीमें गठित की गईं और 5 सूत्रीय रणनीति पर काम किया। जैसे- आइडेंटिफाई, टेस्ट, ट्रीट, आइसोलेशन एवं वैक्सीनेशन की तर्ज पर घर-घर सर्वे और संवाद हुआ।

योजनाएं जो बनीं वरदान

जिंदगी अनलॉक और कोरोना लॉक करने का मंत्र देते हुए जन सहयोग की नीति को प्राथमिकता में लिया। प्रशासन और जनप्रतिनिधियों का जनता के साथ संवाद स्थापित किया गया। ऑक्सीजन, दवाई, इंजेक्शन, गरीबों को राशन व आवश्यक जरूरतों की आपूर्ति सुनिश्चित की गई। आदिवासी, पिछड़े, श्रमिकों, महिलाओं का आर्थिक सहयोग किया गया। सतत संवाद और सामंजस्य को हथियार बनाया तो वहीं कोरोना के शिकार लोगों को व उनके परिवार जनों को राहत देने अनेकों योजनाएं बनाईं जो वरदान साबित हुईं। प्रदेश सरकार एक ओर जहां इलाज और दवाई की व्यवस्था में जुटी थी, तो वहीं सामूहिक प्रयासों ने समाज को एक सूत्र में पिरोने का काम किया। संकट के समय आपसी सहयोग और समन्वय ने प्रत्येक नागरिक के दिलों में बसी भारत की विशालता को दर्शाया है।

प्रदेश सरकार ने गरीबों को निःशुल्क उपचार के लिए मुख्यमंत्री कोविड उपचार योजना, तो वहीं कोरोना के कारण अपने माता-पिता को खो चुके बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए मुख्यमंत्री कोविड बाल कल्याण योजना बनाई जिसमें अनाथ बच्चों को भोजन, राशन और शिक्षा के लिए आर्थिक सहयोग प्रदेश सरकार कर रही है। इस संवेदनशील निर्णय को अन्य राज्यों ने भी अपनाया है। वहीं कोरोना सेवाकाल में मृत्यु होने पर परिवार जनों को 5 लाख तक कि आर्थिक सहायता हेतु मुख्यमंत्री कोविड विशेष अनुग्रह योजना शुरू की और कोरोना में मृत व्यक्ति के परिवार जनों को सम्बल देने हेतु मुख्यमंत्री कोविड अनुकंपा नियुक्ति योजना भी सहारा बनीं।

गांवों तक पहुंचा मॉडल

मध्य प्रदेश मॉडल सिर्फ शहरों तक सीमित नहीं रहा बल्कि प्रदेश के दूरदराज के गांव-गांव में इसे पहुंचाया गया और किल कोरोना अभियान के माध्यम से घर-घर में दस्तक दी। संक्रमित लोगों को इलाज के साथ जागरूक किया गया। इतना ही नहीं जब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जनता से कोरोना नियंत्रण के लिए जनता कर्फ्यू का आह्वान किया तो प्रदेश की 22 हजार 881 ग्राम पंचायतों में से 80 प्रतिशत पंचायतों ने स्वप्रेरणा से जनता कर्फ्यू लगाया। ग्रामीण लोगों ने गांवों से न किसी को बाहर जाने दिया और न अंदर आने दिया। कठिनाइयों का सामना किया लेकिन कोरोना नियंत्रण और समाज की सुरक्षा के लिए सबका साथ और सहयोग मिला।

 

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