झारखंड विधानसभा का विवादित कमरा!

भारत एक लोकतांत्रिक व सर्वधर्म समभाव वाला देश है यहां धर्मों को माना जाता है और सभी लोग एक दूसरे के साथ सैकड़ों सालों से साथ चले आ रहे है लेकिन पिछले कुछ समय से राजनीतिक बयानों और फैसलों की वजह से धर्मों के बीच में दरार पैदा हो रही है और इसका फायदा सिर्फ नेताओं को मिल रहा है जबकि आम जनता अपनी आजीविका के लिए खुद हर दिन लड़ रहा है। राजनीतिक दल जनता के फायदे की बात कर उन्हें गुमराह करते है और फिर वोट बैंक के साथ जीत कर खुद का विकास करते है। 

झारखंड सरकार की तरफ से एक ऐसा ही विवादित फैसला लिया गया है जिसकी वजह से राजनीतिक भूचाल आया हुआ है और तमाम राजनीतिक दल इस इसका विरोध कर रहे हैं। दरअसल झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की तरफ से विधानसभा में एक विशेष कक्ष आवंटित किया गया है जिसमें नमाज पढ़ा जायेगा। सरकार का यह फैसला इसलिए विवादों में आ गया क्योंकि इस तरह से किसी एक समुदाय के लिए फैसला लिया गया है अगर यह बाकी सभी लोगों को ध्यान में रखकर किया गया होता तो शायद सही होता। धर्म कोई भी छोटा या बड़ा नहीं होता सभी धर्मों की अपनी अपनी मान्यता और रीति रिवाज होते है। 
झारखंड के विधान भवन के कमरा संख्या TW-348 को नमाज के लिए अलॉट किया गया है जहां मुस्लिम विधायक और कर्मचारी नमाज पढ़ सकेंगे। विधानसभा अध्यक्ष के इस ऐलान के बाद विरोधी दलों ने इसका विरोध किया खासकर बीजेपी ने इसे वोट बैंक की राजनीति बताया है। बीजेपी की तरफ से इसका विरोध करते हुए कहा गया कि इस तरह के प्रचलन से ना सिर्फ बाकी धर्मों के लोगों को नीचा दिखाने का प्रयास किया जा रहा है बल्कि इसके दूरगामी परिणाम नुकसानदायक भी होंगे। 
समाज तमाम लोगों के मिलने से बनता है और वहां जाति-धर्म को दरकिनार किया जाता है। विधानसभा का भी कुछ ऐसा ही हाल है वहां राज्य के अलग अलग शहरों से प्रतिनिधि चुनकर आते हैं ऐसे में जनप्रतिनिधि को जाति या धर्म के आधार पर बांटना गलत होगा। झारखंड सरकार को इस पर विचार करना चाहिए और इस तरह के फैसले से बचना चाहिए जिससे किसी भी धर्म के बीच दरार पैदा हो सकती हो। 

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