उत्तराखंड पर मिला-जुला परिणाम

विश्व महामारी की चपेट में आते ही विश्व के ज्यादात्तर सम्भ्रान्त देशों ने कोविड-19 अर्थात कोरोना महामारी की जो दहशत देखी है, वह भले ही दूसरी लहर के अंतिम चरण में पहुंचने के बाद थोड़ी आरामदायक लगे लेकिन तीसरी लहर की सुगबुगाहट फिर देश के आंगन में सुनाई देने लगी है। क्या फिर से कोई शोर सुनाई देने वाला है? यह बड़ा प्रश्न है।

कोरोना से रिकवरी रेट ज्यादा

जहां विश्व भर में 32.2 प्रतिशत लोगों को कोरोना की प्रथम डोज लग चुकी है व 24.2 प्रतिशत लोग पूरी तरह से कोरोना की वैक्सीन लगवा चुके हैं। इस मामले में भारत विश्व के टॉप मोस्ट विकसित देशों में सबसे ऊपर की तालिका में नजर आता है क्योंकि देश 55 से 60 प्रतिशत जनसंख्या को वैक्सीन की प्रथम खुराक दे चुका है। लगभग 41 करोड़ 52 लाख लोगों को वैक्सीन लग चुकी है, जिससे देश की रिकवरी रेट 97.32 प्रतिशत है।

21 वर्षीय पहाड़ी राज्य उत्तराखण्ड ने इसमें काफी तेजी दिखाई, जिसके चलते उसके दो जनपद 100 प्रतिशत कोरोना वैक्सीन का प्रथम टीका लगवा चुके हैं। जनपद बागेश्वर एवं विकास खण्ड खिर्सू को 18  वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों हेतु दिया गया लक्ष्य (2011 सेन्सस के सापेक्ष 2021 की सम्भावित जनसंख्या) क्रमशः 172210 एवं 29374 है। जिसके सापेक्ष दिनांक 12 अगस्त, 2021 तक जनपद बागेश्वर एवं विकास खण्ड र्खिसू द्वारा क्रमशः 176776 एवं 37789 लाभार्थियों का प्रथम डोज़ टीकाकरण किया जा चुका है।

उत्तराखंड को मिला विशेष सहयोग

मुख्यमंत्री ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में देश में दुनिया का सबसे बड़ा कोविड टीकाकरण अभियान चल रहा है। प्रधानमंत्री का उत्तराखण्ड को विशेष सहयोग मिला है। इस महीने अभी तक 17 लाख डोज मिल चुके हैं। वही दिसम्बर अंत तक उत्तराखंड मे शतप्रतिशत वैक्सीनैशन कर दी जाएगी। भारत सरकार के मार्ग दर्शन में 16 जनवरी 2021 से सफलता पूर्वक कोविड-19 टीकाकरण अभियान आयोजित कर रहा है। टीकाकरण अभियान को बढ़ावा देने के लिए लगातार राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर पर आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। दिनांक 17 अगस्त 2021 के कोविड-19 टीकाकरण कवरेज के अनुसार 45 वर्ष और उससे अधिक के लाभार्थियों के टीकाकरण की प्रथम खुराक 2326374 (83 प्रतिशत ) एवं द्वितीय खुराक 1336923 (48 प्रतिशत) तथा 18 से 44 वर्ष के नागरिकों के टीकाकरण की प्रथम खुराक 3027666 (61 प्रतिशत) एवं द्वितीय खुराक 211958 (48 प्रतिशत) है। राज्य में आज की तिथि तक कोविड-19 टीकाकरण अभियान के अन्तर्गत कुल 7435124 खुराक दी जा चुकी हैं, जिसमें प्रथम खुराक 5661943 (73 प्रतिशत) एवं द्वितीय खुराक 1773181 (23 प्रतिशत) है।

वर्तमान के कोरोना आंकड़ों के अनुसार उत्तराखंड में कुल 342716 कोरोना केस दर्ज हुए हैं, जिनमें 328958 पूर्ण  रूप से स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं व 7376 मौतें हुई हैं। बाकी केस प्रदेश से बाहर शिफ्ट हुए हैं। इस हिसाब से प्रदेश में कोरोना मरीजों का ठीक होने का आंकड़ा लगभग  95.99 प्रतिशत है।

प्रथम लहर में सरकार की तैयारियां

फरवरी साल 2020 में देश भर में कोरोना के 500 से अधिक मामले आ गए थे, जिसे देखते हुए 23 मार्च 2020 को सम्पूर्ण लॉक डाउन शुरू गया था। तब प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने केंद्र के निर्देशों पर कोरोना संक्रमण रोकने के नाकाफी प्रयास किए, जिससे जनता की उन्हें काफी नाराजगी झेलनी पड़ी। करोड़ों खर्च हुआ और जगह जगह सेंटर बनाए गए। ऑक्सीजन की किल्लत दूर करने में प्रयास किए गए, लेकिन स्वास्थ्यकर्मियों की कमी व दवाइयों की जानकारी न होने के कारण मौतें होती रही लेकिन जल्दी ही उस पर काफी हद तक काबू करने में त्रिवेंद्र सरकार काफी हद तक कामयाब भी रही।

दूसरी लहर और तीरथ सिंह सरकार

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के त्यागपत्र के बाद अभी जुम्मा जुम्मा चंद ही दिन मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत की ताजपोशी के हुए थे कि कोरोना का भयंकर भभका प्रदेश में आ घुसा। एक तरफ जंगलों में आग, दूसरी तरफ कुम्भ की तैयारी व तीसरी तरफ कोरोना की दूसरी विस्फोटक लहर ने तीरथ सरकार को सम्भलने तक नहीं दिया। सच कहें तो पहली लहर के शांत होने के बाद प्रदेश के लोग व सरकार कोरोना संक्रमण को भूल ही गई थी। किसी ने कभी नहीं सोचा था कि इतनी जल्दी फिर मौत दरवाजे पर आ खड़ी होगी।

इसी दौरान कुम्भ के मध्य नजर तत्कालीन मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने लॉक डाउन में छूट दे दी, जिसका असर यह हुआ कि कोरोना की रफ्तार तेज हो गई और अस्पतालों में भीड़ बढ़ने लगी। शासन प्रशासन व स्वास्थ्य महकमे के हाथ पांव फूल गए। धड़ाधड़ मौतों ने आम जनता को बेहद असहज कर दिया। स्थिति सम्भाले नहीं सम्भल रही थी। दहशत इतनी थी कि लोगों ने अपने परिजनों के पार्थिव शरीर को लेने तक के लिए के लिए इनकार कर दिया। मजबूरन एसडीआरएफ के जवानों ने स्वयं चिताएं सजाई।

ऑक्सीजन सिलेंडर व अस्पताल

जो लोग प्रभावित हुए अब उन्हें अस्पताल यमलोग जाने से पहले का टोल टैक्स लगने लगे थे। निजी अस्पतालों ने दोनों हाथों से लूट मचा दी। लोग मरता क्या न करता कि स्थिति में थे लेकिन फिर सबने यह दृष्टिकोण अपनाना शुरू कर दिया कि जो अस्पताल जा रहा है, उसके जिंदा बचने की गारंटी 5 प्रतिशत है क्योंकि किसी भी अस्पताल को नहीं पता कि कोरोना संक्रमण की आखिर दवा क्या है? कुछ मौतें तो हार्ट अटैक आने व दहशत से हुई क्योंकि एक तो कोरोना पॉजिटिव से मिलने का कोई जरिया नहीं था। ऊपर से ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ मौत व जिंदगी से जूझते लोगों के पास स्वास्थ्यकर्मियों के उपलब्ध न होने से निराशा व ज्यादा ऑक्सीजन लेने से निमोनिया भी मौत का कारण बना।

10 पहाड़ी जनपदों में कम रहा आंकड़ा

उत्तराखंड के 13 जनपदों में से जो 10 जनपद पहाड़ी क्षेत्रो के हैं, वहां मौतों का आंकड़ा बहुत कम रहा। लगभग 85 प्रतिशत गांवों के लोगों ने न मास्क लगाया और न उन्हें दवाइयों की आवश्यकता पड़ी। बस दिक्कत रही तो उन लोगों से जो मैदानों से संक्रमित होकर गांव लौटे। यह आश्चर्यजनक है कि ग्रामीण क्षेत्र के कामकाजी लोगों कोरोना अपनी जकड़ में नहीं ले सका फिर भी पहाड़ी जिलों के गांवों में कुछ मौतें तब हुई जब मैदानों से नौकरियों से लौटे व्यक्तियों ने ऐतिहात नहीं बरता। ज्यादात्तर मौतें इन 10 जिलों में शहरों में  रह रहे लोगों की ही हुई है।

कोरोना संक्रमण व सरकार के प्रति रवैया

दूसरे दौर के भयावक मंजर देख जनता का सरकार के प्रति विश्वास उठ गया था। लोगों ने कहना शुरू कर दिया था कि प्रदेश व देश में सरकार नाम की कोई चीज है ही नहीं लेकिन जैसे-जैसे कोरोना की रफ्तार धीमी हुई व विश्व भर के विकसित व विकासशील देशों के आंकड़े सामने आने लगे, जनता यह सोचने को मजबूर हो गई कि विश्व के लगभग 42 देशों के बराबर अकेले भारत की जनसंख्या है व इस हिसाब से देखा जाए तो देश की कुल जनसंख्या के लगभग डेढ़ से ढाई प्रतिशत तक ही लोगों की मौतें हुई है व रिकवरी रेट 97.32 प्रतिशत रहा है। ऐसे में केंद्र की मोदी सरकार ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में इस महामारी से निबटने के अभूतपूर्व प्रयास किए हैं। उत्तराखंड में भी जिस हिसाब से कोरोना का विस्फोट हुआ उस हिसाब से मौतें कम मानी जा रही हैं व रिकवरी रेट 95.99 प्रतिशत होना बेहद सुखद लगता है।

मीडिया की भागीदारी

हम सभी जानते हैं कि भारतीय मीडिया बेलगाम घोड़े को तरह है। कोरोना काल में अफवाहों का बाजार गर्म रहा लेकिन कुछ सो कॉल्ड सेकुलर मीडिया हाउस, पत्रकार व आम व्यक्तियों को अगर छोड़ दिया जाए तो भारतीय मीडिया ने देश की साख में अपना अभूतपूर्व योगदान दिया। जिन तथाकथित लोगों व पत्रकारों ने सरकार के विरुद्ध षड्यंत्र रचने के प्रयास किए वे असफल रहे और उसका उन्हें खामियाजा भी भुगतना पड़ा।

बहरहाल अब उत्तराखंड प्रदेश भी तीसरी लहर के लिए तैयार दिखाई देता है क्योंकि वर्तमान पुष्कर सिंह धामी सरकार चुनावी मॉड पर हैं। वे लगातार स्वास्थ्य सम्बन्धी बैठके आयोजित कर रहे हैं ताकि तीसरी लहर को रोका जा सके। वर्तमान में उत्तराखंड में मात्र 333 केस कोरोना पॉजिटिव दर्ज हैं। इनमें से ज्यादात्तर के शीघ्र स्वास्थ्य होकर घर लौटने की संभावना है।

 

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