अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी को राजा महेंद्र प्रताप सिंह ने दी थी ज़मीन, अब उनके नाम पर खुल रहा विश्वविद्यालय

उत्तर प्रदेश का अलीगढ़ शहर मुस्लिम विश्वविद्यालय के लिए मशहूर है इसके साथ ही विवादों को लेकर भी अलीगढ़ चर्चा में रहता है। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का नाम भी दूर दूर तक फैला है और उसमें लगी जिन्ना की तस्वीर भी विवाद को समय समय पर जन्म देती रहती है लेकिन अलीगढ़ में अब एक और विश्वविद्यालय तैयार होने जा रहा है जिसकी आधारशिला भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रख दी है हालांकि नये विश्वविद्यालय की आधारशिला ऐसे समय में रखी गयी है जिसके कुछ दिन बाद उत्तर प्रदेश में चुनाव होने वाला है। इसलिए कुछ राजनीतिक दल इसे चुनाव से भी जोड़ कर देख रहे हैं। 
 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 14 सितंबर 2021 को अलीगढ़ में राजा महेंद्र प्रताप सिंह के नाम से नए विश्वविद्यालय की नींव रखी। यह 92 एकड़ में तैयार होगी और इससे 395 कालेज जुड़े रहेंगे। इस विश्वविद्यालय को बनाने में करीब 101 करोड़ रुपये का खर्च आयेगा जो शिक्षा विभाग की तरफ से जारी कर दिया गया है। मोदी सरकार जिस राजा महेंद्र प्रताप के नाम पर विश्वविद्यालय तैयार करवाने जा रही है उन्हें अभी तक बहुत ही कम लोग जाते है लेकिन सरकार के ऐलान के बाद से ही महाराजा महेंद्र प्रताप सिंह को सोशल मीडिया पर सर्च किया जा रहा है। 
महाराजा महेंद्र प्रताप सिंह का जन्म 1 दिसंबर 1886 को एक जाट परिवार में हुआ था। मुरसान रियासत के राजा घनश्याम सिंह के यह तृतीय पुत्र थे हालांकि हाथरस के राजा हरनारायण सिंह ने उन्हें गोद ले लिया था। राजा महेंद्र प्रताप सिंह जब शिक्षा ग्रहण कर रहे थे तभी उनका विवाह जींद रियासत की बलवीर कौर से हो गया। राजा महेंद्र प्रताप सिंह एक स्वतंत्रता सेनानी, पत्रकार, लेखक और बड़े समाज सुधारक भी थे। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान बनीं ‘भारत की अनंतिम सरकार’ के वह अध्यक्ष थे जबकि द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापान में ‘भारतीय कार्यकारी बोर्ड’ की स्थापना की थी। सन 1911 में राजा महेंद्र प्रताप सिंह ने बाल्कन युद्ध में भी भाग लिया था जहां उनके कॉलेज के दोस्तों ने उनकी मदद की थी।
 
प्रथम विश्व युद्ध के दौरान राजा महेंद्र प्रताप सिंह ने 1 दिसंबर 1915 को अफगानिस्तान जाकर एक निर्वासित सरकार का चयन किया और खुद उसके राष्ट्रपति बनें। यह एक स्वतंत्र भारत सरकार थी जो लोगों को देश के लिए जागरूक करती थी और राष्ट्रहित में काम करती थी। महेंद्र प्रताप सिंह किसी भी पार्टी से जुड़े नहीं थे लेकिन उस समय के कांग्रेस के बड़े बड़े नेता इनके संपर्क में थे और इनकी बात भी मानते थे। महेंद्र सिंह की एक खास बात यह भी है कि वह जातिवाद से बहुत उपर थे और सिर्फ देशहित की बात करते थे। शायद यही वजह रही कि उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी को अपनी तरफ से जमीन दान में दी थी। 
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय का नाम विख्यात है लेकिन इस विश्वविद्यालय के लिए जमीन किसने दी इसका जिक्र कहीं पर नहीं किया गया है तो हम आप को बता दें कि राजा महेंद्र प्रताप सिंह ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के लिए जमीन दान दी थी लेकिन उसका जिक्र कहीं पर नहीं किया गया है। इसके पीछे दरअसल कहानी यह है कि पूर्व पीएम नेहरू की जर्मनी और जापान से मित्रता नहीं थी जबकि राजा महेंद्र प्रताप सिंह ने इन दोनों देशों से मदद लेकर स्वतंत्रता की लड़ाई शुरू की थी जिससे इनके बीच संबंध कुछ खास अच्छे नहीं थे इसलिए महेंद्र प्रताप सिंह के नाम को सरकार की तरफ से गुमनाम किया गया जिससे आने वाली पीढ़ियां महेंद्र प्रताप सिंह के नाम से काफी दूर हो गयी।     
 

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