ब्रूस ली एक दार्शनिक महान योद्धा

वो महानतम मार्शल आर्टिस्ट था। वो पंद्रह सौ पुशअप कर सकता था,दो सौ टू फिंगर्स पुशअप। वो एक इंच दूर से पंच कर किसी फाइटर को धराशायी कर सकता था। कोक कैन में अपनी उंगली के प्रहार से छेद कर सकता था । वो एक बार में नौ पंच कर सकता था और एक बार में सात किक।
ब्रूस ली का जन्म 27 नवम्बर 1940 को चीनी राशी-चक्र  कैलेंडर के अनुसार ड्रैगन वर्ष में सैन फ्रांसिस्को चाइना टाउन में स्थित चीनी अस्पताल में हुआ था। उनके पिता ली होई च्यूअन, चीनी थे और उनकी कैथोलिक मां ग्रेस हो चीनी और चतुर्थांश जर्मन वंश की थीं। ली जब तीन महीने के थे, तो उनके माता-पिता हांगकांग लौट आए।
एक प्रतिष्ठित मार्शल आर्ट कलाकार ब्रूस ली ने बहुत सी फिल्म और टीवी शो किये। एक फिल्म जिसने सबसे ज्यादा सुर्खियाँ बटोरी और साथ ही वे एक हीरो के रूप में सबके दिलों में छा गए, वह फिल्म दी गोल्डन हार्वेस्ट और वार्नर ब्रदर्स प्रोडक्शन की ‘इंटर दी ड्रैगन’ थी। इस फिल्म ने दुनिया भर में कमाई की और लगभग 200 मिलियन डॉलर कमा लिए। यह ब्रूस ली की सबसे बड़ी सफलता थी।
उसकी मृत्यु के आधी सदी बाद भी उस जैसी विध्वंसक साइड किक कोई आज तक नहीं कर सका। एक सौ अठारह मील प्रति घंटा की रफ्तार से मारी उसकी साइड किक दो सौ पाउंड वजन के शख्स को बारह फीट दूर फेंक सकती थी।
फिल्मों में निर्देशकों को उससे अपनी गति कम करने के लिए कहना पड़ता था, ताकि कैमरा उसके एक्शन्स को कैप्चर कर सके। उसके देश के मार्शल आर्ट गुरुओं ने जब उससे देश के बाहर के लोगों को अपनी और उसकी राष्ट्रीय कला के रहस्य सिखाने के लिए मना किया तो उसका जवाब था, ” इस आसमान के नीचे हम सब इंसान भाई भाई हैं।”
वह एक दार्शनिक योद्धा था। उसने कहा था,” पानी का न कोई आकार होता है न यह ठोस होता है , लेकिन यह मजबूत से मजबूत, ठोस चट्टान को काट सकता है। तरल बन जाओ, पानी बन जाओ।”
ब्रूस ली की आखिरी फिल्म ‘गेम्स ऑफ़ डेथ’ में उनके वास्तविक अंतिम संस्कार का दृश्य भी शामिल है।
उसने कवितायें भी लिखी थीं। वो महज साढे बत्तीस बरस जिया था। वो नर्तक था, वो सवा सौ साल में हुआ नंबर एक मार्शल आर्टिस्ट था,वो दार्शनिक था,कवि था,रफ्तार का शाहजादा था। वो ‘ असंभव ‘ की अवधारणा को बार-बार तोड़ने वाला शख्स था। वो जब जहाँ था, शानदार था।
वो इंसान नहीं, करिश्मा था। वो भूतो न भविष्यति था।

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