प्रकृति के सुकुमार कवि सुमित्रानंदन पंत

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अपनी कविता के माध्यम से प्रकृति की सुवास सब ओर बिखरने वाले  कवि श्री सुमित्रानंदन पंत का जन्म कौसानी (जिला बागेश्वर, उत्तराखंड) में 20 मई, 1900 को हुआ था। जन्म के कुछ ही समय बाद मां का देहांत हो जाने से उन्होंने प्रकृति को ही अपनी मां के रूप में…

ब्रूस ली एक दार्शनिक महान योद्धा

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वो महानतम मार्शल आर्टिस्ट था। वो पंद्रह सौ पुशअप कर सकता था,दो सौ टू फिंगर्स पुशअप। वो एक इंच दूर से पंच कर किसी फाइटर को धराशायी कर सकता था। कोक कैन में अपनी उंगली के प्रहार से छेद कर सकता था । वो एक बार में नौ पंच कर…

वीर सावरकर : बहुमुखी प्रतिभा के धनी

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वीर सावरकर एक लेखक, कवि, समाजसेवी, राजनीतिज्ञ, स्वतंत्रता सेनानी, वक्ता, दार्शनिक, रणनीतिकार और हिंदुत्व के प्रतीक थे। जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में उनका कार्य सराहनीय है। भारत माता और समाज के सभी वर्गों के लिए उनका प्यार और स्नेह उनके जीवन भर किए गए अथक कार्यों में देखा जा सकता…

पंडित सुंदरलाल शर्मा को क्यों कहा गया छत्तीसगढ़ का गांधी?

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  21 दिसंबर 1881 को पंडित सुंदरलाल शर्मा का जन्म छत्तीसगढ़ के चंद्रसूर गांव में हुआ था। सुंदरलाल एक कवि, सामाजिक कार्यकर्ता, इतिहासकार, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी सहित बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे उन्हें जन जागरण और सामाजिक क्रांति का दूत भी कहा जाता है। अगर एक लाइन में कहें तो…

और कितने मोड़

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अस्वस्थता का ध्यान आते ही शरीर में एक लहर-सी दौड़ गई। वह तेज बुखार में तप रहा था। जी चाह रहा था हिले भी न, फिर भी छुट्टी न मिल पाने के कारण फैक्टरी जाना पड़ रहा था। जैसे ही आधे रास्ते पहुंचा कि तेज वर्षा प्रारम्भ हो गई। भींगने के कारण कंपकंपी छूटने लगी। अत: टेस्ट रूम में पहुंचकर उसने हीटर जलाया।

राम की अयोध्या वापसी

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कौशल्या ने सादगी का जो चोला पति के जाने के बाद ओढा, वह नहीं बदला। अब वह दुकान शहर में ‘कौशल्या रेस्टोरेन्ट’ के नाम से जानी जाने लगी। अपनी आमदनी से वह कुछ दान-पुण्य करती, बचत से भावी बहू के लिए जेवर बनवाती, मन में बेटे की गृहस्थी बसाने का सपना जो आकार लेने लगा था।

संवेदनाएं अपनी-अपनी

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अचानक स्टेशन का शोर सुनाई देने लगा था। न्यू दिल्ली स्टेशन आ चुका था। सभी यात्री अपना सामान लेकर दरवाजे की ओर बढ़ने लगे। नितिन और भव्या भी मालती को लेकर सामान के साथ नीचे उतर आए। सबको मालती के बेटे अरुण का इंतजार था। भव्या और नितिन की निगाहें मालती की ओर थीं, कि कब वह संकेत देगी कि मेरा बेटा अरुण आ गया।

बर्मिंघम त्यागराज फेस्टिवल का औचित्य

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बर्मिंघम त्यागराज फेस्टिवल एक प्रसिद्ध उत्सव है, ऐसे ही क्लीवलैंड त्यागराज फेस्टिवल भी प्रसिद्ध है। इनके नाम में जो “त्यागराज” नजर आता है, उससे ये तो पता चलता है कि ये किसी भारतीय के नाम पर मनाये जाने वाले कोई आयोजन हैं। लेकिन आखिर ये हैं क्या? उत्तर भारत में…

“जिस पापी को गुण नहीं गोत्र प्यारा है, समझो उसने ही हमें यहां मारा है” राष्ट्रकवि दिनकर

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उठ मंदिर के दरवाजे से, जोर लगा खेतो में अपने। नेता नहीं, भुजा करती है, सत्य सदा जीवन के सपने।।   राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर वह कवि थे जिनकी कविताएं लोगों को जोश से भर देती थी। 23 सितंबर 1908 को बिहार के बेगूसराय में पैदा हुए रामधारी सिंह दिनकर को…

पंचर, कपलिंग और टाइमपास लोकतंत्र

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लोकतंत्र की क्या कहिए। कब पंचर हो जाए। कब तक स्टेपनी साथ दे। कब इंजिन सहमति दे जाए। कब कौन पत्ते फैंट दे। कब कौन तीन पत्ती शो कर दे। कब गुलाम और इक्का मिलकर बादशाह को पंचर कर दे। कब ताश की दुक्की ट्रंप बन जाए। चाय, अखबार और चैनलों में पसरे हुए जनता के दिन इस बहाने कितने लोकतांत्रिक ढंग से कट जाते हैं।

मानसून का आ जाना कोरोना में..

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“घर ही नहीं बाहर भी ये मौसम और ये दूरी सभी को अखर रही है.. कि कब कोरोना का सत्यानास जाए और पहले की तरह हम खूब खाए पियें और हुलसकर अपनों से गले मिलें, जिससे बारिश की बूंदों में प्रेम की फुहार मिलकर बरसे...”

हिंसक आंदोलन का लेखाजोखा

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नक्सलली आंदोलन, उसके कार्यकर्ताओं की निष्ठा, संघर्षशीलता, गरीब आदिवासियों में उनकी पैठ के साथ-साथ उसके जनविरोधी स्वरूप को समझने के लिए स्व. पत्रकार प्रकाश कोलवणकर की यह मराठी किताब उपयोगी साबित होगी।

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