देवभूमि में डेमोग्राफी चेंज सुरक्षा के लिए खतरा

हाल के वर्षों में पर्वतीय राज्य उत्तराखंड में हुए जनसांख्यिकीय बदलाव के बाद यहां के पर्यटन कारोबार में भी समुदाय विशेष की तेजी से घुसपैठ हुई है। इसका असर गढ़वाल के साथ ही कुमाऊं मंडल के नैनीताल, भीमताल, रामनगर, बागेश्वर, जागेश्वर, रानीखेत व कौसानी में भी देखा जा सकता है। इन लोगों ने स्थानीय कारोबारियों से ऊंची कीमत पर होटल व लाज लीज पर लेकर संचालन शुरू कर दिया है। कुछ साल पहले तक स्थानीय लोगों द्वारा संचालित अधिकतर रेस्तरां भी अब इन्हीं के पास हैं। इनके कुछ संचालक तो संदिग्ध भी हैं।
बीते पांच सालों के इंटेलिजेंस इनपुट को देखें तो इनमें कुछ ऐसे भी लोग उभरे हैं जिनकी मजबूत आर्थिक पृष्ठभूमि नहीं रही है। लेकिन, जब बात होटल को लीज पर लेने की आई तो उन्होंने सर्वाधिक बोली लगाई। सुरक्षा एजेंसियां इस बदलाव को सामान्य नहीं मान रहीं। इनमें बड़े पैमाने पर बाहरी फंडिंग की भी बात सामने आ रही है। इसमें उत्तर प्रदेश के रामपुर, मुरादाबाद, स्वार, सहारनपुर, बिजनौर, बरेली, अलीगढ़, नेपाल से सटे जिले महाराजगंज, बिहार के पश्चिमी चंपारण, रक्सौल और पांच व्यक्ति नेपाल के भी चिह्नित किए गए हैं।
पर्यटन कारोबार में समुदाय विशेष के घुसपैठ का असर बड़ा व्यापक है। यहां के होटलों में पहले वेटर, कुक व सफाईकर्मी स्थानीय लोग थे। लेकिन होटल लीज पर लेते ही स्थानीय लोगों को हटाकर ये काम समुदाय विशेष के बाहरी युवाओं को सौंप दिया गया। हालांकि नाम स्थानीय ही रखे हैं, जिससे किसी को शक न हो और कारोबार चलता रहे।
टूर एंड ट्रेवल्स के कारोबार में भी इन्होंने बड़ा नेटवर्क तैयार किया। हल्द्वानी से लेकर चीन सीमा से सटे पिथौरागढ़ तक इनके कार्यालय खुले हैं। लग्जरी गाडिय़ों की रेंज भी बेहतर है। इस कारण स्थानीय लोग टूर एंड ट्रेवल्स कारोबार से धीरे-धीरे करीब बाहर होते गए। आज स्थिति ये है कि नैनीताल जिले में अधिकतर टैक्सियां इन्हीं की चल रही हैं। रानीखेत, कौसानी का भी यही हाल है। डीआईजी कुमाऊं नीलेश आनंद भरणे ने कहा कि शासन के निर्देश पर पूरे कुमाऊं में सत्यापन शुरू किया गया है। इसमें हम पर्यटन कारोबार के इस बदलाव को भी शामिल करेंगे। रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई भी सुनिश्चित करेंगे।
पश्चिम चंपारण (बिहार) के संबंध में इंटेलिजेंस रिपोर्ट को लेकर एक अधिकारी ने बताया कि पीएफआई सक्रिय हो रही है और नेपाल के बॉर्डर क्षेत्र में लैंड जिहाद पर भी स्थानीय प्रशासन को ध्यान देने की जरूरत है।
– स्कंद शुक्ला 

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