कैसा भारत चाहते हैं संघ प्रमुख 

Continue Readingकैसा भारत चाहते हैं संघ प्रमुख 

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत द्वारा पांचजन्य को दिए साक्षात्कार में केवल एक अंश बहस का विषय बना जिसमें उन्होंने कहा कि मुसलमानों को डरने की आवश्यकता नहीं है। उनका कहना था कि मुसलमानों में स्वयं को शासक मानने वाले उस मानसिकता से बाहर आकर सामान्य नागरिक के…

संघप्रमुख का कहा राष्ट्रवादी मुस्लिमों को स्वीकार

Continue Readingसंघप्रमुख का कहा राष्ट्रवादी मुस्लिमों को स्वीकार

"तोड़ दूंगा ये सारे बुत ए खुदा पहले यह तो बता तुझको इनसे इतनी जलन क्यों है। आए हैं कहां से ये बुत तेरी ही बनाए हुए पत्थरों और मिट्टियों से पहले यह तो बता की उन पत्थरों और मिट्टियों में क्या तू नही है?" किसी शायर का ये शेर…

समुदाय विशेष पर क्यों मेहरबान है सुप्रीम कोर्ट ?

Continue Readingसमुदाय विशेष पर क्यों मेहरबान है सुप्रीम कोर्ट ?

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने फैसला दिया था कि हल्द्वानी में रेलवे की 78 एकड़ की जमीन पर बसे बनभूलपुरा को खाली करवाया जाए और पूरे इलाके में बुलडोजर चलवाकर जमीन को समतल किया जाए ताकी रेलवे की जमीन रेलवे को सौंपी जा सके । पूरे इलाके में 4 हजार 365 कच्चे…

अवैध मतांतरण राष्ट्रीय चुनौती है

Continue Readingअवैध मतांतरण राष्ट्रीय चुनौती है

ईसाई, इस्लामी समूह काफी लम्बे समय से अवैध मतांतरण में संलग्न हैं। वे सारी दुनिया को अपने पंथ मजहब में मतांतरित करने के लिए तमाम अवैध साधनों का इस्तमाल कर रहे हैं। अपनी आस्था विवेक और अनुभूति में जीना प्रत्येक मनुष्य का अधिकार है। लेकिन यहाँ अवैध मतांतरण के लिए…

मुसलमान के साथ खड़े होना इनका मजहबी कर्त्तव्य

Continue Readingमुसलमान के साथ खड़े होना इनका मजहबी कर्त्तव्य

नूपुर शर्मा ने क्या कहा ये महत्वपूर्ण नहीं, क्योंकि उससे ज्यादा तो खुद इस्लामिक स्कालर खुद ही बोलते हैं । उसने ऐसी कौन सी बात बोली जो उनके धर्मग्रंथों का हिस्सा नहीं ? इसलिए अगर विरोध करना था, तो विरोध उनकी अपनी पुस्तक का होना चाहिए था । पर दाग…

हर शहर में एक उन्मादी भीड़

Continue Readingहर शहर में एक उन्मादी भीड़

  शहर में कितना भीड़-भड़क्का है। हर तरफ भीड़ से भरे हैं हमारे शहर। आजादी की यह सबसे महान उपलब्धि है कि गांव वीरान होते गए और शहर भीड़ से भरते गए। अगर यूपी और बिहार न होते तो मुंबई इतनी ठसाठस नहीं होती। भला हो उन सरकारों का जिन्होंने…

क्या नूपुर प्रकरण पर भाजपा दबाव में है ?

Continue Readingक्या नूपुर प्रकरण पर भाजपा दबाव में है ?

एक टीवी डिबेट में साथी पैनेलिस्ट के भगवान शिव पर बार बार अमर्यादित टिपण्णी से उकसावे में आकर पैगंबर मोहम्मद पर की गयी टिप्पणी के बाद विवादों व कट्टर मुस्लिम समाज की “सर तन से जुदा” धमकियों में घिरी बीजेपी प्रवक्ता नुपूर शर्मा और एक अन्य प्रवक्ता नवीन जिंदल को…

स्पष्ट हो अल्पसंख्यक की परिभाषा

Continue Readingस्पष्ट हो अल्पसंख्यक की परिभाषा

अल्पसंख्यक-बहुसंख्यक की संवैधानिक परिभाषा किसी को ज्ञात न होने के कारण इसके लाभ भी ऐसे समाज को मिल रहे हैं, जो न तो अल्पसंख्यक हैं और न ही उन्हें उससे मिलने वाले लाभों की जरूरत है। इसलिए संविधान में अल्पसंख्यक की परिभाषा स्पष्ट किया जाए ताकि, इसके असली हकदार अल्पसंख्यकों को उचित लाभ मिल सकें।

इस तरह की भाषा डर पैदा करती है

Continue Readingइस तरह की भाषा डर पैदा करती है

सामान्यतः जमीयत ए उलेमा ए हिंद या ऐसे संगठनों की बैठकों या सम्मेलनों पर राष्ट्रीय मीडिया की नजर नहीं रहती। छोटी सी खबर आ जाती है। किंतु देवबंद में जमीयत का 2 दिनों का सम्मेलन राष्ट्रीय सुर्खियां पाया तो इसके कारण हैं। वाराणसी से लेकर मथुरा, आगरा, दिल्ली तक ज्ञानवापी,…

मुसलमानों को भारतीयत्व अपनाना होगा

Continue Readingमुसलमानों को भारतीयत्व अपनाना होगा

भारत में रहने वाले हिंदुओं का अब यह कर्तव्य है कि वे अपने श्रद्धा स्थानों को दासता के चंगुल से मुक्त कराने का बीड़ा उठाएं, जिससे आनेवाली पीढ़ियां अपना सही इतिहास जान सकें। अब भी अगर हिंदू अपनी आंखें मूंदे बैठे रहे, अपने आस-पास रातभर में बन जाने वाली मजारों पर कुछ नहीं बोले और अपने श्रद्धा स्थानों और अपने प्रतीकों को मुक्त करने के लिए उद्यत नहीं हुए तो शिव को शव बनाने के जो प्रयत्न अभी असफल रहे हैं, वे आगे सफल भी हो सकते हैं। 

तलवार की जगह स्थान ले लिया कलम ने

Continue Readingतलवार की जगह स्थान ले लिया कलम ने

वीर सावरकर कितने दूरदर्शी थे इसकी मिसाल उनकी इस बात से ही लगाई जा सकती है कि उनका कहना था की "मुझे मुसलमानों से डर नहीं लगता, अंग्रेजों से तो कतई डर नहीं लगता, मुझे डर लगता है तो हिन्दुत्व से नफरत करनेवाले हिंदुओं से ही"। और, वीर सावरकर की…

विवेकशील मुसलमान आगे आएं…

Continue Readingविवेकशील मुसलमान आगे आएं…

ज्ञानवापी सर्वे के बाद देश भर में सरगर्मी विचारणीय है। उस में सामने आई बात पहले ही जगजाहिर थी। इस्लामी आक्रमणकारियों के क्रिया-कलाप के तथ्यों पर कभी विशेष विवाद नहीं रहा। तथ्य सदियों से जगजाहिर हैं। हाल में वामपंथी इतिहासकारों ने लीपापोती करने की कोशिश की, किन्तु विफल रहे। बल्कि…

End of content

No more pages to load