वाचन शिरोमणि पंडित नारायण प्रसाद पोखरेल

भगवान की कथा हिन्दुत्व एवं धर्म के जागरण का एक प्रभावी माध्यम है। भारत में शायद ही कोई गांव या नगर हो, जहां प्रतिवर्ष भागवत और श्रीराम की कथा न होती हो। हजारों लोग इससे पुण्य प्राप्त कर अपना परिवार भी चला रहे हैं। प्रायः सभी कथावाचक अपने क्षेत्र में कोई सेवा कार्य भी करते हैं। 

भारत का पड़ोसी नेपाल सदा से हिन्दू राष्ट्र रहा है; पर पिछले कुछ वर्षों से वहां माओवादी कम्यूनिस्ट अपने आतंक के बल पर प्रभावी हो गये हैं। वस्तुतः पड़ोस में बसा दुष्ट चीन और विश्वव्यापी चर्च उस पवित्र भूमि को हड़पना चाहते हैं। इन्होंने नेपाल की हिन्दू राष्ट्र की मान्यता भी समाप्त कर दी है। इससे न केवल नेपाल अपितु विश्व भर के हिन्दू दुखी हैं।

नेपाल में भी भारत की तरह धार्मिक कथा कहने और सुनने की व्यापक परम्परा है। 1958 में जन्मे पंडित नारायण प्रसाद पोखरेल वहां ‘वाचन शिरोमणि’ के नाते विख्यात थे। उनका कथा कहने और उसकी व्याख्या करने का ढंग निराला था। वे कथा में स्थानीय लोकजीवन के संदर्भों का व्यापक प्रयोग करते थे। इस कारण हजारों लोग मंत्रमुग्ध होकर घंटो तक उनकी कथा सुनते थे; पर इसी से वे माओवादियों की आंख में कांटे की तरह चुभने लगे।

श्री पोखरेल का जन्म गोरखा जिले में एक धर्मप्रेमी कृषक परिवार में हुआ था। पारिवारिक संस्कारों के कारण वे बचपन में ही संस्कृत पढ़ने के लिए काशी आ गये। कथा में रुचि होने के कारण शिक्षा पूर्ण कर वे वृन्दावन आकर कथा बोलने का अभ्यास करने लगे। इसके बाद वापस नेपाल जाकर उन्होंने इसे ही अपना  जीवन-कार्य बना लिया। कुछ ही समय में वे सब ओर प्रसिद्ध हो गये।

1999 में श्री पोखरेल का संपर्क विश्व भर में हिन्दुओं को संगठित करने वाली संस्था ‘विश्व हिन्दू महासंघ’ से हुआ। उस साल महासंघ की नेपाल इकाई का अधिवेशन पोखरा में हुआ था। इसमें उन्हें नेपाल इकाई का अध्यक्ष चुना गया। उनके नेतृत्व में महासंघ का कार्य बहुत तेजी से आगे बढ़ा। इसके 3,000 आजीवन सदस्य तथा आठ जिलों में स्थायी कार्यालय बन गये।

श्री पोखरेल कथा के माध्यम से आने वाले धन का समाज हित में ही उपयोग करते थे। उन्होंने नेपाल के 65 जिलों में 525 स्थानों पर भागवत कथा के द्वारा दो अरब रुपया एकत्र किया। इससे उन्होंने सैकड़ों प्राथमिक, माध्यमिक एवं महिला विद्यालय, महाविद्यालय, चिकित्सालय, धर्मशाला, महिला उत्थान केन्द्र, बाल कल्याण केन्द्र, मंदिर तथा सड़कों आदि का निर्माण कराया।

नेपाल के सामाजिक व धार्मिक क्षेत्र में यह पहला उदाहरण था कि किसी ने शासन या विदेशी सहयोग के बिना, केवल भागवत कथा द्वारा समाज की इतनी सेवा की। इससे पूरे समाज और धनपतियों को एक नयी दिशा प्राप्त हुई। वेस्ट इंडीज के हिन्दू सम्मेलन में श्री पोखरेल नेपाल के प्रतिनिधि के नाते गये थे। वहां उनकी भेंट श्री अशोक सिंहल से हुई। प्रथम भेंट में ही वे अशोक जी से प्रभावित होकर ‘विश्व हिन्दू परिषद’ से भी जुड़ गये।

उनके ध्यान में आया कि हिन्दू धर्म को मिटाने का षड्यन्त्र पूरे विश्व में चल रहा है। चर्च, इस्लाम और वामपंथी सब मिलकर यह कार्य कर रहे हैं। इससे उनके कार्य की गति और बढ़ गयी; पर हिन्दू धर्म के विरोधी माओवादी इससे रुष्ट हो गये।

जिला रुपन्देही के रामापुर ग्राम में कथा के दौरान छह मई, 2006 को मोटर साइकिल पर सवार दो आतंकियों ने उन पर कई गोलियां दाग दीं। इस प्रकार नेपाल के एक प्रखर हिन्दू नेता और प्रख्यात कथावाचक का असामयिक निधन हो गया। 2009 में नेपाल शासन ने उन्हें ‘धर्म बलिदानी’ की उपाधि दी।

(संदर्भ : हिन्दू विश्व, जून प्रथम, 2006)

–  विजय कुमार 

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