“हमारे महाकाव्य और पुराण, सदियों से यही संदेश देते आए हैं. महाभारत में विदुरनीति असफल रही, भगवान श्रीकृष्ण की शांति-वार्ता भी सफल नहीं हुई, क्योंकि दुर्योधन किसी भी संवाद के लिए तैयार नहीं था. परिणामस्वरूप महाभारत जैसा विनाशकारी युद्ध हुआ.”

“रामायण में भी भगवान श्रीराम ने हनुमान और अंगद के माध्यम से रावण से संवाद स्थापित करने का प्रयास किया था, लेकिन अहंकार में डूबे रावण ने उसे अस्वीकार कर दिया और अंततः लंका सहित उसका साम्राज्य विनाश का शिकार बना.”
विश्व संवाद केंद्र, मुंबई द्वारा आयोजित ‘देवर्षि नारद पत्रकार सम्मान 2026’ कार्यक्रम में प्रख्यात लेखक ‘प्रशांत पोळ’ ने अपने संबोधन में उपस्थित मीडिया कर्मियों से संवाद करते हुए यह विचार व्यक्त किए. ‘सभ्यताओं का संघर्ष’ विषय पर आधारित उनका उद्बोधन उपस्थित जनों के लिए अत्यंत मार्गदर्शक और चिंतनशील रहा. उन्होंने आगे कहा कि “संवाद भारतीय संस्कृति का मूल स्वभाव है. आज विश्व के अनेक देश युद्ध और संघर्ष की परिस्थितियों से घिरे हुए हैं, लेकिन भारत इन परिस्थितियों से दूर है क्योंकि भारत की परंपरा संवाद, सहअस्तित्व और समन्वय की रही है”.

इस अवसर पर अंतरराष्ट्रीय रणनीतिकार, लेखक और वक्ता ‘संदीप वासलेकर’ मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे. कार्यक्रम के प्रारंभ में विश्व संवाद केंद्र, मुंबई के अध्यक्ष ‘सुधीर जोगळेकर’ ने केंद्र की 26 वर्षों की यात्रा पर प्रकाश डाला, तो ‘डॉ. निशीथ भांडारकर’ ने इस सम्मान समारोह की भूमिका और उद्देश्य को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया.
प्रसिद्ध समाचार वाचक ‘मिलिंद भागवत’ ने विशेष अतिथि ‘लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) आर. आर. निम्भोरकर’ और ‘संदीप वासलेकर’ का – ‘सभ्यताओं का संघर्ष’, विषय पर संवाद लिया, जिसने समारोह को एक विशेष ऊँचाई प्रदान की.
चयन समिति द्वारा चयनित विभिन्न श्रेणियों के 12 पत्रकारों और कंटेंट क्रिएटर्स को ‘देवर्षि नारद सम्मान’ से सम्मानित किया गया।
वरिष्ठ पत्रकार एवं प्रसिद्ध यूट्यूबर ‘भाऊ तोरसेकर जी’ को इस वर्ष का ‘जीवनगौरव सम्मान’ प्रदान किया गया। उन्होंने अपनी सहज, मार्मिक और प्रभावी शैली में संक्षिप्त मनोगत व्यक्त कर उपस्थित मीडिया कर्मियों को भावविभोर कर दिया।
कार्यक्रम का प्रभावी संचालन विश्व संवाद केंद्र, मुंबई की संपादिका मनाली दीक्षित ने किया, जबकि केंद्र के कार्यकारी प्रमुख ‘चंद्रशेखर वझे’ ने उपस्थित अतिथियों का आभार व्यक्त किया।
कुर्ला-बांद्रा संकुल स्थित NSE के अत्याधुनिक सभागार में आयोजित इस भव्य समारोह का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।
– प्रशांत पोळ
