जनसंघ की निधि पर भाजपा की शक्ति

Continue Readingजनसंघ की निधि पर भाजपा की शक्ति

मां और पुत्र के बीच जो शाश्वत प्रेम प्राकृतिक रूप से स्थापित होता है, वह किसी अन्य परस्पर दो जीवो के बीच देखने को नहीं मिलता। इसका एक प्रमुख कारण यह भी है कि मां अपने पुत्र को नौ माह तक पहले गर्भ में उसका पालन पोषण करती है। अनेक…

हरियाणा के सरकारी कर्मचारी क्यों नहीं ले सकते थे संघ में हिस्सा, खट्टर सरकार ने बदला नियम?

Continue Readingहरियाणा के सरकारी कर्मचारी क्यों नहीं ले सकते थे संघ में हिस्सा, खट्टर सरकार ने बदला नियम?

  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने अपनी स्थापना के बाद से सिर्फ राष्ट्र प्रेम किया और लोगों की सेवा की, यह बात भी किसी से छिपी नहीं है लेकिन इन सब के बाद भी कुछ राजनीतिक पार्टियों के निशाने पर संघ हमेशा रहा है। हरियाणा सरकार की तरफ से वर्ष…

राजमाता सिंधिया:जेंडर की एक केस स्टडी भी…

Continue Readingराजमाता सिंधिया:जेंडर की एक केस स्टडी भी…

ग्वालियर के जिस जयविलास पैलेस को लोग दुनियाभर से देखने आते है उसे राजमाता विजयाराजे सिंधिया जीवाजी विश्वविद्यालय को दान करना चाहती  थी ताकि ग्वालियर रियासत के बच्चों को बेहतर उच्च शिक्षा मुहैया हो सके।जय विलास महल दुनिया के सबसे महंगे और आकर्षक महलों में एक है लेकिन राजमाता को…

जयप्रकाश नारायण जयंती विशेष – सवाल तो जेपी के चेलों से बनते ही है…!

Continue Readingजयप्रकाश नारायण जयंती विशेष – सवाल तो जेपी के चेलों से बनते ही है…!

जेपी के महान व्यक्तित्व को लोग कैसे स्मरण में रखना चाहेंगे यह निर्धारित करने की जबाबदेही असल मे उनके राजनीतिक चेलों की भी थी। जेपी का मूल्यांकन उनके वारिसों के उत्तरावर्ती योगदान के साथ की जाए तो जेपी की वैचारिकी का हश्र घोर निराशा का अहसास कराता है। आजादी के…

विश्व-बंधुत्व की भावना को साकार करता एकात्म मानवदर्शन और पंडित दीनदयाल उपाध्याय

Continue Readingविश्व-बंधुत्व की भावना को साकार करता एकात्म मानवदर्शन और पंडित दीनदयाल उपाध्याय

सरलता और सादगी की प्रतिमूर्त्ति पंडित दीनदयाल उपाध्याय बहुमुखी एवं विलक्षण प्रतिभा के धनी थे। उनका जीवन परिश्रम और पुरुषार्थ का पर्याय था। वे कुशल संगठक एवं मौलिक चिंतक थे। सामाजिक सरोकार एवं संवेदना उनके संस्कारों में रची-बसी थी। उनकी वृत्ति एवं प्रेरणा सत्ताभिमुखी नहीं, समाजोन्मुखी थी। एक राजनेता होते…

भारतबोध के साथ वैश्विक कल्याण का पथ ‘एकात्म दर्शन’

Continue Readingभारतबोध के साथ वैश्विक कल्याण का पथ ‘एकात्म दर्शन’

धरती के हर  मनुष्य के साथ  ठीक वैसा व्यवहार हो, जैसा हम दूसरों से अपने लिए चाहते हैं। परिवार, समाज,देश और यहां तक कि विश्व के सभी शासक अपने पर निर्भर लोगों के साथ उनके हित को ध्यान में रखते हुए एक जैसा व्यवहार करें को एकात्म मानव दर्शन का…

आज यशस्वी हो रही है राष्ट्रीय विचारधार – गोपाल शेट्टी (सांसद-भाजपा)

Continue Readingआज यशस्वी हो रही है राष्ट्रीय विचारधार – गोपाल शेट्टी (सांसद-भाजपा)

  उपनगर मुंबई के लोकप्रिय जननेता और गार्डन सम्राट के रूप में प्रसिद्ध भारतीय जनता पार्टी के सांसद गोपाल शेट्टी ने हिंदी विवेक को दिए अपने साक्षात्कार में राजनीति, समाजसेवा, युवाशक्ति, विचारशक्ति, भाजपा-शिवसेना सहित महाविकास आघाडी सरकार, एसआरए योजना, परिवारवाद आदि विषयों पर अपनी बेबाक राय रखी. प्रस्तुत है उनसे हुई…

बाबुल सुप्रियो ने TMC के साथ शुरु की नई पारी, लेकिन क्यों छोड़ी BJP?

Continue Readingबाबुल सुप्रियो ने TMC के साथ शुरु की नई पारी, लेकिन क्यों छोड़ी BJP?

राजनीति में एक कहावत है कि यहां कोई ना दोस्त होता है और ना ही कोई दुश्मन, समय सभी को दोस्त और दुश्मन बदलने का मौका देता रहता है। वह एक अलग दौर था जब लोग देश या पार्टी के लिए काम करते थे लेकिन वह उन लोगों के साथ…

भाजपा में मुख्यमंत्री बदलने के मायने

Continue Readingभाजपा में मुख्यमंत्री बदलने के मायने

गुजरात के मुख्यमंत्री पद से विजय रूपाणी के अचानक इस्तीफा ने पूरे देश को चौंकाया है। इसके पहले कभी नहीं देखा गया कि एक मुख्यमंत्री दोपहर में प्रधानमंत्री के साथ कार्यक्रम में रहता हो और शाम को पत्रकारों के सामने आकर यह कहे कि मैंने पद से इस्तीफा दे दिया…

स्वतंत्रता की दूषित अवधारणा

Continue Readingस्वतंत्रता की दूषित अवधारणा

क्या राष्ट्र के नागरिकों के मध्य अल्पसंख्यक औऱ बहुसंख्यक की शर्मनाक औऱ विभेदकारी अवधारणा को हम अपनी उपलब्धियों के रूप में याद करें। क्या तुष्टीकरण की व्यवस्था के लिये स्वाधीनता की राजनीतिक लड़ाई लड़ी गई थी। समाजवाद के नाम पर हमने किस आर्थिक मॉडल की नींव रखी जो राष्ट्रीय हितों के ही विरुद्ध हो। सवाल बहुत है जो जीवन के हर क्षेत्र से जुड़े है। क्यों कौटिल्य, गांधी, दीनदयाल की सशक्त और मौलिक वैचारिकी को खूंटी पर टांगकर हमने वाम औऱ पश्चिमी विचारों को आत्मसात कर देश को आगे बढ़ाने के नीतिगत निर्णय लिए? आखिर भारतीय स्वत्व को भुलाकर उधार की वैचारिकी ने इन 74 सालों में हमें क्या दिया?

विपक्ष देख रहा मुंगेरीलाल के सपने

Continue Readingविपक्ष देख रहा मुंगेरीलाल के सपने

कॉमरेड एक क्षण के लिए आंखें खोलें, और फिर वापस 1940 के हसीन सपनों में लौट जाएं। दो बार ऐसा हो चुका है। यह बुजुर्ग कॉमरेड कांग्रेस है। संसद तो निमित्त मात्र है, कांग्रेस तो सत्र के पहले भी और सत्र के बाद भी इसी नशे में आगे से आगे झुकने और गिरने में आनंदित होती रही है कि सरकार तो उसी की है, बस जनता ने उसे वोट नहीं दिया है, बस चुनाव आयोग ने उसके पक्ष में परिणाम नहीं दिए हैं, बस राष्ट्रपति ने उसे शपथ नहीं दिलाई है, बस प्रशासन उसके अनुरूप नहीं चल रहा है, बस वह अपनी मर्जी से सरकारी सौदे नहीं कर पा रही है, बस उसकी पार्टी में दम नहीं बचा है, बस उसके पास राज्यसभा की एक सीट के लिए गुंजाइश नहीं बची है...। बाकी तो वही है, उसे तो बस चाचा, बाबाजी, खलीफा, चेयरमैन, जहांपनाह, कॉमरेड, दत्तात्रेय वगैरह, जो मिल जाए, वही बने रहना है। अगर सत्र चल रहा है, तो हंगामा करो, और नहीं चल रहा है, तो सत्र बुलाने की मांग करो।

राहुल आखिर क्यों लेते है आरएसएस का नाम?

Continue Readingराहुल आखिर क्यों लेते है आरएसएस का नाम?

शायद ही कभी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के किसी पदाधिकारी ने कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी का नाम लिया होगा और अगर लिया होगा तो उनको नसीहत ही दी होगी लेकिन राहुल गांधी अक्सर ही RSS नाम लेते फिरते रहते है। अब उनके पास कोई और मुद्दा नहीं है इसलिए,…

End of content

No more pages to load