मुबई के अँधेरी पूर्व स्थित महाकाली केव्स रोड, गणेश मंडल मैदान, वेरावली बस्ती में आयोजित हिन्दू सम्मेलन अत्यंत उत्साह, भक्ति, संस्कार एवं सांस्कृतिक चेतना के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह सम्मेलन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि “सनातन चेतना, संस्कृति और संगठन का दिव्य संगम” सिद्ध हुआ। कार्यक्रम में मातृशक्ति, युवाओं, बच्चों एवं समाज के विभिन्न वर्गों की उत्साहपूर्ण सहभागिता रही। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य हिन्दू समाज को एकता, संस्कार, सेवा एवं सांस्कृतिक गौरव के सूत्र में जोड़ना था।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं गणेश वंदना से हुआ। “वंदे मातरम्” की ओजस्वी प्रस्तुति ने सम्पूर्ण वातावरण को राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत कर दिया।
विशिष्ट अतिथि जोतिंदर सिंह आहलूवालिया जी ने “हिन्द दी चादर– गुरु तेग बहादुर जी” विषय पर प्रेरणादायी उद्बोधन देते हुए कहा कि —
“सनातन केवल पूजा पद्धति नहीं, बल्कि त्याग, बलिदान और मानवता की परंपरा है।” उन्होंने गुरु तेग बहादुर जी के अद्वितीय बलिदान का स्मरण कर धर्मरक्षा के संदेश को जन-जन तक पहुँचाने का आह्वान किया।

सम्मेलन का विशेष आकर्षण रही स्वयंसेविका सौ. राजश्री गुप्ता द्वारा प्रस्तुत ”नवदुर्गा प्रस्तुति”, जिसमें नारी के नौ दिव्य स्वरूपों को अत्यंत प्रभावशाली एवं भावपूर्ण ढंग से मंचित किया गया। शैलपुत्री से सिद्धिदात्री तक की यात्रा के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि नारी केवल शक्ति नहीं, बल्कि समाज, संस्कृति और राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है।
दुर्गा शक्ति समूह की इस भावपूर्ण प्रस्तुति ने यह संदेश दिया कि

“जहाँ नारी का सम्मान होता है, वहीं संस्कृति जीवित रहती है और वहीं से एक महान राष्ट्र का निर्माण होता है।”
इसके अतिरिक्त “ऑपरेशन सिंदूर” विशेष आकर्षण का केंद्र रहा, जिसमें कर्नल जगदीप मंचंदा जी ने अपने अनुभव साझा किए। कर्नल मंचंदा जी भारतीय सेना की पाँचवीं पीढ़ी से जुड़े हैं तथा राष्ट्रसेवा की गौरवशाली परंपरा का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनके साहस, अनुशासन और राष्ट्रसेवा का जीवन युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बना।
सौ. चित्रा गोविंदराजन जी एवं प्रेमा नारायण अय्यर का समूह भजन, कृष्ण भजन एवं आध्यात्मिक प्रस्तुतियों ने वातावरण को भक्तिरस से भर दिया। गायत्री बोरकर संचालित श्लोक वर्ग द्वारा सनातन संस्कारों की दिव्य प्रस्तुति दी गई। “विद्या ददाति विनयम्” के संदेश के साथ बच्चों ने संस्कृति एवं संस्कारों का महत्व दर्शाया। निखिल गायगोले द्वारा प्रस्तुत स्त्री शक्तिबोध पथनाट्य ने हिन्दू एकता, सामाजिक समरसता एवं जागरूक समाज के महत्व को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
आर्ट ऑफ़ लिविंग प्रस्तुत सुनील कंवर्जनी द्वारा “इंट्यूशन प्रोग्राम” ने बच्चों को अपनी तीसरी आँख की शक्ति से परिचय कराते हुए बच्चो का मन मोह लिया।
वहीं मुख्य वक्ता कमलेश पारीक जी ने हिन्दू समाज की एकता, संगठन एवं सनातन संस्कृति के संरक्षण पर प्रभावी मार्गदर्शन देते हुए कहा कि —
“जब हिन्दू संगठित होता है, तो केवल समाज नहीं, पूरा राष्ट्र सशक्त होता है।”
कार्यक्रम के दौरान गौसेवा उत्पाद, पर्यावरण संरक्षण एवं राष्ट्रीय साहित्य पुस्तक स्टॉल भी आकर्षण का केंद्र रहे।
सम्मेलन के समापन पर आयोजकों ने सभी अतिथियों, वक्ताओं, कलाकारों, स्वयंसेवकों एवं उपस्थित सनातन प्रेमियों का हृदय से आभार व्यक्त किया।
आयोजकों में सेविका सौ. राजश्री गुप्ता, सौ. स्मिता खेतले, सौ. गौरी मारबली, सौ. हेमा भट और वेरावली बस्ती के स्वयंसेवक श्रीराम सिंह, विक्रम राय और सूरज यादव जी का विशेष योगदान रहा।
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