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विवेक समूह तथा सोमैया विद्याविहार के संयुक्त तत्वावधान में यूनिवर्सल ब्रदरहुड ग्रंथ का प्रकाशन दिल्ली के विज्ञान भवन में 21 जुलाई 2019 को सम्पन्न हुआ।

अपने प्रस्ताविक में विवेक समूह के प्रबंध संपादक दिलीप करंबेलकर ने विवेक समूह की स्थापना तथा आज की मीडिया के सामने जो चुनौतियां हैं , उस पर प्रकाश डाला।

सोमैया विद्याविहार के अध्यक्ष समीर सोमैया ने सोमैया ट्रस्ट के अन्तर्गत आने वाले विभिन्न शैक्षणिक संस्थाओं की स्थापना के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि सोमैया संस्था के संस्थापक स्वामी विवेकानंद जी के विचारों की प्रेरणा से सोमैया शिक्षण संस्थान की स्थापना की। जिस प्रकार स्वामीजी भारत की युवा पीढ़ी को आंतरिक शक्ति से जागृत तथा भारतीय परंपरा पर गर्व करने वाला बनाना चाहते थे, सोमैया संस्थान उसी दिशा में अग्रसर है।

ग्रंथ की संपादक कला आचार्य ने अपने भाषण की शुरुवात संस्कृत से करते हुए कहा कि आज के समय में हठ योग सबसे अधिक प्रचलित है, परंतु योग केवल इतने तक ही सीमित नहीं है। योग केवल आसन या बाहरी क्रिया नहीं है। यह मनुष्य की आंतरिक शक्ति को जागृत  करनेवाला तथा उसकी आत्मिक उन्नति करने वाला है।

कार्यक्रम में मंच पर उपस्थित मान्यवरों के द्वारा ग्रंथ का विमोचन करने के बाद ग्रंथ की संपादक कला आचार्य, मेरियानो इतुर्बे, रिज़वान अड़ातीया तथा प्रशांत कारुलकर तथा उनकी पत्नी का सम्मान किया गया।

मोहनजी ने कहा “भाई होने तथा भाई जैसा होने में बहुत अंतर होता है। ब्रदरहुड यह संकल्पना भाव, प्रेम होने से पूर्ण होती है।

विज्ञान और अध्यात्म  एक दूसरे से जुड़ा है। अगर हमें इस योग को समझना है तो हमे अपने अंदर झांकना होगा। हमें मस्तिष्क के द्वारा अपनी पंचेन्द्रियों को आंतरिक जागृति की ओर प्रेरित करना होगा। योग हमे यही ज्ञान देता है। योग करने की आवश्यकता है, कहने की नहीं।  योग आपकी बुद्धि को शक्ति प्रदान करता है। जिसका अपनी बुद्धि पर नियंत्रण होता है वह सभी परस्थिति में स्वतः को एक जैसा बनाये रखता है। वह कभी किसी को दुख नहीं पहुंचता, अपनी महत्वाकांक्षा को त्याग देता है। यही योग है। यह पुस्तक योग का एनसाइक्लोपीडिया है। अगर विश्व का प्रत्येक व्यक्ति किसी भी तरह से योग करता है तो यूनिवर्सल ब्रदरहुड का स्वप्न अवश्य पूरा होगा।

उपराष्ट्रपति एम. वैंकया नायडू ने कहा “इस पुस्तक के माध्यम से योग के सभी पहलुओं पर गहन अध्ययन किया गया है।

आज भारत और दुनिया मे विभिन्न बीमारियों की संख्या बढ़ती जा रही है। इनका मुख्य कारण है हमारी बदलती जीवन शैली, अनियंत्रित खानपान और व्यायाम की कमी। हमारे देश मे अपनी देश के मौसम के अनुसार विभिन्न पकवान बनाये है। हम वो छोड़कर इंस्टेड फ़ूड खाते हैं। जो नई नई बीमारियों को जन्म दे रहे हैं।

हमने योग को धर्म के रंग में रंगना शुरू कर दिया है जबकि योग तो किसी धर्म से प्रेरित है ही नही। यह तो जीवनशैली का अंग होना चाहिए। योग से हम हमारे मस्तिष्क को नियंत्रित कर सकते हैं।

शेयर और केअर हमारी संस्कृति का हिस्सा है। यही हमारा धर्म है। हमारी भौतिक उन्नति के पीछे भागने के कारण आज हम आनंद खोते जा रहे हैं।

योग हमे उसी आनंद की अनुभूति कराता है।  इस पुस्तक में इसी प्रकार योग को विभिन्न अध्यायों में समेटा गया है।”

 

 

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