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उन्होंने समाज की सामान्य आवश्यकताओं अर्थात् भरण-पोषण और विकास दोनों में सहयोग हेतु प्रदाता के तौर पर कार्य किया । रिजवान आड़तिया फाउंडेशन गठन के साथ ही समाज की क्षमता बढ़ाने जैसे और योग्य बनाने की दिशा में परिश्रम करना शुरू किया । वैश्विक स्तर पर सर्व समभावी समाज का निर्माण ही रिजवान आड़तिया फाउंडेशन का सार है ।

 

भारतवर्ष में विकास का सिद्धांत वैदिक युग से ही मौजूद है; यह कोई साहित्यिक संकल्पना मात्र नहीं है। विकास का वास्तविक अर्थ है, ‘मानव मात्र की सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक दशा का पुनर्जागरण होना।‘ किसी भी देश का विकास मुख्यतः दो भागों में बंटा होता है-उपनगरीय और ग्रामीण। राष्ट्र के प्रगतिशील विकास हेतु ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों का विकास अत्यावश्यक है। २०११ की सामाजिक-आर्थिक जनगणना के अनुसार देश की सरकारों ने विकास के मामले में ग्रामीण क्षेत्र की अपेक्षा शहरों को हमेशा तरजीह दी है। इस मार्ग ने देश को प्रतिरूपात्मक तरीके से बांट दिया है। एक तरफ भविष्य का विश्वनेता ‘इंडिया‘ है तो दूसरी तरफ गरीबी और भ्रष्टाचार का मारा भारत। दुनिया की अग्रिम पंक्ति का राष्ट्र बनने के लिए ‘इंडिया‘ और ‘भारत‘ की खाई पाटने के लिए समाज के हर वर्ग द्वारा संयुक्त प्रयास की महती आवश्यकता है।

देश के भविष्य को बदलने की दिशा में वर्तमान सरकार ने निजी संस्थानों, सिविल सोसायटियों और गैर सरकारी समूहों का लोगों का जीवन स्तर ऊंचा करने की दिशा में सामूहिक प्रयत्न करने का आवाहन किया है। कई संस्थाओं ने इस दिशा में जमीनी स्तर पर गंभीरता से कार्य शुरू भी कर दिया है। इस तरह की संस्थाओं का सशक्ततम उदाहरण है ‘रिजवान आड़तिया फाउंडेशन‘। इसकी स्थापना सी ओ जी ई ग्रुप के चेयरमैन रिजवान आड़तिया के प्रयासों से २०१५ में हुई थी । देश के राष्ट्रपिता की ही तरह पोरबंदर में पैदा हुए रिजवान आड़तिया ने महात्मा गांधी के विचार को आत्मसात कर लिया है -‘दुनिया को बदलने से पहले खुद को बदलो।‘ इसी प्रेरणा के साथ के वे रिजवान आड़तिया फाउंडेशन के माध्यम से एशिया और अफ्रीका के निचले समुदाय तक पहुचने के लिए प्रयासरत हैं ।

शुरुआत में उन्होंने समाज की सामान्य आवश्यकताओं अर्थात् भरण-पोषण और विकास दोनों में सहयोग हेतु प्रदाता के तौर पर कार्य किया । आर ए एफ के गठन के साथ ही कौम की क्षमता बढ़ाने जैसे और योग्य बनाने की दिशा में परिश्रम करना शुरू किया ।

सर्व समभावी समाज का निर्माण ही रिजवान आड़तिया फाउंडेशन का सार है । फाउंडेशन अन्य सिविल सोसायटी संस्थाओं, स्थानीय प्रशासन और समूहों के सहयोग से तथा तार्किक ढंग से निर्मित कार्यक्रमों के क्रियान्वयन और निर्माण में नीतिगत ढंग से निवेश कर रहा है ।

रिजवान आडतिया फाउंडेशन स्थायी विकास लक्ष्य अर्थात वैश्विक लक्ष्यों की दिशा में कार्य करता है, जिसे संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यू.एन.डी.पी) में स्थाई भविष्य के लिए १९३ सदस्य राष्ट्रों द्वारा स्वीकार किया गया है। समाज के महत्वपूर्ण मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करते हुए, संस्था हर प्रकार की गरीबी मिटाने, प्रत्येक आयुवर्ग के स्वस्थ और सुखी जीवन, विस्तृत और गुणवत्तापरक शिक्षा और आजीवन शिक्षा जैसी विविध और बढ़ती हुई आवश्यकताओं के प्रति अपना ध्यान केद्रिंत किया है ।

रिजवान आड़तिया फाउंडेशन के संस्थापक रिजवान आड़तिया मूलत: गुजरात के पोरबंदर के रहनेवाले हैं। सन १९८६ में अपने बडे भाई की किराने की दुकान संभालने के लिये वे मोजाम्बिक गये थे और वहीं बस गये, परंतु भारत के लिये उनका प्रेम कम नहीं हुआ। वे भारत के इतिहास और विज्ञान में गहरी आस्था रखते हैं। वे कहते हैं दुनिया ने विज्ञान में भले ही प्रगति कर ली हो परंतु भारत में जो ज्ञान है वह और किसी के पास नहीं है। दक्षिण अफ्रीका के मोजाम्बिक निवासी और उद्योगपति रिजवान आड़तिया ने अपने कार्यों के बूते एक मिसाल पेश की है। उन्होंने ‘मिशन २०१५-३०’ के माध्यम से यह स्वप्न देखा है कि जरूरतमंद लोगों का जीवन स्तर सुधारा जाये जिससे उनके उन्हें आंतरिक शांति प्राप्त हो सके। इस उद्देश्य को पूरा करने के लिये उन्होंने इन १५ सालों में विभिन्न ऐसे एनजीओ की सहायता करना की योजना बनायी है जो जरूरतमंद लोगों की किसी न किसी प्रकार से सहायता करती है। मोजाम्बिक के साथ ही उन्होंने भारत में भी इस मिशन का विस्तार करने की योजना बनाई है।

अल्प समय में ही रिजवान आडतिया फाउंडेशन ने कई महत्वपूर्ण विकास योजनाओं पर कार्य किया है जिनके द्वारा इसकी पहुंच अब भारत, बंगलादेश, डी आर कांगो, मोजाम्बिक,केन्या,दक्षिण अफ्रीका और स्वाजीलैंड में लगभग २ लाख लोगों तक हो गई है ।

२०१४ में अपनी शुरुआत से ही देश की सरकार विकास के परिदृश्य में पूर्ण रुप से बदलाव के लिए प्रयत्नशील है और इसकी एक मात्र छाया ‘सबका साथ, सबका विकास‘ के नारे में परिलक्षित होती है जो कि सम्पूर्ण विकास के लिए सामूहिक प्रयास की प्रतीक है।

रिजवान आड़तिया फाउंडेशन जैसे सिविल सोसायटी के संवाहक सरकार की योजनाओं को जरूरतमंद तक पहुंचाते हुए आवश्यकता की खाई को पाट कर देश के विकास में निर्णायक भूमिका का निर्वाह कर रहे हैं । सरकार की सभी कल्याणकारी योजनाओं और पात्रता की अनुगामी बनकर राष्ट्र के सामूहिक विकास के लिए फाउंडेशन वचनबद्ध हैं । संस्था ने इच्छित लाभार्थियों तक राज्य सरकारोंे की
योजनाओं को पहुंचाने में भी मदद की है- जिनमें से कुछ हैं, उज्जवला योजनान्तर्गत चित्रवार्ड गुजरात के ग्रामीण इलाके में गैस रुपान्तरण को अमल में लाए; सरकार की आइ सी डी एस. स्कीम के तहत बिहार के नगर और ग्रामीण क्षेत्र में शिशु विकास में हस्तक्षेप करते हुए देश के नौनिहालों के पोषण की योजनाओं को अमल में लाए । संस्था के बिहार के इ-गवर्नेंस प्राजेक्ट को भारत सरकार के इ-गवर्नेंस प्लान में स्थान मिला है । स्वच्छ भारत अभियान के तहत गुजरात के ११ विद्यालयों में विद्याथिर्र्यों के लिए शौचालय बनवाने में सहयोग दिया तथा इस समय गुजरात के मलिया हतिना में माइक्रो सालिड अपशिष्ट प्रबंधन के अभिनव मॉडल पर कार्य कर रहे हैं ।

रिजवान आडतिया फाउंडेशन ने २०३० तक १० लाख जरूरतमंद लोगों तक पहुंचने का लक्ष्य बनाया है और इस दिशा में अपने हाथ फैलाने शुरू भी कर दिए हैं । इनकी आने वाली अभिनव स्मार्ट पंचायत योजना आत्मिक विकास के इच्छुक लोगों के विकास में सहायक होकर राष्ट्र के विकास की मजबूती की अगुवाई करेगी।

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