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वर्ष २०१७ में ‘मेक इन उत्तर प्रदेश’ नई दिशा और नए उत्साह के साथ आगे सकारत्मक रूप से विकसित होता दीखता है- जो न सिर्फ प्रदेश को विकास वर्षा देगा बल्कि देश को विश्व पटल पर आर्थिक परचम फैराने में कारगर होगा।

भारत अपार सम्पदा एवं संसाधन के साथ आज दुनिया की सब से तेज़ी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था है, और दुनिया का सब से नौजवान देश है जहां जनसंख्या की औसतन आयु २७ वर्ष है। देश की आर्थिक तरक्की में प्रत्येक प्रदेश की क्षमता का अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान है। उत्तर प्रदेश गंगा-यमुना, हिमालय, विंध्याचल के बीच बसा- देश का सब से विशाल प्रदेश है। प्राकृतिक भंडारों और नौजवानों के जोश से भरपूर उत्तर प्रदेश को इसीलिए ‘उत्तम प्रदेश’ और ‘उम्मीदों का प्रदेश’ भी कहा जाता है।

सभी राज्यों में उत्तर प्रदेश ८.४ प्रतिशत विकास दर (२०१५-१६) के साथ देश की तीसरी सब से बड़ी अर्थव्यवस्था है। उत्तर प्रदेश खाद्यान्न, दुग्ध, गन्ना और आलू उत्पादन में देश में सब से आगे है। यही नहीं, प्रदेश देश का छठा सब से बड़ा सॉफ्टवेयर निर्यातक है। भारी कुशल मानव संसाधनों से परिपूर्ण उत्तर प्रदेश कपड़ा, हस्तशिल्प एवं परमपरागत शिल्पों में अपनी छाप छोड़ता है। उपर्युक्त क्षमताओं और विकास आकांक्षाओं से भरपूर्ण उत्तर प्रदेश देश में तरक्की की यात्रा में इंजन के रूप में देखा जाता है।

राजनीतिक नई दिशा
हालांकि गत कुछ वर्षों में राजनीतिक अस्थिरता और उसके बाद परिवारवादी और वोट बैंक की राजनीति के कारण प्रदेश में विकास नीतियों से अधिक तुष्टिकरण की राजनीति को बल मिला। मध्य-प्रदेश जैसे राज्यों ने बीमारू अवस्था से निकल कर विकास की गति पकड़ी, वहां पिछले दो दशकों में उत्तर प्रदेश भारी बेरोजगारी, सुस्त आर्थिक विकास और लचर क़ानून व्यवस्था से जूझता रहा। वर्ष २०१४ में देश ने एकजुट होकर केंद्र में भ्रष्ट सरकार को बाहर का रास्ता दिखाते हुए, अभूतपूर्व मतों से श्री नरेन्द्र मोदी जी के विकास के वायदे पर भरोसा दिखाते हुए भारतीय जनता पार्टी की सरकार को मौका दिया है।

प्रधानमंत्री ने जनता के इस अपूर्व समर्थन को जिम्मेदारी की तर्ज पर लेते हुए भारत की विकास गाड़ी ऐसे हांकनी शुरू की है कि बड़े-बड़े देश आज भारत का लोहा मान रहे हैं। दुनिया के आर्थिक विशेषज्ञ आज भारत को आने वाले में समय में दुनिया का आर्थिक गुरु के रूप में देखते हैं। पिछले ढाई वर्षों में देश में विदेशी निवेश में हो रही बढ़ोतरी इसका द्योतक है। केंद्र में मोदी सरकार आने के बाद से देश में निवेश का सकारात्मक माहौल बना है, जिसका प्रदेश पर भी सकारत्मक असर देखा गया। प्रधानमंत्री के ‘मेक इन इंडिया’ और व्यापार सरलीकरण के एजेंडे और विज़न का सभी प्रदेशों ने अनुसरण किया। नतीजतन प्रदेश ने ‘इज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस’ के पैमानों पर सुधार दिखाया। DIPP २०१६ की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश का स्कोर २०१५ में ४७.३७% से २०१६ में ८४.५२% हो गया है।

देश के विकास को और गतिमान करने हेतु २०१७ में प्रधानमंत्री ने स्वयं उत्तर प्रदेश वासियों से समर्थन मांगा कि भारत का विकास उत्तर प्रदेश के विकास के बिना नहीं हो सकता। उत्तर प्रदेश वासियों ने न सिर्फ भाई-भतीजावाद और वोट-बैंक की राजनीति को करार जवाब दिया, बल्कि मोदी जी के विकास मॉडल को निर्विरोध समर्थन दिया। परिणाम २०१७ विधान सभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की अकल्पनीय, अभूतपूर्व जीत। विशाल प्रदेश की विकास की अपेक्षाओं को पूरा करने हेतु युवा जोश एवं विचारधारा में परिपक्व श्री योगी आदित्यनाथ जी ने केंद्र सरकार की तर्ज पर प्रदेश में विकास और सुशासन की ज़िम्मेदारी उठाई है। प्रदेश को कई दशकों के बाद एक स्थिर और पहली बार विचारधारा में परिपक्व, जनमानस की खुशहाली के लिए प्रतिबद्ध सरकार मिली है।

नीतिगत नई दिशा
नए उत्साह से भरपूर प्रदेश में गठित नई सरकार ने ‘मेक इन इंडिया’ की तर्ज पर ‘मेक इन उत्तर प्रदेश’ को बल देने की पूरी तयारी कर ली है। मुख्यमंत्री ने कार्यभार संभालते ही एक तरफ भ्रष्टाचार के कई मुद्दों को त्वरित निपटारा किया जैसे नई खनिज नीति से अवैध खनन पर रोक लगाना, आदि और दूसरी ओर प्रदेश को नई उद्योगिक नीति भी दी है। इस नीति के प्रमुख उद्देश्यों में प्रदेश को निवेश का सर्वोत्तम गंतव्य बनाने के साथ ही प्रदेश में रोजगार, स्व-रोजगार को बढ़ावा देना है। प्रदेश की आर्थिक तरक्की को प्रबल करने हेतु प्रदेश सरकार न सिर्फ देश की आर्थिक गतिशीलता से स्पर्धा देखती है बल्कि एशिया और विश्व स्तर पर आर्थिक मानकों से स्पर्धा करते हुए प्रदेश की व्यवस्था सुधारना चाहती है। नई सरकार का व्यापक विज़न इस नीति से स्पष्ट है।

अतः लघु उद्योगों के विकास पर विशेष बल है। प्रदेश में विशिष्ट क्लस्टर्स जैसे मेरठ में स्पोर्ट्स आइटम्स, मोरादाबाद में पीतल के बर्तन, कन्नौज में इत्र, कानपुर में चमड़ा, लखनऊ में चिकनकारी, भदोई में कारपेट, आदि के रूप में चिन्हित किए जाते है। नई उद्योग नीति में इस क्लस्टर्स को और संयोजित करते हुए, नवोन्मेष और व्यापार सरलीकरण द्वारा मजबूती देने का दृष्टिकोण रखा गया है। देश में GST को समर्थन देने वाले राज्यों में उत्तर प्रदेश सबसे आगे रहा, ताकि व्यापार और बाजार सरलीकरण हो सकें ।

कृषि प्रधान देश का ‘फ़ूड बास्केट’ होने के कारण प्रदेश में फूड पार्क के विकास पर भी बल है। एग्रो प्रोसेसिंग न सिर्फ निवेश का आकर्षक सेक्टर है, बल्कि भारी रोजगार देने वाला क्षेत्र है। ऐसे ही विनिर्माण, विशेषतः श्रम घनिष्ठ सेक्टर के लिए सब से किफायती गंतव्य है। इन सभी बिन्दुओं को ध्यान करते हुए सरकार कौशल विकास और बुनियादी ढांचा निर्माण जैसे २४७ बिजली, गड्ढामुक्त सड़क, आधुनिक परिवहन जैसे मेट्रो आदि कार्यक्रमों पर कार्यरत है। प्रदेश में १३ स्मार्ट सिटी चिन्हित हैं। कार्यकुशलता में वादों का पालन करना सब से मौलिक बिंदु होता है और नई सरकार में यह स्पष्ट दिखा जब मुख्यमंत्री ने कुछ ही महीनों के शासन में १.२१ हजार किलोमीटर गड्ढेयुक्त सड़कों में से ८० हजार किलोमीटर गड्ढेमुक्त सड़क कर दी।

केंद्र सरकार के नेतृत्व में दीनदयाल ग्राम ज्योति योजना के अंतर्गत विगत दो वर्षों में प्रदेश में लगभग ९८% गांव बिजली से जुड़ पाए हैं। प्रदेश सरकार अब इस से आगे जाते हुए प्रदेश में सौर ऊर्जा को बढ़ावा दे रही है। नई सरकार के समर्थन से अब तक प्राइवेट उद्यमियों द्वारा ५MW क्षमता के ५ यूनिट, और नेशनल सोलर मिशन के अंतर्गत कुल ७०MW के सोलर यूनिट्स स्थपित हुए हैं। ५४६ सोलर स्ट्रीट लाइट प्लांट भी स्थापित हुए हैं। ऐसे तो पर्यटन के प्रदेश के कुछ स्थल विख्यात है और हर वर्ष लाखों में देश-विदेश के पर्यटक प्रदेश में इन बहु चर्चित स्थालों पर आते हैं। इससे और आगे बढ़ कर प्रदेश सरकार ने प्रादेशिक सांस्कृतिक धरोवर को विश्व पटल पर रखने के दृष्टिकोण से कई कदम उठाए हैं। ३९ साइट्स को अध्यात्मिक सर्किट में चिन्हित किया गया है। अयोध्या-फैजाबाद को स्पेशल टूरिस्ट सर्किट घोषित करने के साथ ही नैमिषारण्य जैसे उपेक्षित आध्यात्मिक धरोहरों को पर्यटन परिधि में विशेष स्थान देते हुए सुंदरीकरण का कार्य हाथ में लिया गया हैं।

भविष्य की नई दिशा
विकास पथ पर गतिमान उत्तर प्रदेश, राजनीतिक स्थिरता और ‘सबका साथ, सबका विकास’ आदर्श पर कटिबद्ध नेतृत्व के साथ और अधिक वेग से बढ़ता प्रतीत होता है। किसी भी प्रदेश के निवेश का आकर्षक गंतव्य बनाने में सबसे बड़े बाधक भ्रटाचार और लचर शासन व्यवस्था होती है। चूंकि प्रदेश कानून व्यवस्था बहाल करने पर सर्वाधिक जोर दे रहा है, साथ ही सुशासन और नवीनीकरण नई नीतियों के मूल आधार हैं- ‘मेक इन उत्तर प्रदेश’ देश में सबसे सफल अभियान बन सकता है।

उत्तर प्रदेश में प्रदेश अनुरूप औद्योगिक विकास गतिमान होने से न सिर्फ बेरोजगारी में बड़ी गिरवट आएगी, साथ ही प्रदेश की विकास दर १०% पार कर पाएगी। इस अभियान को और सक्षम बनाने हेतु राष्ट्रीय औद्योगिक दिग्गज जैसे टाटा, पतंजलि, बायोकॉन, डाबर, आदि को सक्रिय भागीदारी बनाना अच्छा होगा। साथ ही महाराष्ट्र, गुजरात, पंजाब जैसे कृषि-आधारित औद्योगिक राज्य, जिन्होंने अच्छी परफॉरमेंस दिखाई है, प्रदेश की नीतियों और रणनीतियों को प्रेरित कर सकते हैं। सफल मेक इन उत्तर प्रदेश अभियान में इन राज्यों की सहभागिता महत्वपूर्ण रहेगी।

अंतराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रदेश की अपार क्षमताओं और निवेश की व्यापक सीमाओं का चित्रण करना अति आवश्यक है। अंततः वर्ष २०१७ ‘मेक इन उत्तर प्रदेश’ नई दिशा और नए उत्साह के साथ आगे सकारत्मक रूप से विकसित होता दीखता है- जो न सिर्फ प्रदेश को विकास वर्षा देगा बल्कि देश को विश्व पटल पर आर्थिक परचम फैराने में कारगर होगा।

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