भारत बोध के संघर्ष में मोदी का आंकलन

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भारतीय सभ्यता लम्बे अरसे तक संघर्षों में फंसी रही, तो इसका एक कारण यह भी माना जाता है कि भारत ने सेमेटिक पंथो और भारतीय पंथों का कभी भी यथार्थ की खुरदुरी भूमि पर आकलन नहीं किया। हम अपनी उदात्तता का प्रक्षेपण अन्य पंथों पर करते रहे और उनके यथार्थ का सामना करने से अब भी बचते रहे हैं।

सूचना महाशक्ति होने का जरूरी स्वप्न

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भारत का सूचना महाशक्ति बनने की दिशा में पहल करना समय की मांग है। विश्वगुरू बनने का लक्ष्य एक वैश्विक संचारीय अधोसंरचना के बिना नहीं प्राप्त किया जा सकता। नए भारत का यह अनिवार्य अंग होना चाहिए।

हिमालयी राज्यों में फिर खिलेगा कमल

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हिमालची अंचल के तीन राज्यों- उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर- में 2014 की तरह मोदी लहर दिखाई दे रही है और इक्कादुक्का सीटें छोड़ दी जाए तो बाकी जगह कमल का फिर से खिलना लगभग तय है।

मीडिया के मंच पर मानवाधिकार का मुखौटा

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पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर के प्रश्न को राष्ट्रीय से अधिक सभ्यता से जुड़ा प्रश्न मानता रहा है। इसी मान्यता के आधार पर वह इस्लामी दुनिया को यह समझाने में एक हद तक सफल भी रहा है कि गजवा-ए-हिंद अथवा खिलाफत के इस्लामी स्वप्न का सर्वाधिक महत्वपूर्ण पड़ाव जम्मू-कश्

अधकचरी अवधारणाओं से आगे के हरि सिंह

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भारतीय अकादमिक जगत स्थापित मान्यताओं और छवियों के चहुंओर चक्कर लगाने की अक्षमता से पीड़ित रहा है| इस क्षेत्र में नवीनता और नवाचार के लिए आवश्यक दृष्टि तथा स्थापित मान्यताओं को चुनौती देने के लिए जरूरी साहस की कमी को भारी-भरकम शब्दों के जरिए ढांपने का चलन रहा है|

पूर्वोत्तर के लिए विशेष प्रावधान

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पूर्वोत्तर के राज्य आर्थिक दृष्टि से तो विशेष श्रेणी में आते ही हैं, राजनीतिक दृष्टि से भी संविधान ने उन्हें विशेष हैसियत प्रदान की है। इसकी शुरुआत अनुच्छेद ३७१(क) से की गई है, जिसमें नगालैंड को विशेष स्थिति में चिह्नि

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