स्वावलम्बी

Continue Reading स्वावलम्बी

पति के रोज -रोज के तानों से शाश्वती तंग आ चुकी है। वाकई वैवाहिक जीवन दोधारी तलवार की तरह है। कहां पिता के राज में अमन- चैन भरी जिंदगी और कहां यहा बात-बात पर ताने-उलाहनें, अपमान, तिरस्कार। क्या हर ‘हाऊस वाईफ’ के जीवन में ‘अर्थ’ को

अरुणाचल में ‘गांव बूढ़ा’ की भूमिका

Continue Reading अरुणाचल में ‘गांव बूढ़ा’ की भूमिका

‘गांव बूढ़ा’ की स्थिति एक गैर राजनीतिक व्यक्ति की है। ‘गांव बूढ़ा’ से तात्पर्य केवल वृद्ध व्यक्ति से नहीं है। आजकल युवा ‘गांव बूढ़ा’ भी नियुक्त हुए हैं। ग्राम पंचायत बनने के बाद ‘गांव बूढ़ा’ गांव में विकास के लिए ग्राम पंचायत के सदस्यों की सहायता लेता है। पंचायत सदस्य गांव के विकास के लिए कार्यक्रम बनाने में ‘गांव बूढ़ा’ की मदद करते हैं। लेकिन ग्राम स्तर पर न्याय निष्पादन का कार्य अभी भी ‘गांव बूढ़ा’ एवं कौंसिल की जिम्मेदारी है।

पूर्वोत्तर और शेष भारत

Continue Reading पूर्वोत्तर और शेष भारत

पौराणिक आख्यानों, भग्नावशेषों एवं प्रादुर्भूत शिवलिंगों को देखकर यह सिद्ध होता है कि पूर्वोत्तर भारत शेष भारत से कटा हुआ नहीं था। इन जनजातियों के साथ भारतीय संस्कृति के सूत्र हजारों वर्षों से गूंथे हैं। अतः पूर्वोत्तर भारत स

छह बहनें

Continue Reading छह बहनें

अगर गांव के बुजुर्ग लोग सिरूक के नीचे डूबने तक बाहर बैठते तो खेती-बारी करने के लिए जंगल काटने का समय आ गया है ऐसा कह कर वे खेती करने के लिए जंगल काटना शुरू करते थे। १० मई के करीब संध्या के समय चांद डूबता है तो मिजो लोग ‘‘धान का बीज’’ खेत में बोते थे। मिजो जाति के बुजुर्ग लोग सिरूक को समय मापन का साधन मानते थे।

End of content

No more pages to load