सफलता की कहानी

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दुनिया भर में विकलांगों को दोयम दर्जे का स्थान प्राप्त होता है, जबकि सही दिशा मिलने पर वे भी सामान्य जनों की ही भांति जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में बेहतरीन मुकाम हासिल कर सकते हैं। सरकारों ने उनकी तरफ ध्यान देना शुरू कर दिया है परंतु समाज को और जागरुक होना पड़ेगा ताकि समाज का यह प्रभाग भी पूरी तरह मुख्य धारा के साथ चल सके।

“द कश्मीर फाइल्स” पर अनर्गल प्रलाप और विकृत राजनीति 

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“द कश्मीर फाइल्स” आतंकवाद के भयावह दौर तथा सात सत्य घटनाओं पर बनी एक सच्ची फिल्म है। इन घटनाओं के सबूत उपलब्ध हैं। यह सेकुलर लोग झूठ पर आधारित कहानियां तो पढ़ लेते हैं लेकिन इस्लामी आतंकवाद के कारण हुयी  हिन्दू नरसंहार की असली कहानी इनको वल्गर लगती है  क्योंकि इन लोगों  को हिंदुओं का पलायन, उनकी हत्या, उनकी बहिन –बेटियों के सार्वजनिक बलात्कार का समर्थन करने में आनंद मिलता है। “द कश्मीर फाइल्स” का विरोध करने वाला गैंग बहुत ही खतरनाक और मानसिक विकृति का गैंग है जो जम्मू -कश्मीर की शांत हो रही स्थिति में अशांति का जहर घोलना चाहता है। 

आओ पहल करें

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प्रदूषण नियंत्रण के लिए हमें किसी दिन विशेष पर आश्रित होने की बजाय सामाजिक स्तर पर बहुत तेजी से कार्य करना चाहिए, क्योंकि इस महामारी ने बहुत खतरनाक रूप धारण कर लिया है। यदि लोग अभी नहीं चेते तो बहुत तेजी से इसके दुष्परिणाम सामने आएंगे और मानव जीवन खतरे में पड़ जाएगा।

भारतीय डिजिटल करेंसी का अर्थ

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भारत सरकार द्वारा जारी की गई डिजिटल करेंसी ‘ई-रुपी’ को बहुत सारे लोग बिटकॉइन इत्यादि की भांति समझ रहे हैं, जबकि यह पूरी तरह भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी किए गए डिजिटल नोट हैं, जिसमें हर नोट का अलग नम्बर होगा। अंतर यही होगा कि वह नोट अब आपके बटुए की बजाय डिजिटल रूप में होगा। इस योजना से नोटों की छपाई पर होने वाले खर्च में भी कटौती की जा सकेगी।

एजेंडा सेट करके कैसे किया जाता है दिमाग हैक ?

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चार किताबें,, मेरे पास युवा लड़के खूब बैठते थे आकर,, उन्होंने एकबार पूछा कि महाराज जी कैसे पता चले कि कोई व्यक्ति एजेंडा सेट करके हमारे दिमाग को हैक कर रहा है?? देखो भाई,,वैसे तो अनेकों तरीके होते हैं पता करने के लेकिन ज्ञान सबसे महत्वपूर्ण है,, अपने धर्म का…

हम कब अपने नायकों को पहचानेंगे ?

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जो राष्ट्र अपने नायकों को नहीं पहचानता, उनका सम्मान नहीं करता— वह जीवित रहने का अधिकार खो देता है। पहले भारत का तीन हिस्सों (खंडित भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश) में विभाजित होना, फिर कश्मीर के एक तिहाई पर कब्जा हो जाना और 1962 के चीन युद्ध में देश की शर्मनाक हार होना— इसी रोग के कुछ लक्षण है। 'देर आए दुरुस्त आए'— एक पुरानी कहावत है, जो दिल्ली में 23-25 नवंबर को संपन्न हुए कार्यक्रम पर बिल्कुल चरितार्थ होती है। असम के अहोम योद्धा लाचित बोरफुकन की 400वीं जयंती पर दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इसके समापन समारोह में शामिल हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत का इतिहास केवल गुलामों का नहीं, योद्धाओं का भी है। किंतु देश के वीरों का इतिहास दबाया गया। क्या यह सत्य नहीं कि मार्क्स-मैकॉले मानस प्रेरित इतिहासकारों ने भारतीय इतिहास को सर्वाधिक विकृत किया है। यही कारण है कि अधिकांश पाठक लाचित बोरफुकन के नाम से शायद ही परिचित होंगे। क्या यह परिदृश्य देश के समक्ष एक बड़ी चुनौती नहीं?

बौद्धिक गुलामी से मुक्ति हेतु शुरू हुआ राष्ट्रधर्म

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दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि देश की हर क्षेत्र में उन्नति और प्रगति होनी चाहिए लेकिन वैचारिक स्पष्टता और वैचारिक शुद्धता भी चाहिए। आर्य द्रविड़ मिथक को स्थापित करने का प्रयास इस देश में किया गया। भारत एक देश है ही नहीं ऐसी बातें कही गयीं। अंग्रेजों के जमाने से शुरू हुआ षड़यंत्र आजादी के 75 वर्षों तक जारी रहा। सरकार्यवाह ने बताया कि स्वतंत्रता के बाद भी भारत की संसद में बजट शाम पांच बजे पेश होता था। अटल जी जब प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने यह परम्परा बदली। राजपथ को कर्तव्यपथ बनाने का काम हुआ। देश को  मानसिक गुलामी से बाहर लाना होगा। 

गलतियां न दोहराना ही  श्रद्धांजलि…

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मोरबी हादसा कोई दुर्घटना मात्र नहीं बल्कि प्रशासनिक और मानवीय लापरवाही का प्रतीक है। इस पर राजनीति करने की बजाय ऐसे हादसे दोबारा न होने पाएं, इस पर ध्यान दिया जाना चाहिए। पुल की मरम्मत का ठेका एक घड़ी बनाने वाली कम्पनी को दिया जाना भी एक बड़ा मुद्दा है। देश भर के ठेकों को लेकर एक सार्थक मानक तय किए जाने की आवश्यकता है।

ईसाई धर्मांतरण के खिलाफ स्वधर्म रक्षक तालिम रुकबो

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निर्धन एवं अशिक्षित वनवासियों की मजबूरी का लाभ उठाया और लालच देकर हजारों लोगों को ईसाई बना लिया। अरुणाचल प्रदेश के पासीघाट जिले में एक दिसम्बर, 1938 को जन्मे श्री तालिम रुकबो ने शीघ्र ही इस खतरे को पहचान लिया। वे समझते थे कि ईसाइयत के विस्तार का अर्थ देशविरोधी तत्वों का विस्तार है। इसलिए उन्होंने आह्वान किया कि अपने परम्परागत त्योहार सब मिलकर मनायें। उन्होंने विदेशी षड्यन्त्रकारियों द्वारा जनजातीय आस्था पर हो रहे कुठाराघात को रोकने के लिए पूजा की एक नई पद्धति विकसित की। उनके प्रयासों का बहुत अच्छा फल निकला। राज्य शासन ने भी स्थानीय त्योहार ‘सोलुंग’ को सरकारी गजट में मान्यता देकर उस दिन छुट्टी घोषित की। 

उत्तर प्रदेश : वैश्विक निवेशकों की पहली पसंद

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प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए रखा एक ट्रिलियन डॉलर का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए प्रदेश सरकार लगातार काम कर रही है। फरवरी -2023 में लखनऊ में आयोजित होने जा रहे ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट से पहले ही प्रदेश को निवेश के प्रस्ताव मिलने प्रारंभ हो गए हैं। निवेशकों को आकर्षित करने के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री व कैबिनेट के अनेक मंत्री विदेशों का दौरा करने जा रहे हैं। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के पूर्व अभी दिल्ली में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विश्व भर के निवेशकों से यूपी की बदलती परिस्थितियों का लाभ उठाने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में विभिन्न देशों  के राजदूतों, उच्चायुक्तों, उद्यमियों और निवेशकों की उपस्थिति में प्रदेश के बदलते परिवेश को प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में निवेश बढ़ाने के लिए नीतिगत बदलाव के साथ ढांचागत सुविधाओं में व्यापक सुधार किया जा रहा है। 

जिहादी तालीम, जन्नत और 72 हुर

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श्रद्धा के 35 टुकड़े करने वाला कातिल आफताब यह बोल रहा है कि अगर फांसी भी चढ़ा तो भी जन्नत में जाऊंगा और वहां मुझे हूरे मिलेंगी। दैनिक जागरण में यह खबर भी प्रकाशित हुई थी कि आफताब ने पुलिस के सामने यह कहा कि श्रद्धा के साथ लिव-इन में रहते हुए भी उसके 20 हिंदू लड़कियों से रिश्ते बने थे। 2 अक्टूबर 2022 के दैनिक जागरण के राष्ट्रीय संस्करण में एक और समाचार छपा था। इंदौर में एक गर्भवती लड़की का गैंगरेप नौकरी दिलाने के बहाने किया गया। रेप करने के आरोप में सभी 4 मुसलमानों को अरेस्ट किया गया था। इसमें से एक मुसलमान जिसका नाम प्रिंस था वह लड़की से बलात्कार कर रहा था। लड़की ने उससे कहा कि वह गर्भवती है तो इस पर प्रिंस ने जवाब दिया कि हमारे समाज में यह सब चलता है और हिंदू लड़की से बलात्कार करने पर जन्नत नसीब होती है।

एनडीटीवी का पूर्वाग्रह और पत्रकारिता का पतन

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"एकोsहं द्वितीयो नास्ति" की अहंकारपूर्ण भावना से प्रेरित होकर उन्होंने सुनिश्चित किया कि चैनल पर केवल उन्हीं का चेहरा चमके। अन्य कोई चेहरा न बचे। धीरे-धीरे एनडीटीवी का न केवल संपादकीय विभाग पंगु हो गया, बल्कि स्क्रीन भी चेहरा-विहीन बन गया। चैनल के प्रबंधन की बुद्धि को भी ऐसा लकवा मार गया कि अपने पूर्वाग्रह-पूर्ण राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए उसने उन्हें ही अपना हथियार बना लिया। फिर इस राह पर चलते-चलते एनडीटीवी प्रबंधन धीरे-धीरे इतना पंगु हो गया कि विभिन्न अर्थिक गवनों के मामलों में छापों से बचने के लिए भी उसे उसी का इस्तेमाल करना पड़ा। अपनी सारी शक्तियां लगाकर लॉबिंग करके उस व्यक्ति को एक अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार दिलवाया गया, ताकि यदि जांच एजेंसियों का शिकंजा और अधिक कसता है, तो इसे एक अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बनाया जा सके कि भारत में सरकार मीडिया की आवाज़ को दबाने की कोशिश कर रही है। यह तरकीब कुछ हद तक काम भी आई और जांच एजेंसियों की कार्रवाइयों में ठहराव आता दिखा। लेकिन राजनीति में "तू डाल डाल मैं पात पात" का खेल चलता ही रहता है। आखिरकार एनडीटीवी को बिकने के लिए मजबूर होना पड़ा और यहां से डॉ. प्रणय रॉय और डॉ. राधिका रॉय को जाना पड़ा है। 

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