लोकपाल, काला पैसा एवं अण्णा-बाबा का आन्दोलन

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पिछले वर्ष लगभग इन्हीं दिनों देश का वातावरण अण्णा हजारे के आन्दोलन भर गया था। ऐसा वातावरण निर्माण हो गया था कि लगता था मानों देश में कोई नई क्रान्ति होने वाली है। उस आन्दोलन का बड़ा प्रभाव सरकार पर पड़ा था।

टीम अण्णा इतिहास से सबक ले

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संसद द्वारा लोकपाल बिल पारित कराने के लिए टीम अण्णा ने देश भर में लंबा आंदोलन चलाया। अण्णा हजारे ने दिल्ली के रामलीला मैदान में आमरण अनशन किया तो, ‘मैं अण्णा हजारे हूँ’ की टोपी सिर पर रखकर देश भर में उनके समर्थन में धरना, प्रदर्शन, सभा और रैली का आयोजन किया गया।

भारत जागरण का दूसरा दौर

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बाबा के आंदोलन को तोड़ने की लगातार कोशिश जारी है। बाबा के फास तो कोई धन नहीं मिला, उनके सहयोगी बालकृष्ण को घेरने की कोशिशें जारी हैं। उनके फतंजलि योगफीठ व उनकी दवा कम्फनियों का कच्चा-चिट्ठा खोजने के काम में सरकारी एजेंसियां जी-जान से जुटी हैं।

दूसरी आजादी की लड़ाई – जुलाई २०११

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जीवन का आधार जल, गुरु महिमा, श्रवण कुमार अब कहां ? वर्षा ऋतु के व्यंजन, सम्पादकीय सहित राज्यों के समाचार, कहानी आदि विषय वस्तु पत्रिका को सम्पूर्ण व समृद्ध बनाती है.

श्वेत-श्याम तसवीर

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लोग कहते हैं श्वेत-श्याम चित्रों का जमाना अब लद चुका है। चारों तरफ रंगीनी ही रंगीनी है। लेकिन चित्र रंगीन होते-होते कब श्वेत-श्याम में फरिवर्तित हो जाए इसे कौन जानता है? अब दक्षिण के ही दो चैनलों को देख लीजिए। कन्निमोझी कैसे चैनल को खड़ा करने के चक्कर में खुद फंस गईं। चैनल रंगीन बना रहा, लेकिन कन्निमोझी की छवि श्वेत-श्याम हो गई।

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