जैविक विश्व युद्ध और भारत

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सरकारें आती-जाती रहेंगी, लेकिन राष्ट्र की यह दिशा नहीं बदलनी चाहिए। वैभवशाली भारत का यही मूलमंत्र है। इसलिए कि जो शक्तिशाली होगा वही वजूद पाएगा जैसे कि डार्विन का सिद्धांत है

मजदूरों की तो लुटिया ही डूब गई

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वैश्वीकरण और अब कोरोना महामारी से तो मजदूरों की लुटिया ही डूब गई है। हजारों बेरोजगार हो जाएंगे और उन्हें कोई बचा नहीं पाएगा। अर्थव्यवस्था महामंदी के संकट में होगी। इस संकट की घड़ी में मजदूरों को बचाने वाला कोई मजदूर संगठन क्या आपको दिखाई देता है?

पीओके… सीओके

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अनुच्छेद 370 व 35ए की समाप्ति के बाद भारतीय जम्मू-कश्मीर व लद्दाख तो देश की मुख्य धारा में आ गए; लेकिन पाकिस्तान व चीन के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर व लद्दाख के हिस्सों याने पीओके व सीओके का क्या होगा? क्या भारत भूमि के इन हिस्सों को हम भूल चुके हैं?

नेहरू युग, मोदी युग

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सेक्युलरिज्म का मतलब केवल अल्पसंख्यकों का अर्थात मुस्लिमों का तुष्टीकरण और बहुसंख्यकों की अर्थात हिंदुओं की प्रतारणा नहीं है; बल्कि यह हिंदुस्तान की बहुविध प्राचीन व अर्वाचित संस्कृति का सम्मान करना है। सभी धाराएं गंगा में आकर मिलें और पूरा देश एकत्व से जुड़े यह मोदी की सामाजिक नीति का आधार है।

पूरब से आतीभाजपा क्रांति

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पूरे देश के लोकसभा चुनाव पर गौर करें तो भाजपा के नेतृत्व में एनडीए के विजय की संभावना को नकारा नहीं जा सकता। भाजपा को उत्तर में हो रहे घाटे को इस बार पूरब पूरा करते दिखाई दे रहा है।

हिंदी विवेक की दशक पूर्ति

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जब सूचना क्रांति ने मासिक पत्रिकाओं को परदे के पीछे ढकेल दिया हो तब ‘हिंदी विवेक’ जैसी वैचारिक पत्रिका के अविरत प्रकाशन के दस वर्ष पूर्ण होना अपने आप में कमाल की घटना है। इस संदर्भ में प्रस्तुत है कुछ अनुभव-आधारित निरीक्षण-

फैशन और सौंदर्य

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फैशन और सौंदर्य को जुदा नहीं किया जा सकता। जब दुनिया बर्बर अवस्था में थी तब प्राचीन भारत में एक समृद्ध संस्कृति थी। परिधानों, अलंकारों, सौंदर्य प्रसाधनों में हमारा कोई मुकाबला नहीं था। प्रस्तुत है फैशन शो के वैश्विक संदर्भ के साथ भारत में वस्त्रालंकारों, सौंदर्य के पैमाने एवं सौंदर्य-प्रसाधनों की एक झलक।

बहुत हो गया कबूतर उड़ाना… – जी.डी. उपाख्य गगनदीप बक्षी

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रक्षा के क्षेत्र में भी स्वाधीनता के बाद भारी बदलाव हुए हैं। थोड़ा-बहुत काम हुआ है, बहुत कुछ करना बाकी है। शांति के कबूतर बहुत उड़ा चुके। अब ठोस कार्रवाई हो। प्रस्तुत है फौज, युद्ध, हथियार आदि मुद्दों परें पर प्रसिद्ध वरिष्ठ फौजी अधिकारी, विचारक, तथा लेखक मेजर जनरल (नि.) जी.डी. उपाख्य गगनदीप बक्षी से हुई विस्तृत बातचीत के महत्वपूर्ण अंश-

भारतमाला विकास का नया आयाम

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भारतमाला चरण -1 में 24,800 किलोमीटर के कॉरिडोर नेटवर्क के उन्नयन से, निर्माण के चरण में लगभग 34 करोड़ श्रम दिवस उत्पन्न होंगे और आर्थिक गतिविधियों के बढ़ने के साथ लगभग 220 लाख स्थायी नौकरियों का सृजन होने की संभावना है।

बैंकों की जालसाजी और अनुशासन पर्व

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पंजाब नेशनल बैंक में 13 हजार करोड़ रु. के ऐतिहासिक घोटाले का भंड़ाफोड़ होते ही लोगों का सकते में आना स्वाभाविक है। सरकारी बैंक जिस तरह से अरबों के डूबत कर्जे में फंसे हुए हैं उसे देखते हुए धोखाधड़ी का यह आंकड़ा और बढ़ सकता है। तथ्य यह है कि ये कांग्रेस शासन के जमाने के कंकाल हैं, जो छिपाए नहीं छिप सकते। मोदी सरकार के जिम्मे अब सफाई का काम आ गया है। जिस तत्परता और कड़ाई से कदम उठाए जा रहे हैं उससे तो लगता है कि वित्तीय क्षेत्र में अनुशासन पर्व का आरंभ हो रहा है।

राहुलजी, कुछ अधिक परिपक्व बनिए

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राहुल गांधी जब कांग्रेस के उपाध्यक्ष थे तब उनके बचकाने बयानों को ज्यादा तवज्जो नहीं दी जाती थी, लेकिन जैसे ही वे प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस के अध्यक्ष बने उनके बयानों पर गौर करना लाजिमी हो गया है, खास कर तब जब वे विदेश में बोल रहे हो| इस संदर्भ में उनका बहरीन में किया गया भाषण गैरजिम्मेदाराना ही कहा जाएगा|

नया विधेयक, बैंक ग्राहक और जमापूंजी

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नये वित्तीय विधेयक की धारा ५२ के प्रावधानों को लेकर आम लोगों में बेचैनी है. इसमें प्रावधान है कि नया निगम चाहे तो जमाकर्ताओं की सारी जमापूंजी डकार सकता है. इससे न्यूनतम एक लाख रु. की बीमाकृत सुरक्षित राशि भी देने से इनकार कर सकता है. यह तो दिनदहाड़े डकैती हुई, जिसे रोकना सरकार का कर्तव्य है. लोगों में सरकार के प्रति विश्वास का माहौल पैदा होना चाहिए, संदेह का नहीं.

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