हिंदी विवेक : WE WORK FOR A BETTER WORLD...

बहुत पुराने समय की बात है एक राज्य के राजा ने अपने राज्य के मुख्य दरवार पर एक बड़ा सा पत्थर रखवा दिया इस पत्थर के रखवाने का मुख्य कारण था राजा अपने राज्य के लोगों की परीक्षा लेना चाहता था राजा अपने राज्य के लोगों की सोच को परखना चाहता था। राजा उस पत्थर से कुछ दूरी पर छुपकर यह देखने लगा के आखिर इस पत्थर को कोई रास्ते से हटाएगा जा नहीं। बहुत सारे लोग वहां से गुजरे वो सभी उस पत्थर को हटाने की वजाय वो रास्ते में पत्थर रखने वाले को कोसते रहते और वहां से चले जाते। अब तक किसी ने भी उस पत्थर को हटाने का प्रयास तक नहीं किया था।
काफ़ी दिनों तक वो पत्थर वहीँ पड़ा रहा अचानक एक दिन वहां से एक लकड़हारा गुजर रहा था उसके कंधे पर लकड़ियों की गठरी लदी हुई थी। रास्ते में पड़े पत्थर को देखते ही उसने लकड़ियों की गठरी को नीचे रख दिया उसने पत्थर को हटाने की कोशिश की परन्तु पत्थर तो काफ़ी भारा था उसने अपने पूरे ज़ोर से पत्थर को हटाने की कोशिश की परन्तु फिर भी उससे पत्थर हट नहीं रहा था। वो कुछ देर के लिए रुक गया परन्तु कुछ देर बाद उसने अपने पूरे जोश और ताकत के साथ उस पत्थर को एक किनारे पर खिसका दिया। जिस किनारे उसने पत्थर को खिसकाया था वहां पर एक छोटे से पत्थर के नीचे एक थैली रखी हुई थी जब उस लकड़हारे ने उस थैली को खोलकर देखा तो उसमें सोने के सिक्के थे और उसमें राजा का लिखा हुआ एक पत्र था उस पत्र में लिखा था यह सभी सोने के सिक्के इस पत्थर को हटाने वाले को इनाम के रूप में हैं।
सोने के सिक्के पाकर वो लकडहारा बहुत ख़ुश था और वो ख़ुशी -ख़ुशी वहां से चला गया।
मित्रो ईस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है के हम में से ज्यादातर लोग जिन्दगी में आने वाली छोटी -छोटी बाधायों से घबरा जाते हैं और उन्हें दूर करने का प्रयास तक नहीं करते और उस परेशानी का दोष हम दूसरों पर निकालने लगते हैं जैसा के इस कहानी में हुआ दोस्तों मुश्किल कितनी भी बढ़ी क्यों ना हो हमें कभी हार नहीं माननी चाहिए देखना फिर यह बाधाएं कैसे दूर हो जाती हैं और हमारे मार्ग में आने वाली हर मुश्किल या बाधा हमें आगे बढ़ने का अवसर देती हैं।

This Post Has One Comment

आपकी प्रतिक्रिया...

Close Menu