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बहुत समय पहले की बात है यूरोप महाद्वीप के जर्मनी देश में एक पति और पत्नी रहा करते थे। दोनों का एक दूसरे के सिवा और कोई नहीं था। विवाह के कई वर्षों उपरांत भी उनकी कोई संतान नहीं हुई। समय इसी प्रकार से गुजर रहा था कि अचानक एक दिन स्त्री को अपनी कोख में संतान की अनुभूति हुई और गर्भावस्था के दौरान उसको कुछ इस प्रकार महसूस हुआ कि उसको रेपंजेल नामक शाक खानी चाहिए। आसपास वह शाक कहीं भी उपलब्ध नहीं थी। पति पत्नी एक जादूगरनी के बगीचे के समीप ही रहते थे। पत्नी के मन की बात जब पति ने सुनी तो पति ने उससे वादा किया कि वह उसके लिए रेपंजेल नाम की वह शाक साथ लेकर आएगा। बगीचे में चोरी से घुसकर उसने वह शाक अपनी पत्नी के लिए तोड़ी और यह क्रम कई दिनों तक चलता रहा।

एक दिन बगीचे की मालकिन जादूगरनी ने, जिसका नाम डेम गोथेल था, उसे यह चोरी करते हुए देख लिया और जादूगरनी ने पति को बंधक बना लिया। पति जादूगरनी के सामने बहुत गिड़गिड़ाया और अंततः जादूगरनी एक शर्त पर वह शाक उसकी पत्नी के लिए देने के लिए राजी हो गई। शर्त यह थी कि संतान के जन्म के बाद वह उसे जादूगरनी को सौंप देगा। मायूस मन से पति ने उसकी वह बात मान ली और बच्चे के जन्म होते ही उसने जादूगरनी के हाथों अपनी पुत्री को सौंप दिया। जादूगरनी ने अत्यंत मनोयोग से उसकी पुत्री का पालन पोषण किया और उसका नाम उसी शाक के नाम पर रेपंजेल रखा। रेपंजेल एक अत्यंत रूपवती कन्या के रूप में धीरे धीरे विकसित होने लगी। उसके सुनहरे बाल और अद्वितीय रूप की चर्चा आसपास की जगह पर धीमे-धीमे से फैलने लगी।

कन्या के 12 वर्ष के होते ही जादूगरनी डेम गोथेल ने उसको एक ऐसी मीनार में कैद कर दिया, जिसमें ना तो कोई दरवाजा था और ना चढ़ने के लिए ही कोई सीढ़ी। इसमें एक ऊंचे स्थान पर एक कमरा था, जिसमें कि केवल एक खिड़की थी. जादूगरनी अपनी जादुई शक्तियों के माध्यम से छोटी बच्ची तक पहुंचती और हर दिन उससे मिलने के लिए दिन के समय जरुर जाती। इसी प्रकार से दिन बीतने लगे वह बच्ची बड़ी होकर एक अत्यंत रूपवती स्त्री के रूप में विकसित हुई। उसके लंबे घने सुनहरे बाल इतने लंबे हो गए की बाद में जादूगरनी उनके सहारे मीनार पर चढ़कर कमरे में आने और जाने लगी। ऐसा करते वक्त वह रेपंजेल को पुकारते हुए कहती –

“रेपंजेल अपने बाल गिराओ, ताकि मैं तुम्हारे सुनहरे बालों पर चढ़कर ऊपर आ सकूं।”

समय इसी तरह से गुजरता गया और एक दिन किसी राज्य का राजकुमार घूमते घूमते उसी क्षेत्र में आ गया, जहां पर रेपंजेल उस मीनार में रहती थी। रेपंजेल की आवाज में अद्वितीय मिठास थी, जब वह गाती थी तो जैसे समय ठहर जाता था। एक दिन राजकुमार को टहलते टहलते एक मधुर आवाज़ सुनाई पड़ी। वह आवाज कहां से आ रही है यह जानने के लिए जब राजकुमार मीनार के पास गया तो उसे दिखाई पड़ा कि एक ऊंची मीनार के ऊपर कमरे में एक सुंदर रूपवती स्त्री रहती है। उसकी इस मीठी आवाज को सुनकर राजकुमार उसकी तरफ अत्यंत आकर्षित हुआ और वह अपनी उत्सुकता पर काबू नहीं रख सका। उसने मन में ठान ली कि वह इस बंद मीनार में रहने वाली स्त्री, जिसकी आवाज इतनी मधुर है, के विषय में जान के ही रहेगा। एक दिन जब दिन के समय जादूगरनी रेपंजेल से मिलने के लिए आई तो उसने जादूगरनी को वह शब्द कहते और बालों के जरिए ऊपर चढ़ते हुए देख लिया। राजकुमार ने इसी प्रकार जब रात के समय रेपंजेल को पुकारा तो उसने उसे आने के लिए मीनार के सहारे अपने बालों को लटका दिया। राजकुमार ऊपर जाकर रेपंजेल से मिला।

रेपंजेल और राजकुमार एक दूसरे से प्रेम करने लगे थे। दोनों ने मिलते ही एक-दूसरे को पसंद कर लिया था और वह एक दूसरे के लिए के अंतरंग सहचर बन गए। अतः राजकुमार ने रेपंजेल के सामने विवाह का प्रस्ताव रखा। रेपंजेल इस पर सहमत हुई और दोनों का मिलना जुलना धीमे-धीमे बढ़ने लगा। जादूगरनी डेम गोथेल रोज दिन के समय रेपंजेल को मिलने के लिए आया करती थी। राजकुमार और रेपंजेल ने मिलकर एक योजना बनाई कि राजकुमार द्वारा दिए गए रेशम से रेपंजेल एक सीढ़ी बनायेगी, जिससे कि वह दोनों उस जगह से भाग सकें। रेपंजेल की मूर्खता के कारण जादूगरनी डेम गोथेल को राजकुमार के रेपंजेल के पास आने और उसके गर्भवती हो जाने का पता चल गया। जादूगरनी डेम गोथेल ने रेपंजेल को मीनार से बाहर निकाल दिया और जंगली जानवरों के बीच से जंगल में विचरने को अकेला छोड़ दिया, और वह स्वयं उस मीनार के कमरे में जाकर छुप गयी। राजकुमार के चढ़ने के लिए उसने रेपंजेल के बालों को काटकर उन्हें मीनार से बाहर लटका दिया ताकि राजकुमार ऊपर चढ़ सके और उसे कोई शंका ना हो। जब राजकुमार रेपंजेल से मिलने के लिए उस रात आया तो रेपंजेल की जगह जादूगरनी को पाकर वह भयभीत हो गया और मीनार से कूद पड़ा जिससे कि नीचे पड़े काटों से उसकी दोनों आंखों की रोशनी चली गई। जब राजकुमार नीचे गिरने लगा उसके हाथ में रेपंजेल के कटे हुए बाल आ गए और रेपंजेल की लंबी बालों की लट राजकुमार के साथ ही नीचे गिर गई। नीचे उतर पाने का कोई अन्य तरीका न होने के कारण जादूगरनी डेम गोथेल उस मीनार में फंस गई और अंततः मृत्यु को प्राप्त हुई।

अपनी आंखों और अपनी प्रेमिका को खो देने के बाद राजकुमार निराश होकर अंधा होकर जगह-जगह भटकने लगा। कई महीनों तक इस प्रकार भटकने के पश्चात वह उस क्षेत्र में जा पहुंचा जहां पर रेपंजेल बस चुकी थी। उधर रेपंजेल ने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया; जिनमें एक बेटी और एक बेटा हुआ। इसी तरह कुछ समय तक एक दूसरे के विछोह में रहने के बाद अंततः दोनों उसी राज्य में एक स्थान पर मिले, और उनके मिलन से चमत्कार स्वरुप राजकुमार की दृष्टि वापस आ गई और रेपंजेल के लंबे सुनहरे बाल उसको वापस मिल गए और दोनों हंसी खुशी अपना जीवन साथ में बिताने लगे।

शिक्षा – इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि बुरे का अंत बुरा ही होता है. और विश्वास के सहारे एक दिन दुनिया में सब कुछ पाया जा सकता है. जिस तरह जादूगरनी गलत नियत से रेपंजेल को इतने साल कैद में रखती है, एक दिन उसे इसका दंड मिला और वह मारी गई. रेपंजेल ने बचपन से उम्मीद लगाई हुई थी, कि उसे एक दिन कोई बचने आएगा उसकी खुशयाली भरी ज़िन्दगी होगी, एक दिन उसके इस विश्वास को भगवान् ने पूरा कर दिया.

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