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भोपाल में साध्वी प्रज्ञा सिंह ने कहा कि जिस दिन मैं कारावास में गई थी, उस दिन से सूतक शुरू हो गया था और जब करकरे को आतंकवादियों ने मारा उस दिन सूतक खत्म हुआ। मेरे शाप के कारण ही करकरे का सर्वनाश हुआ है।
साध्वी प्रज्ञा सिंह के ये उद्गार मन को असीम वेदना देने वाले हैं। हेमंत करकरे शूरवीर की तरह मृत्यु से लडे। मुंबई में दहशतवादियों से लडते हुए वे शहीद हुए। प्रत्येक भारतीय को उनपर गर्व है। वे बडे अधिकारी थे। स्वयं केबिन में बैठकर वे दूसरों को भी लडने के लिए भेज सकते थे। परंतु वे सेनापति के रूप में खुद युद्ध में उतरे। उन्होंने वीरों की परम्परा का जतन किया। उनकी शहादत का अपमान करने का अधिकार साध्वी प्रज्ञा सिंह को कतई नहीं है।
भगवा वस्त्र धारण करने के बाद व्यक्ति को राग-द्वेष, मान-अपमान, सुख-दुख से विरक्त होना पडता है। तुकाराम महाराज कहते हैं “जिसका मन उसके वश में नहीं है, उसे भगवा वस्त्र धारण नहीं करना चाहिए।” तुकाराम महाराज को भी बहुत प्रताडित किया गया था। भारत में ऐसे साधु-संतों की परम्परा रही है जिनको समाज ने छला है, प्रताडित किया है। परंतु उन्होंने कभी किसी को श्राप नहीं दिया। सभी से प्रेम पूर्वक व्यवहार किया। भगवा वस्त्र धारण करनेवाली साध्वी प्रज्ञा सिंह को भी इसी का पालन करना चाहिए। भगवे वस्त्र धारण न करने वाले हम सामान्य जनों को यह बताना पड रहा है, यह अत्यंत दुखद है।

This Post Has 5 Comments

  1. मैं योगेशजी की बात का पूरी तरह समर्थन करता हूँ। संविधान के अनुच्छेद 21 में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मूल अधिकार हमें प्राप्त है। इसलिए साध्वी जी को अपनी भावनाएं व्यक्त करने का पूरा अधिकार है, वही अधिकार पतंगे जी को भी है। इसमें विवाद का कोई मुद्दा है, ऐसा मुझे नहीं लगता।

  2. Rameshji, its an utter nonsense on your part not taking a stand on pragyaji. Even if karkare shed his blood agst the terror and martyred his life, thou that is admirable, but any sin committed by him, that should also be highlighted and condemned with the strongest word. Do you know what physical trouma sadhvi pragya faced in the Jail. Without doing anything, she was faced with criminal offences. She was not given water for days, beaten for hrs from back and front with belt and stick, not given food, not make him sleep the whole night, her vital organs lungs are damaged, and you are saying when someone wears a bhagwa wastra, then even if the other person has given pain, that should be cheered and not to speak any I’ll words agst that person. Patangeji if that pain you had faced it for one month only, you would have forgotten all the ideology and committed suicide. So don’t pass your stupid judgement. Go do one thing, hit your own finger for 10 days for 15 min. Daily and see what happens to your body. You will forget everything and will remember only the pain. See what physical and mental plight she must have undergone not for days but for 8 years. Now also her case is not closed. Sir shame on you. Pragya had told all this was done on karkares order, so why she will not yell on karkare. You yourself is a saffronist at heart, your guru is BHAGWA DHWAJ, but in your column and books you are using harsh words on anti Hindu gangs. You must not do this then and bless such narcotic and anti terrorist like digvijay, Sonia is doing. When such physical pain you were being accustomed with, you would have broken. Its very easy to say the words from your mouth, but if you were in her condition, I don’t know what you had done. Its utter shameful. I strongly oppose your thoughts and you must pray to lord rama for such malicious act you uttered it agst pragya thakur. Our great saints had given shraap to the dacoits and person, see the chanakya gave shraap to dhananand that one day his empire will be shattered into pieces and he himself will do these. Go into such history. Who told you wearing bhagwa means only speaking good words and keeping neck down to the ugly persons

  3. भाजपा ने कहा कि यह साध्वी जी का निजी बयान है | ठीक है, दर्द भी तो उनका निजी है | आप उसके भागीदार हो सकते हैं क्या ?

  4. पतंगे साहब,शायद आपने साध्वी प्रज्ञा जी का बयान आपकी अदालत में नहीं देखा सुना।आप कैसे पत्रकार हैं कि आप साध्वी पर हुए प्रताडना से अनभिज्ञ हैं।शायद आप सोलहवीं सदी की विचार धारा से उबर नहीं पाए हैं। जब साध्वी को को गिरफ्तार कर घनघोर यातनाएं दी जा रही थी,जबकि उन्हें कोर्ट में भी प्रस्तुत नहीं किया गया था।क्या उनके साध्वी हो जाने से उनके जीवन जीने के अधिकार समाप्त हो जाते हैं।और ये जो हेमंत करकरे साहब थे ये हिन्दू आतंकवादी शब्द गढकर हिन्दुओं को आजीवन जेल ल यातना भोगने वाले लोगों का समूह बना देने का षडयंत्र रचने के‌
    बराबर के भागीदार थे। संसद भवन पर हमला करने वाले आतंकवादियों में से एकमात्र जीवित पकडे गए आतंकवादी अजमल कसाब के दाहिने हाथ में कलावा बंधा था। उसे मारकर हिंदू आतंकवाद की परिभाषा को सच साबित करना चाहते थे।जनता की गाढी कमाई के टैक्स के पैसों से उस आतंकवादी को जी भर कर बिरयानी खिलाई गई।अब मोदी काल है।अगर साध्वी ने करकरे साहब को श्राप दिया था तो कुछ भी गलत नहीं किया।द्रौपदी ने भी जब अत्यधिक प्रताडना हुई तब दुर्योधन समेत कौरव कुल के सर्वनाश का श्राप दिया था। श्री रामचरित मानस में तुलसी दास जी ने श्री रामचंजी और उनकी सेना के उतरने क

  5. If writer would have gone through such torcher than he would had never written such sentence.

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