चालाक बंदर और बिल्लियाँ

दो बिल्लियाँ थी। एक का नाम था पूसी और दूसरी का नाम था रूसी। दोनों सहेलियाँ थी।
साथ में खेलती घूमती।
लेकिन जानते हो! एक दिन क्या हुआ। उन दोनों को पनीर का एक टुकड़ा मिला, बस फिर क्या था दोनों ने झगड़ना शुरू कर दिया।
तभी वहाँ से एक बंदर जा रहा था। उसने कहा ” अरे! झगड़ो मत मैं तुम्हारी सहायता कर देता हूँ इस झगड़े को सुलझाने में। ”
तब बंदर एक तराजु लाया। उसने दोनों पलड़ो में पनीर को आधा – आधा करके रख दिया। जब एक पलड़ा नीचे होता तो बंदर उसमे से थोड़ा पनीर तोड़ कर खा लेता। इस तरह बार बार पनीर को एक बराबर करने में वो सारा पनीर खा गया।
और पूसी और रूसी उसका मुँह देखती रह गयी। अब उन दोनों को समझ आ गया कि बंदर तो उन्हें मूर्ख / बेवकूफ बना गया।
उन्होंने झगड़ा छोड़ कर फिर से दोस्ती कर ली।
बच्चो ! इस से हमें यह शिक्षा मिलती है कि ” हमें मिल जुल कर प्यार से रहना चाहिए। “

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