हिंदी विवेक : WE WORK FOR A BETTER WORLD...
एक गधे को अपनी भद्दी सी आवाज कतई पसंद न थी। एक दिन जब गधा घास चर रहा था तो उसकी भेंट गीत गुनगुनाते एक टिड्डे से हुई। गधा उसकी आवाज सुनकर मोहित हो गया और पूछ बैठा-‘‘भई टिड्डे ! अपनी इस मधुर आवाज का राज मुझे भी तो बताओ।’’
‘‘ओस की बूंदें।’’ टिड्डा बोला-‘‘जिन्हें मैं रोज सुबह खाता हूं।’’
गधा आखिर गधा ही था। अब उसने और भी जोशो-खरोश से घास खाना शुरू कर दी। खासकर वह सुबह के समय ही घास खाता था, जब वह ओश से भीगी रहती थी। लेकिन उसकी आवाज न बदलनी थी, न ही बदली। हाँ, घास खा-खाकर वह इतना मोटा जरूर हो गया कि किसी काम लायक न रहा।

आपकी प्रतिक्रिया...

Close Menu

विगत 6 वर्षों से देश में हो रहे आमूलाग्र और सशक्त परिवर्तनों के साक्षी होने का भाग्य हमें प्राप्त हुआ है। भ्रष्ट प्रशासन, दुर्लक्षित जनता और असुरक्षित राष्ट्र के रूप में निर्मित देश की प्रतिमा को सिर्फ 6 सालों में एक सामर्थ्यशाली राष्ट्र के रूप में प्रस्तुत करने में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की अभूतपूर्ण भूमिका रही है।

स्वंय के लिए और अपने परिजनों के लिए ग्रंथ का पंजियन करें!
ग्रंथ का मूल्य 500/-
प्रकाशन पूर्व मूल्य 400/- (30 नवम्बर 2019 तक)

पंजियन के लिए कृपया फोटो पर क्लिक करें

%d bloggers like this: