मध्य प्रदेश की सियासत में हलचल क्यों ?

मध्य प्रदेश में सियासी ड्रामा शुरु हो चुका है। सत्ताधारी पार्टी कांग्रेस यह आरोप लगा रही है कि उसके विधायकों को भाजपा द्वारा खरीदने की कोशिश की जा रही है। कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया है कि भाजपा ने कांग्रेस के कुछ विधायकों को ग्रुरुग्राम के एक होटेल में बंधक बना कर रखा गया था। लेकिन कांग्रेस ने सभी को बाहर कर लिया है।

इसके पहले दिग्विजय सिंह ने मीडिया से बात करते हुए आरोप लगाया था कि मध्यप्रदेश कांग्रेस के विधायकों को खरीदने की कोशिश की जा रही है और हर विधायक को 25 करोड़ रुपये देने की भी बात सामने आयी थी। हालांकि उस समय कांग्रेस के नेताओ ने भी दो मत नजर आया, कांग्रेस के युवा नेता ज्योतिरादित्य सिंद्धिया ने कहा था कि उनके पास ऐसी कोई भी खबर नही है।

लेकिन अब एक बार फिर मध्य प्रदेश की सियासत फिर से गर्मा चुकी है। कांग्रेस पार्टी ने 8 विधायकों को गुरुग्राम के एक होटेल में बंधक बनाने का बीजेपी पर आरोप लगाया है। इन विधायकों में 4 कांग्रेस पार्टी के जबकि 2 बहुजन समाज पार्टी और एक समाजवादी पार्टी का और एक निर्दलीय विधायक है।

विधायकों के होटेल में होने की खबर के बाद से कमलनाथ सरकार परेशानी में आ चुकी थी। उसे डर था कि कहीं उसकी सरकार ना गिर जाए। जिसके बाद कांग्रेस ने तुरंत गुरुग्राम से सभी नेताओ को बाहर निकाल लिया, लेकिन जिस तरह के हालात बने हुए है, उससे कांग्रेस के लिए यह चिंता का विषय बना रहेगा और कांग्रेस को सत्ता जाने का डर हमेशा लगा रहेगा।

कांग्रेस नेता जयवर्धन सिंह ने बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा कि मध्यप्रदेश की हार बीजेपी पचा नही पा रही है। इसलिए लगातार विधायकों को खरीदने की कोशिश में लगी हुई है लेकिन हम उसे कामयाब होने नहीं देगें। हमारा कोई भी विधायक बिकने वाला नही है।

आप को बता दें कि मध्य प्रदेश में कुल 230 विधायक है और हालिया चुनाव के बाद से कांग्रेस के खाते में कुल 114 विधायक है जबकि बीजेपी के पास 107 विधायक है। बाकी विधायक छोटे दलों के पास है यानी बीजेपी सरकार बनाने से थोड़ी ही दूर है। अगर निर्दलीय और छोटे दलों की पार्टियां बीजेपी को सपोर्ट करती है तो मध्य प्रदेश में पासा पटल सकता है। मध्य प्रदेश में पिछले तीन बार से बीजेपी सत्ता में थी लेकिन इस बार एमपी की जनता ने कांग्रेस पर विश्वास जताया है। जिसके बाद से कमलनाथ ने सत्ता संभाली है, हालांकि सत्ता में आने के बाद से कमलनाथ कई बार अपने फैसले को लेकर विवादों में आ चुके है।

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