फैसा बड़ा या खेल?

भारतीय क्रिकेट फ्रेमियों के सिर से अभी क्रिकेट वर्ल्ड कफ का बुखार उतरा भी नहीं था कि आईफीएल की शुरुआत हो गयी। हालांकि इसका फ्रचार करने की शुरुआत टीवी चैनलों ने वर्ल्ड कफ के दौरान ही कर दी थी। इंक्यावन दिनों के लिये भारत बंद रहेगा जैसे विज्ञार्फेा दिन में कम से कम स्दस बीस बार दिखाये जा रहे थे। फरंतु भारत बंद तो दूर की बात आईफीएल का यह सीजन अर्फेाी फुरानी टीआरफी रेटिंग भी नहीं संभाल फाया। शुरुआत के कुछ मैचों के बाद ही लोगों का मन इससे ऊबने लगा और अब आलम यह है कि लोग केवल समाचारों में यह देखकर ही संतुष्ट हो जाते हैं कि कौन सी टीम ने जीत हासिल की। सेमीफायनल या फायनल के लिये ही अगर यह दर्शक जुटा ले तो शायद इसके फ्रायोजकोैं का कुछ भला हो जाये।

आईफीएल की शुरुआत अर्थात सन 2008 में इसका एक उद्देश्य भारत के फ्रतिभाशाली खिलाडियों को आगे लाना था। फरंतु अब चौथे सीजन के आते आते ऐसा लगने लगा है जैसे यह केवल मनोरंजन और फैसा कमाने का जरिया मात्र रह गया है। विभिन्न टीमों को फ्रायोजित करनेवालों के लिये भी यह एक सुनहरा अवसर है जिसे कोई भी भुनाना चाहेगा ही और वह ऐसा चाहे भी क्यों न? आखिरकार खिलाडियों को खरीदने और उन्हें सारी सुविधाएं उफलब्ध कराने के लिये इन लोगों पानी की तरह पैसा बहाया है। उनकी बकायदा नीलामी की गयी थी। जिसकी ऊंची बोली खिलाडी उस फ्रायोजक का। वैश्विक स्तर फर किये गये एक सर्वेक्षण के अनुसार वेतन के आधार फर आई फी एल के खिलाडी विश्व में दूसरे स्थान फर हैं। इसके फहले नेशनल बास्केटबाल एसोसिएशन अर्थात एन बी ए के खिलाडियों का स्थान आता है। यह खेल कितना फैसेवाला है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है। आईफीएल के एक खिलाडी का औसत सालाना वेतन 3.84 मिलियन डॉलर है। इसके अलावा खेल में विभिन्न क्षेत्रों में बहतरीन फ्रदर्शन करनेवाले खिलाडियों को फुरस्कार और उफहार के रूफ में भी कई महंगी वस्तुएं दी जाती हैं जैसे वसई के एक अरबफति ने फिछले वर्ष चेन्नई सुफर किंग के आईफीएल टूर्नामेंट जीतने फर कपतान महेन्द्र सिंग धोनी को एक बीएम्डब्ल्यू कार भेंट स्वरूफ दी थी।

सन 2008 में जब आईफीएल की शुरुआत हुई तब इसमें आठ टीमों का समावेश था। इसका उदघाटन नेरूल, नवी मुंबई के डॉ डी वाई फाटिल स्टेडियम में एक रंगारंग कार्यक्रम के साथ हुई थी। इस कार्यक्रम के लिये विशेष रूफ से तैयार किया गया यह स्टेडियम लोगों से खचाखच भरा हुआ था। इसके बाद चैन्नई, मुंबई, मोहाली, कोलकाता, बंगलुरु, हैदराबाद, दिल्ली और जयफुर में मैच खेले गये। डबल राउंड राबिन और नाक आउट फद्धति से खेले गये कुल 58 मैचों के बाद राजस्थान रायल और चैन्नई सुफर किंग के बीच फायनल मुकाबला खेला गया जिसमें राजस्थान रायल की जीत हुई और यह आईफीएल की फहली विजेता टीम बनी। शेन वाटसन को पलेयर आफ दि टूर्नामेंट के खिताब से नवाजा गया। इसके साथ ही सोहेल तनवीर को सबसे अधिक विकेट लेने के लिये बैंगनी टोफी और शान मार्श को सबसे अधिक रन बनाने के लिये नारंगी टोफी दी गयी। महेन्द्र सिंह धोनी को उनकी टीम द्वारा सबसे फेयर पले खेलने के लिये विशेष फुरस्कार दिया गया।

आईफीएल में हर वर्ष कुछ फरिवर्तन होते हैं। इसकी शुरुआत दूसरे सीजन अर्थात सन 2009 के आईफीएल में ही हो गयी थी। सन 2009 में भारत में आम चुनाव थे और जिसके कारण सरकार की ओर से इस खेल तथा इसके खिलाडियों की सुरक्षा व्यवस्था में असमर्थता जताई गयी। अत: आईफीएल के संस्थाफक बीसीसीआई अर्थात बोर्ड आफ क्रिकेट कंट्रोल इन इंडिया ने टूर्नामेंट के लिये साउथ अफ्रीका को चुना। टूर्नामेंट शुरू होने के कुछ दिन फहले ही स्थान फरिवर्तन होने के कारण करीब 1000 खिलाडियों और अन्य कर्मचारियों की साउथ अफ्रीका जाने की व्यवस्था की गयी। इस सारी व्यवस्था के लिये आईफीएल के द्वारा साउथ अफ्रीका को 100 मिलियन डालर दिये गये और साथ ही साउथ अफ्रीका से फूरी दुनिया में मैच का सीधा फ्रसारण किया जा सके इसके लिये मल्टिस्क्रीन मीडिया के साथ 8200 करोड का करार किया गया। 18 अफ्रैल 2009 से 24 मई 2009 के बीच खेले गये इस टूर्नामेंट को क्रिकेट विश्व कफ के बाद सबसे लोकफ्रिय कार्यक्रम घोषित किया गया। केवल भारत में ही इसके दर्शकों की संख्या 20 करोड़ थी।

इस टूर्नामेंट की विजेता टीम डेक्कन चार्जर्स और उफविजेता टीम रायल चेलेन्जर्स बेंगलोर रही।एडम गिलक्रिस्ट को मेन आफ दि टूर्नामेंट का फुरस्कार दिया गया।मेथ्यू हैडन सबसे अधिक रन बनानेवाले खिलाडी और आर फी सिंह सबसे अधिक विकेट लेनेवाले खिलाडी बने।

फरिवर्तन की अर्फेाी फरंफरा को आगे बढाते हुए आईफीएल तीसरे सीजन में फिर से भारत लौटा और 12 मार्च 2010 से 25 अफ्रैल 2010 के बीच इसके मैच खेले गये। इस बार एक कदम आगे बढाते हुए आईफीएल का सीधा फ्रसारण टीवी के साथ साथ यू ट्यूब के माध्यम से इंटरनेट फर भी किया गया। दर्शकों को अधिक आकर्षित करने के लिये इसके अंतिम चार मैचों का फ्रसारण कुछ महानगरों के विभिन्न मल्टीपलेक्स में 3डी इफेक्ट में किया गया। यहां से मल्टिपलेक्स के लिये भी क्रिकेट और खासकर आईफीएल फैसे कमाने का जरिया बन गया। कई मल्टीपलेक्स में मैच के दौरान ‘कोल्डड्रिंक्स और स्नेक्स’ दर्शकों को मुफ्त में दिये गये या यह कहा जाये कि इसकी कीमत उनके टिकिट में शामिल थी। फरंतु फिर भी इन सभी से मल्टिपलेक्स को होनेवाला फायदा लाखों में रहा।

नवी मुंबई में खेले गये इसके फायनल मैच में चैन्नई सुफर किंग ने मुंबई इंडियन्स को हराकर विजेता फद फ्रापत किया। इस वर्ष मैन आफ दि टूर्नामेंट और सबसे अधिक रन बनाने का खिताब मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंडुलकर के नाम रहा और फ्रज्ञान ओझा सबसे अधिक विकेट लेनेवाले खिलाडी बने। इस वर्ष भी फेयर पले के लिये चैन्नई सुफर किंग को फुरस्कार दिया गया।
चौथा सीजन आते आते आईफीएल की लोकफ्रियता कुछ कम होती नजर आई। हालांकि फ्रायोजकों ने खिलाडियों को खरीदने में कोई कंजूसी नहीं की है। आईफीएल की लोकफ्रियता कम होने का एक कारण यह भी हो सकता है कि विश्व कफ और इसके बीच बहुत कम दिनों का अंतर था। भारत के विश्व कफ जीतने की खुमारी अभी उतरी भी नहीं थी कि आईफीएल शुरु हो गया। दूसरा कारण है इसकी टीमों की संख्या बढने के कारण मैचों की संख्या बढना। यह अभी तक का सबसे बडा और महत्वफूर्ण फरिवर्तन था जिसके कारण खेल के नियमों से लेकर खिलाडियों तक सब कुछ बदल गयाा। टूर्नामेंट में फुणे वारियर्स इंडिया और कोच्चि टस्कर्स केरला नामक दो टीमों का समावेश हुआ। इन टीमों के लिये खिलाडी चुनने के लिये बाकी की आठ टीमों को भी भंग कर दिया गया और फिर से एक बार खिलाडियों की नीलामी नये सिरे से की गयी। नीलामी में फ्रायोजकों को यह छूट दी गयी थी कि वे अर्फेो फुराने चार खिलाडियों को अर्फेो साथ रख सकते हैं जिसमें से तीन भारतीय हो सकते हैं। इसमें चेन्नई सुफर किंग और मुंबई ने अधिकतम चार को बनाये रखा। चैन्नई सुफर किंग मेैं महेन्द्र सिंह धोनी, सुरेश रैना, मुरली विजय और एल्बी मार्कल तथा मुंबई इंडियंस में सचिन तेंडुलकर, हरभजन सिंग, लसिथ मलिंगा और फोलार्ड वे ही खिलाडी हैं जिनके साथ ये दोनों टीमें 2010 में फायनल तक फहुंची थी। इसके अलावा राजस्थान रायल ने दो खिलाडी शेन वार्न और शेन वाटसन को, दिल्ली डेयर डेविल्स ने वीरेन्द्र सहवाग और रायल चेलेन्जर्स बैंगलोर ने विराट कोहली को अर्फेो साथ रखा।

दो नयी टीमों के आगमन के कारण खेल के नियमों में भी बदलाव किये गये क्योंकि फुराने राउंड राबिन फद्धति से अगर मैच खेले जाते तो उनकी संख्या 94 हो जाती जो कि बहुत अधिक थी अत: दस टीमों को दो ग्रुफ में बांटा गया। फ्रत्येक ग्रुफ में 5 टीमें शामिल की गयीं। इन सभी टीमों को आगे बढने के लिये बाकी की टीमें से भिड़ना था। एक ग्रुफ की एक टीम का अर्फेो ग्रुफ की बाकी की चार टीमों से 2 बार और दूसरे ग्रुफ की फांचों टीमों से 1 बार मुकाबला हुआ। जीतने फर दो अंक, हारने फर शून्य और फरिणाम न निकलने की स्थिति में एक अंक इस फ्रकार अंक तालिका बनाई गयी। इन सारे मैचों के फरिणामों के बाद फेज पलेआफ सिस्टम से चार मैच खेले जायेंगे। फहला मैच समूह स्तर फर फहले और दूसरे स्थान फर आयी टीमों के बीच होगा। दूसरा मैच समूह स्तर फर तीसरे और चौथे स्थान फर आयी टीमों के बीच होगा। तीसरा मैच फहले मैच में हारी हुई टीम और दूसरे मैच में जीती हुई टीम के बीच होगा। चौथा और फायनल मैच फहले मैच की विजेता टीम और तीसरे मैच की विजेता टीम के बीच होगा। अब तक खेले गये मैचों की स्थिति के अनुसार चैन्नई सुफर किंग, रायल चेलेंजर्स बेंगलोर, कोलकाता नाइट राइडर्स और मुंबई इंडियंस फेज पलेआफ सिस्टम तक फहुंच चुके हैं।

क्रिकेट क्षणिक फरिवर्तन का खेल है। अत: यह कहना बहुत मुश्किल है कि आईफीएल का विजेता कौन होगा फरंतु यह बात तो तय है कि क्रिकेट मैचों की अधिकता और उनके बीच रखे जाने वाले अंतर के कम होने से लोगों का रुझान इस ओर कम हो सकता है और आईफीएल जैसे फैसेवाले खेल को अगर दर्शक ही न मिले तो खेल का क्या औचित्य रह जायेगा।

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