21वीं सदी को महिलाओं की सामाजिक और आर्थिक हैसियत में तेजी से वृद्धि की सदी के रूप में देखा जाता रहा है, सो वह पिछले एक दशक में मानव जीवन में आये बदलावों में साफ दिखायी दे रहा है। लेकिन इसके साथ ही बाल विकास के महत्व की अवहेलना भी नहीं की जा सकती है। भारतीय समाज में लड़कों की अपेक्षा लड़कियों के प्रति हमेशा से उपेक्षा का Online furniture stores भाव देखने को मिला है। लेकिन, अब शिक्षा में वृद्धि के साथ इसके प्रति लोगों के नजरिए में तेजी से परिवर्तन भी हुआ है। इसका असर अब केंद्र और राज्य सरकारों की सामाजिक विकास योजनाओं में भी परिलक्षित होता है। वे महिलाओं और बच्चों के सामाजिक, शैक्षिक और आर्थिक उत्थान हेतु तरह-तरह की योजनाएं लागू कर रही हैं। इस मामले में कर्नाटक सरकार द्वारा शुरू की गयी योजनाएं आर कार्यक्रम सहज ही ध्यान आकर्षित करते हैं।
वर्ष 2010 की जनगणना के अनुसार कर्नाटक में प्रति 1000 पुरुषों पर 964 महिलाएं हैं। गरीबी, लड़कियों के प्रति समाज में व्याप्त भेदभाव और कन्या भ्रूण हत्या आदि विभिन्न कारणों से महिला पुरूष अनुपात में sugar free chocolates गिरावट दर्ज की हुई है। देश के दूसरे हिस्सों की तरह कर्नाटक में भी यह एक बड़ी समस्या रही है। लेकिन अखिल भारतीय स्तर पर देखा जाये तो राज्य की स्थिति थोड़ी बेहतर नजर आती है। राज्य सरकार इस बात से परेशान नजर आती है कि समाज में लड़कियों की अपेक्षा लड़कों को ज्यादा तरजीह देने की प्रवृत्ति दिखायी दे रही है। इससे पार पाने और बालिकाओं के सशक्तिकरण के द्वारा उनकी अहमियत कायम करने के बाबत राज्य सरकार ने स्वास्थ्य, शिक्षा और विविध आर्थिक Online furniture stores क्षेत्रों में उनको विशेष अवसर उपलब्ध कराने की शुरुआत की है। उदाहरण के लिए गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों की बालिकाओं के लिए एक अप्रैल 2006 से ’भाग्यलक्ष्मी’ योजना आरंभ की है। इसके अंतर्गत इन परिवारों की लड़कियों को कक्षा 10 तक विशेष सुविधाएं प्रदान की जाती हैं। इन्हें छात्रवृत्ति और शैक्षणिक कर्ज भी प्रदान किया जाता है। किसी एक परिवार की दो बालिकाओं के नाम एक निश्चित धनराशि जमा की जाती है। उसके 18 साल की उम्र में पहुंचने पर ब्याज समेत उसे पूरी राशि मुहैया कर दी जाती है।
राज्य सरकार ने स्वास्थ्य और परिवार कल्याण के मद्देनजर अन्य ढेर सारी योजनाएं भी चला रखी हैं। जैसे कि प्रसूति अरैके स्कीम, मदिलू स्कीम, थायी भाग्य स्कीम, भाग्यलक्षी स्कीम, आरोग्य कवच स्कीम, वाजपेयी आरोग्यश्री स्कीम, सुवर्णा आरोग्य चैतन्य, मोबाइल मेडिकल यूनिट, आरोग्य भंडु स्कीम आदि।
इन सरकारी योजनाओं का मकसद गरीबी रेखा के नीचे जीवन-यापन कर रही महिलाओं की सेहत, मेडिकल जांच और शिक्षा संबंधी सुविधाएं मुहैया कराना है। इसमें इस बात का खयाल रखा गया है कि सुविधाएं समय और प्रभावी तरीके से उपलब्ध हों। जैसे कि आरोग्य कवच स्कीम के तहत आपातकालीन नंबर 108 पर कॉल करने पर मेडिकल, पुलिस या फिर अग्निशमन जैसी कोई भी सहायता तुरंत उपलब्ध होगी। सुविधा बिलकुल मुफ्त होगी।
Online furniture stores ऐसी भी योजना है जिसमें सरकारी और निजी दोनों क्षेत्र के सहयोग से नागरिक सुविधाएं प्रदान की जाती हैं। थायी भाग्य स्कीम ऐसी ही एक स्कीम है जिसमें गरीबी रेखा के नीचे रहनेवाली माताओं को प्रदत्त सामान्य और सिजेरियन स्वास्थ्य सेवा में सुधार के लिए प्राइवेट नर्सिंग होम के साथ गठबंधन किया गया है।
बालविकास योजना के अंतर्गत सार्वजनिक और निजी साझेदारी की मिसाल देखने को मिलती है। सरकारी और निजी स्कूलों के बच्चों को समान रूप सरकारी और निजी अस्पतालों में मेडिकल चेक-अप और सर्जरी की नि:शुल्क सुविधा प्रदान की जा रही है।
राज्य के दूर-दराज के हिस्सों और ऐसे इलाकों में जहां आवागमन की पर्याप्त सुविधा नहीं है, वहां प्राथमिक चिकित्सा प्रदान करने के लिए मोबाइल मेडिकल यूनिट तैयार की गयी है। यह पब्लिक प्राइवेट सहयोग का एक अन्य उदाहरण है। इसके अलावा पब्लिक और प्राइवेट सहयोगवाली sugar free chocolates एक अन्य स्कीम है: आरोग्य बंधु स्कीम। इसके अंतर्गत जिन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर जरूरी स्टाफ नहीं होते, वहां पर इस स्कीम के अंतर्गत स्वास्थ्य सेवा प्रदान की जाती है।
स्वास्थ्य सेवा कारगर हो और जरूरतमंदों तक प्रभावशाली ढंग से पहुंचे, राज्य सरकार ने उसका पूरा ध्यान रखने की कोशिश की है। इसी क्रम में राज्य के कुल 2,258 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रो में से 988 को 24 घंटे स्वास्थ्य सेवा प्रदाता केंद्र के रूप में तब्दील कर दिया गया है। इसी तरह 326 कम्युनिटी केंद्रों में से 150 केंद्रों पर चौबीस घंटे स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध करायी जाने लगी है।
स्वास्थ्य केंद्रों पर Online furniture stores डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए 2010-11 के दौरान 562 डाक्टरों की नियुक्ति की गयी। इसके अलावा एनआरएचएम स्कीम के अंतर्गत ठेका आधार पर निम्न स्टाफों की नियुक्ति की गयी है:-
एमबीबीएस डाक्टर 44
विशेषज्ञ 64
आयुष डाक्टर 578
स्टाफ नर्स 3,752
एएनएम 1,014
लैब टेक्निशियन 106
इस तरह महिला सशक्तिकरण और बाल विकास कार्यक्रमों में कर्नाटक एक अगुवा राज्य बन गया है।



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