बढ़ती महंगाई से संकट

आने वाले दिनों में मुद्रा का संकट गहरा होने वाला है। यूरोप के ग्रीस जैसे ही इटली और स्पेन पर भी आर्थिक संकट गहराने का खतरा बढ़ता जा रहा है। ग्रीस की आर्थिक संप्रभुता अब खतरे में है। यूरोपीय बैंक उसे बचाने की कोशिश कर रहे हैं। परंतु, ग्रीस के नए बाँड्स खरीदने के लिए कोई तैयार नहीं है। ग्रीस के सकल राष्ट्रीय उत्पाद (जीडीपी) कई फीसदी उस पर कर्ज चढ़ गया है।
ब्रुसेल्स में हुई 17 देशों की मंत्रीस्तरीय बैठक में ग्रीस को दूसरा प्रोत्साहन पैकेज देने पर सहमति नहीं बनी। इसी समय इटली व स्पेन संकट में होने की खबरें आईं। इन देशों की अर्थव्यवस्थाएं यूरोप में फ्रांस और जर्मनी के बाद दूसरी और तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्थाएं मानी जाती हैं। ऐसा लगता है कि यूरोप का यह संकट जल्दी खत्म नहीं होने वाला है। बाँडधारकों का ऋण चुकाने के लिए और नए बाँड्स जारी किए जाने वाले हैं। लेकिन इससे संकट दूर होगा ऐसा नहीं लगता।

ग्रीस, इटली और स्पेन का दुर्भाग्य आज उनके दरवाजे खटखटा रहे हैं। मूडीज ने जुलाई में आयरलैण्ड के ऋण को कौडीमोल की श्रेणी दी है। यदि ऋण देने वाले देश अपने ऋण में कुछ कटौती कर दें तो उसका हल निकल सकता है। ऋण की पुनर्रचना अनिवार्य हो गई है।

यूरोप के इस संकट का असर भारत पर होने की संभावना नहीं दिखाई देती। भारत की नियति इन देशों से ज्यादा जुड़ी नहीं है। फिर भी, भारत के विश्लेषक कुछ ज्यादा ही चिंता दिखा रहे हैं। भारत का कामकाज अब लैटिन अमेरिका, अफ्रीका और दक्षिण‡पूर्व देशों में बढ़ रहा है। भारत का वित्तीय घाटा अब 5 फीसदी से भी कम है। सौभाग्य से खेती की स्थिति में सुधार है। इस साल अब तक अच्छी बरसात हुई है और आने वाले दिनों के लिए भी अच्छे संकेत हैं। औद्योगिक उत्पादन में कुछ गिरावट जरूर है। फिर भी ज् ाून 11 की तिमाही के बिक्री और मुनाफे के आंकडें संतोषजनक हैं।

भारत की एकमात्र चिंता है बढ़ती महंगाई पर किस तरह काबू पाया जाय? अनाज की स्थिति च्छी होने के बावजूद वस्तुओं के दाम कम नहीं हो रहे हैं। आज भी महंगाई नौ फीसदी से कम नहीं है। रिजर्व बैंक हर छह हफते बाद रेपो और रिवर्स रेपो पाव फीसदी बढ़ा रहा है। संभव है आने वाले दिनों में यह और बढ़ाया जाए। (दो बरस पहले रेपो दर 9% की उंचाई पर पहुंची थी। बाद में वह 4% पर लाई गई थी।) लेकिन ये मौद्रिक उपाय महंगाई कम करने में सफल नहीं हुए।

बढ़ते ब्याज दरों से उद्योग क्षेत्र संकट में है। लघु और मध्यम उद्योग परेशान हो रहे हैं। सभी बैंकों ने अपने अधिकतम और मूल दर बढ़ाए हैं। ये दर यदि और बढ़ाए जाएंगे तो बैंकों के अनार्जित कर्जों में वृध्दि होगी। वह फिर दुहराया गया तो बैंकों के मुनाफे में कमी आएगी। इसलिए रिजर्व बैंक को अपने निर्णयों में बहुत सतर्कता बरतनी होगी। महंगाई की वजह से लोहा, लौह‡अयस्क, सीमेंट, जिंक महंगे हो रहे हैं। उसका नतीजा महंगाई बढ़ने में होगा। फलस्वरूप, उद्योगों को अपने उत्पादों के दाम बढ़ाने पड़ेंगे। कारों की कीमतें बढ़ रही हैं। सस्ते आवास के सपने अधूरे रह जाएंगे। लेकिन टाटा कम्पनी इस बारे में गंभीरता से सोच रही है।

टाटा समूह ने देश के 30 शहरों का सर्वेक्षण कर सस्ते आवास की एक योजना बनाई है। किसी के पास यदि उसकी अपनी जमीन हो तो उस पर 20 वर्ग मीटर का आवास 32 हजार रुपयों में बना देने की उसकी योजना है। यह परियोजना देश के 30 शहरों में पहले प्रायोगिक रूप से लागू की जाएगी। 2001 की जनगणना के अनुसार देश के ग्रामीण भागों में 184 करोड़ घरों की कमी है। यह आंकड़ा अब दस साल में दो गुना हो गया है। जब तक सरकार बड़ी रकम आवास योजना में नहीं लगाएगी तब तक समस्या बनी रहेगी।

मंडियों की हालत भी अच्छी नहीं है। दस ग्राम सोने की कीमत 23000 रु के करीब पहुंच गई है। चांदी में गिरावट देखी जा रही है। भारत की मंडी पर लंदन मेटल एक्सचेंज का प्रभाव होने से भाव और बढ़ सकते हैं। अनाज बाजार भी ऊंचे स्तर पर है। गेहूं की रिकार्ड फसल होने पर भी भाव नहीं गिरे हैं।

शेयर बाजार में भी कोई दिलचस्पी नहीं रही है। जून 11 की तिमाही के कई कम्पनियों के नतीजे अच्छे आने के बावजूद निवेशक उनकी ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। कुछ कम्पनियों के बिक्री और मुनाफे के आंकडें नीचे दिए गए हैं। जून 10 की तिमाही की तुलना में बिक्री या करोत्तर मुनाफ कितनी फीसदी बढ़ा है यह कोष्टक में दिया गया है।

कम्पनी                                                   बिक्री (%)                                     मुनाफा (%)
इंफोसिस                                                  7485 (12)                                   1722 (16)
एस्सार ऑयल                                         16478 (37)                                   469 (22)
बजाज फाइनेंस                                                 –                                               – (04)
उकाल फयूएल                                               ‡                                                  ‡ (56)
बिलवोअर                                                      ‡                                                    – (13)
सिंटेक्स                                                         ‡                                                    ‡ (19)
शांति गियर्स                                                  ‡                                                   ‡ (18)
इंडुसिंड बैंक                                                   ‡                                                     ‡ (52)
टीसीएस                                                     10797 (13)                                       ‡ (19)
वीएसटी                                                      146 (15)                                         34 (89)
डेवलपमेंट बैंक                                             ‡                                                           ‡ (999)
साउथ इंडियन बैंक                                      ‡                                                           ‡ (52)
एचडीएफसी                                                       ‡                                                      ‡ (22)
बजाज आटो                                               ‡                                                               ‡ (21)

बड़े बैंकों के और टाटा स्टील, हिण्डाल्को जैसी कम्पनियों के नतीजे आने वाले हैं, लेकिन वे अच्छे रहने की उम्मीद है। इन कम्पनियों का 2011‡12 का कारोबार अच्छा रहेगा। फिर भी उन्हें कच्चे माल की मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। 2009 में ब्रेंट क्रूड़ की कीमत एक बैरल के लिए 35 डॉलर थी। अब वह 105 डॉलर तक बढ़ गई है। लीबिया, पश्चिम एशियाई देश, मिस्र में जनता का आंदोलन चल रहा है। इससे पेट्रोल की कीमतें बढ़ने वाली हैं। आस्ट्रेलिया में बारिश के कारण कोयले के परिवहन पर विपरीत असर पड़ा है। रबड़ की कीमत पिछले दो साल में 64 फीसदी बढ़ी है। कोयला 36% महंगा हो गया है। लौह अयस्क 27% महंगा हुआ है। एल्यूमीनियम की कीमतें भी 16% से बढ़ गई है।

अगर इस पर काबू नहीं पाया गया तो ग्राहकों को अधिक दाम चुकाने पड़े्रगे। कम्पनियों के मुनाफे में इस साल दो प्रतिशत की कमी आने की संभावना है। महंगाई रोकने के लिए सरकार को करों में रियायत देनी होगी। पिछले महीने डीजल, केरोसीन, रसोई गैस के दाम बढ़ाने के बाद सरकार के पास सीम्‡शुल्क और उत्पाद‡शुल्क में कटौती करने के सिवा और कोई चारा नहीं था। राज्य सरकारों ने अपने मूल्यवर्धित कर (वैट) घटा कर ग्राहकों को राहत दिलाने की कोशिश की। लेकिन इससे राजस्व में कमी आएगी और वित्तीय टूट बढ़ेगी।

इन सारे संकटों का सरकार और लोग कैसे झेल पाएंगे इस पर आने वाले दिनों की मुद्रा और मंडी की स्थिति निर्भर करेगी। फिर भी जापान, यूरोपीय देश और अमेरिका जैसे देशों की तुलना में भारत की स्थिति मजबूत है। अर्थव्यवस्था अगले साल भी 85% से बढ़ती जाएगी। लोगों की आमदनी बढ़ेगी। कम से कम मुश्किलें उन्हें झेलनी पड़ेगी।

आपकी प्रतिक्रिया...