मेहंदी रचे तन मन में

मेहंदी पूरी तरह से प्राकृतिक है इसलिए इसका दुष्परिणाम सहसा दिखाई नहीं देता। इसी वजह से इसे पूरी तरह सुरक्षित माना जाता है।

मंगल कार्यों में इसका उपयोग किया जाता है। मेहंदी शब्द संस्कृत के ‘मेन्दी’ से निर्माण हुआ है। बहुत पहले मेहंदी का उपयोग केवल औषधि के रूप में किया जाता था। हल्दी और मेंहंदी के उपयोग का वर्णन हमारे वैदिक धार्मिक ग्रंथों में भी किया गया है। यह वैदिक प्रथा का प्रतिनिधित्व करता है इसलिए इसका महत्व है। शुरूआत में मेहंदी केवल दक्षिण एशिया में लोकप्रिय थी पर इन पंद्रह बीस सालों में मेहंदी लगाना फैशन सा बन चुका है। लड़कियों और महिलाओं में इसका काफी क्रेज है। मेहंदी का इस्तेमाल मात्र शादी‡ब्याह के अवसरों पर ही नहीं होता बल्कि हर त्यौहार में इसे लगाने का प्रचलन बढ़ता जा रहा है और आज महिलाओं की पहली पसंद मेंहदी हो गयी है।

मेहंदी की डिजाइन कई प्रकार की होती हैं। उसकी शैली के आधार पर उसे अरेबियन बॉम्बेकट, राजस्थान और मारवाड़ी इन तीन प्रकारों में बांटा जाता है। हर डिजाइन की अपनी खास विशेषता होती है।

1. अरेबियन- इसमें आउटलाइन मोटा रहता है। डिजाइन भी बड़े आकार का होता है। डिजाइन के अंदर भी सुनहरा या चंदेरी रंग भरा जाता है।

2. राजस्थान- इसका डिजाइन बहुत नाजुक और बारीक होती है। इसमें खाली जगह बहुत कम रहती है। लगाने के बाद ये डिजाइन बहुत खूबसूररत लगते हैं।

3. बॉम्बेकट- इसमें आउटलाइन मोटी और अंदर की डिजाइन बारीक होती है।

4. मारवाड़ी-इसमें अरेबियन, राजस्थानी और बॉम्बेकट इन तीनों प्रकारों का सुयोग्य उपयोग होता है जो कि हाथों पर लगाने के बाद बहुत सुंदर लगता है।

मेहंदी को हिना भी कहते हैं। हिना नामक पौंधे/झाड़ी की पत्तियों को सूखाकर-पीसकर उसका पेस्ट बनाया जाता है। इस पेस्ट को हाथों, पैरों और बाजुओं पर लगाया जाता है। कुछ घंटों तक लगाए रखने या रचाने के बाद उसका रंग लाल-या मैरून रंग उभर आता है। चुनरी, बिंदिया, सिंदूर, चूड़ियों की तरह मेंहदी को भी सुहाग की खास निशानी माना जाता है। शादी-विवाह में मेहंदी की एक खास रस्म भी होती है जिसमें दुल्हन के होने वाले ससुराल से उसके लिए शगुन की मेहंदी आती है। मेहंदी को लेकर यह भी मान्यता है कि इसे लगाने से पति-पत्नी का रिश्ता मजबूत होता है। इसलिए दुल्हन अपने होने वाले पति का नाम बड़े शौक से लिखवाती है। माना यह भी जाता है कि अगर मेहंदी का रंग बहुत गहरा होता है तो दुल्हन को उसके ससुराल वालों और पति से ज्यादा प्यार मिलता है। इसी कारण दुल्हन के हाथों पर मेहंदी का रंग गहरा और सुंदर करने का हर प्रयास किया जाता है। मेहंदी पर लौंग की भांप और नींबू‡ शक्कर के रस को दो तीन बार लगाया जाता है। मेहंदी का रंग लगभग सप्ताह भर सुर्ख रहता है। अगर शैम्पू या साबुन का कम इस्तेमाल किया जाए तो इसका रंग पंद्रह दिनों तक बरकरार रहता है।

मेहंदी सौंदर्य का प्राकृतिक स्त्रोत हैं जिसके द्वारा बनाए गए खूबसूरत डिजाइन हमारे शृंगार में चार चांद लगाते हैं। अपनी सुंदरता को बढ़ाने के लिए मेंहंदी अब सिर्फ हथेली पर ही नहीं बाजू, पीठ और पैरों में भी लगाई जाती है। आज के बदलते दौर में पारंपरिक मेहंदी ने भी थोड़ा रूप बदला है और इसकी जगह मार्डन डिजाइन मेंहदी और ज्वेल्ड मेंहदी का प्रचलन बढ़ गया है।

‘ज्वेल्ड मेहंदी’ यह ज्वेलरी और मेहंदी दो शब्दों से मिलकर बना है। अगर आप अपने हाथों पर एक ही मेहंदी की डिजाइन बनवा-बनवाकर बोर हो गई हों तो ज्वेल्ड मेहंदी को आजमा सकती हैं। इसे किसी विशेष पार्टी या शादी के मौके पर बनवाया जा सकता है। इसमें मेहंदी के साथ क्रिस्टल, स्वोरस्की नग, फर मेंहदी, स्पार्कल कलर्स, सितारे मोती, जर्कन, स्टाड, कुंदन, चांदी व सोना, वगैरह इस्तेमाल किया जाता है। यह देखने में बेहद ही खूबसूरत और आकर्षक लगती है।

ज्वेल्ड मेहंदी में आर्टिस्ट की क्रिएटिविटी है जरूरी-

ज्वेल्ड मेहंदी लगाने मेेंहंदी आर्टिस्ट की क्रिएटिविटी अच्छी होनी चाहिए। जितना अच्छा उसका दिमाग चलेगा उतना ही, अच्छा आपके हाथ पर डिजाइन उभरेगा। ज्वेल्ड मेहंदी लगाने से पहले आर्टिस्ट को डिजाइन सोचना पड़ता है जिससे चित्र अच्छी तरह उभरकर आ सके। ज्वेल्ड मेहंदी ऐसी होनी चाहिए जिसे देखकर लगे कि आपने वाकई ज्वेलरी पहनी है। ज्वेल मेहंदी के लोकप्रिय होने की वजह इसका सिंपल मेहंदी से ज्यादा स्टाइलिश होना है। आप इसे हर ड्रेस से मैच करवाकर लगवा सकती हैं। ज्वेल्ड मेंहदी में ढेरों डिजाइन उपलब्ध है जिन्हें आप बनवा सकती हैं। इसके अलावा आप फूल, मोर, पत्तियां, ट्राइबल कराची या अफगानी आदि के डिजाइन बनवा सकती हैं‡ चाहें तो अपना मनपसंद कैरेक्टर भी मेहंदी की मदद से उकेर सकती हैं।

डिजाइन बनाने से पहले मेहंदी का तेल लगा ले, जब मेहंदी सूख जाए तो हाथ को अच्छी तरह धोकर सुखा लें। अगर आपने अपने हाथों पर मेंहदी से मोर पंख बनाया तो फिर से मोर के पंख बना दे और स्वरोक्की से उसका बाकी हिस्सा डिजाइन कर दें। ज्वेल्ड मेहंदी लगाते समय कुछ सावधानियां अवश्य बरतें जैसे-ज्वेल्स को मेहंदी पर अच्छी तरह चिपकाएं नहीं तो हाथ के ऊपर उठाते ही सारी ज्वेलरी हट जाएगी। इसके अलावा स्टिकर ज्वेलरी का भी प्रयोग किया जा सकता है, इसे गोंद से चिपकाया जाता है।

दरअसल ज्वेल मेंहदी कोई नया ट्रेंड नहीं है। पुराने जमाने में महिलाएं कई रंगों से हाथों को सजाती थीं। इसी आर्ट को माडर्न रूप में ज्वेल्स मेहंदी कहा जाता है। अब माडर्न कल्चर में इसमें कुछ बदलाव आ गया है।

करवा चौथ और इसके बाद आने वाले त्यौहारों में अगर आप मेहंदी लगवाती हैं तो इस बार का ट्रेंड ज्वेल मेंहदी आजमा सकती हैं।

करवा चौथ आने वाली है और इसके बाद त्यौहारों की कतार लग जाएगी। जाहिर है ऐसे में आप खूब सजने का सोच रही होंगी और मेहंदी भी जरूर लगवाएंगी। मेहंदी के बिना हर त्योहार अधूरा और फीका सा लगता है। मेहंदी को सुहाग की खास निशानी भी माना जाता है। क्यों न इस बार रेग्यूलर मेहंदी की जगह ट्रेडिशनल मेंहदी ट्राय करे जो आपके हाथों की खूबसूरती निखारने के साथ आपको एक अलग लुक दे। इसके अलावा ज्वेल मेंहंदी भी आपकी खूबसूरती बढ़ाने का काम अच्छा कर सकती है।

करवा चौथ के लिए अगर आपने अपनी ड्रेस या साड़ी चुन ली है तो कपड़ों से मैच करती ज्वेल्ड मेहंदी लगवा सकती हैं। इसमें आर्टिस्ट आपके कपड़ों से डिजाइन का खास हिस्सा कॉपी करके हूबहू आपके हाथों पर वैसा ही डिजाइन बना सकता है। इसलिेए शादी, पार्टी के अवसरों व करवा चौथ जैसे त्योहारों के लिए उत्तम है। यही नहीं आप अपने मेहंदी के डिजाइन पर सितारे व मोती भी लगवा सकती हैं। इन्हीं सब कारणों से ये साधारण मेहंदी से और ज्यादा समय तक टिकती भी है। साधारण मेहंदी का रंग जब फीका पड़ने लगता है तब वह बेकार लगती है।

जबकि ज्वेल मेंहदी में ऐसा कुछ नहीं होता। इसे लगाने के लिए हाथों पर स्किन से मैच करता हुआ बेसकोट, जो कि वाटरप्रूफ भी होता, लगाया जाता है फिर किसी सीलर से सील कर दिया जाता है। आप चाहें तो इसे फंक्शन के बाद हटा भी सकती हैं। ज्वेल मेंहदी आजकल महिलाओं में काफी लोकप्रिय हो रही है। वे रस्म को ध्यान में रखते हुए हाथों पर मेहंदी लगवाती हैं पर बाकी जगहों पर ज्वेल मेहंदी लगवाना पसंद करती हैं।

मेहंदी का उपयोग टैटू के रूप में

शरीर के अलग-अलग भाग पर टैटू बनवाने का आजकल फैशन सा बन चुका है। टैटू के शौकीन कमर, बाजू, माथा, छाती जैसे शरीर के अन्य भाग पर टैटू बनवाते हैं। परमानैंट टैटू बनाने के लिए बारीक सुई का इस्तेमाल किया जाता है। शरीर के जिस हिस्से पर टैटू बनवाना है वहां के अनुकूल डिजाइन कागज पर सुई टोंचकर बनाया जाता है, बाद में उसी डिजाइन में हरा, लाल, काला या अन्य जो रंग भरना है वो भरा जाता है। ये टैटू स्थायी या जीवन भर के लिए टिकते हैं। इसे लगाने के लिए 200 रुपए से लेकर दस हजार रूपए तक का खर्चा आता है और परमानेंट टैटू का बहुत ख्याल भी रखना पड़ता है। वह ज्यादा समय तक धूप में नहीं रहना चाहिए और टैटू बनाने के बाद तीन दिनों तक उस भाग को पानी से बचाना पड़ता है। अगर ऐसा परहेज ना करे तो त्वचा संबंधी रोग भी हो सकता है। इसलिए परमानेंट टैटू से बेहतर माडर्न डिजाइन की मेहंदी और टैटू का प्रचलन बढ़ गया। ज्यादातर युवा और अविवाहित लड़कियां मेहंदी को टैटू की तरह लगवाना पसंद कर रही हैं। इसमें बैक व बाजू पर डिजाइन को प्राथमिकता दी जाती है।

वैसे भगवान की तस्वीर भी आप बनवा सकती है। फनी पिक्चर बनवाने का ट्रेंड भी इन दिनों चला है। जब कांटा लगा गर्ल शेफाली जरीवाला ने अपनी कमर के पीछे टैटू बनवाया तो सारी लड़कियां इस नए स्टाइल स्टेटमेंट की दीवानी हो गईं। मेहंदी फैशन एक्ससेरीज में शुमार कर दी गई। वह हाथों पैरों से आगे बढ़कर गर्दन, कमर, बाजू पर सजने लगी हैं क्योंकि आजकल हर कोई हैवी ज्वेलरी पहनकर थक चुकी हैैं। इसलिए अपनी बोरियत को दूर करने के लिये यह नया विकल्प अपनाती हैं। इसमें जितनी बार चाहे और जितनी तरह के डिजाइन चाहें मेहंदी से बनवा सकती हैं। इसका फायदा यह है कि बिना ज्यादा खर्च किए लेटेस्ट ट्रेंड को अपनाया जा सकता है।

आज महिलाओं को बाजूबंद पहनने का शौक ज्यादा ही होता है, लेकिन परेशानी यह है कि बाजार में डिजाइन और वैरायटी की कमी है। ऐसे में मेहंदी का एक बेहतर विकल्प के रूप में उपयोग किया जा सकता है। मेहंदी के इस नए रूप से आप अपने हाथों और कलाइयों पर चूड़ियां या अन्य डिजाइन की ज्वेलरी भी बनवाना चाहती हैं तो आपके लिए मेहंदी की एक्सेसरीज बेहतर विकल्प है।

एशिया के दरवाजे से बाहर निकलकर मेहंदी अब धीरे-धीरे पश्चिमे देशों का दरवाजा खटखटाने लगी है। तभी तो पॉप दिवा मेडोना अपने एक अलबम वीडियो में हथेलियों पर मेहंदी लगाकर थिरकती दिखीं। जब वह ग्रेमी अवार्ड लेने पहुंची तब भी उनके मेहंदी के टैटूज को काफी लोकप्रियता मिली। इसके अलावा नाओमी कैपवेल, डेमी मूर समेत अन्य हालीवुड अभिनेत्रियां भी मेहंदी के डिजाइन बनवा चुकी हैं।

भारत आने वाले विदेशी सैलानियों में भी मेहंदी का क्रेज तेजी से बढ़ा है। भारतीय मेहंदी के टैटूज विदेशी महिलाओं के साथ पुरुषों को भी भा रहे हैं। बहुत अधिक संख्या में न हो फिर भी विदेशी पुरुष सैलानी पीठ व कलाई पर मेहंदी के टैटूज बनवाना पसंद कर रहे हैं। और हो भी क्यों न क्योंकि इसमें ‘न दर्द, न नुकसान’ और न ही अधिक समय तक एक ही डिजाइन को झेलने की मजबूरी। मेहंदी से बने ये नेचुरल टैटूज अमेरिका, अफ्रीका और चीन आदि देशों में काफी पसंद किए जा रहे हैं।

खास बात यह है कि मल्टी कलर टैटूज की इच्छा रखने वाले लोगों के लिए मेहंदी के रूप में हमेशा नए विकल्प सामने आ रहे हैं। टैटूज में भी सबसे अधिक अरेबियन डिजाइन ही बनाए जाते हैं। अपने नए अवतार में मेंहदी और भी बदली और कलरफुल हो चुकी है। इनमें बिंदी सीक्वेंस और चमकीली स्टोन का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।

आपकी प्रतिक्रिया...