मंदिर निर्माण श्रीराम के आदर्शों की पुनर्स्थापना

अयोध्या में केवल भव्य दिव्य श्रीराम मंदिर नहीं बन रहा है अपितु प्रभु श्रीराम के आदर्शों की भी पुनर्स्थापना हो रही है, जो सदियों-सदियों तक मानव जाति के लिए एक संजीवनी का काम करने के साथ ही एक आदर्शवान, चरित्रवान और दैवीय परिवार, समाज एवं राष्ट्र का नवनिर्माण कराती रहेगी।

अयोध्या श्रीराम मंदिर भूमिपूजन कार्यक्रम हर्षोल्लास के साथ भावभक्तिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के करकमलों द्वारा भूमिपूजन देखकर सभी देशवासी एवं प्रवासी भारतीयों में नवचैतन्य का संचार हुआ और सभी का रोम रोम हर्षित हो उठा। लोग अपनी भावनाओं को शब्दों में बखान नहीं कर पा रहे थे। इस कार्यक्रम का सभी न्यूज चैनलों पर सजीव प्रसारण किया जा रहा था। पूरा देश कुछ समय के लिए थम सा गया था। सभी लोग अपने-अपने घरों में परिवारजनों के साथ सजीव प्रसारण देख रहे थे। चारों ओर से केवल टीवी पर वेदमंत्रों की पवित्र ध्वनि कानों को सुनाई दे रही थी। घर बैठे ही ऐसा लग रहा था मानो लोग तन से ना सही लेकिन मन से अयोध्या पहुंच गए हैं और प्रत्यक्ष रूप से कार्यक्रम स्थल पर बैठकर इस अद्भुत दृश्य को अपनी आंखों से देख रहे हैं। भारत सहित पूरे विश्व भर में फैले करोड़ों-करोड़ों लोग एकसाथ इस ऐतिहासिक गौरवमयी स्वर्णिम दिन के साक्षी बने। राष्ट्रधर्म के लिए समर्पित कर्तव्यपरायण प्रधानमंत्री मोदी जी ने जब रामलला के समक्ष साष्टांग दंडवत प्रणाम किया तब पूरा देश प्रफुल्लित होकर नतमस्तक हो गया और भावविभोर होकर भक्ति के महासागर में डुबकी लगाने लगा। सभी का ह्रदय गदगद हो गया। सभी श्रद्धालुओं की अंतरात्मा राममय हो गई। इस अविस्मरणीय ऐतिहासिक दृश्य को देखकर किसी की आंखों से आंसू छलके तो किसी के चेहरे पर मधुर मुस्कान के साथ ह्रदय खिल उठे।

राम मंदिर निर्माण के शुभ अवसर पर सुन्दर काण्ड की यह चौपाई-

‘प्रभु की कृपा भयऊ सब काजू,

जन्म हमार सुफल भा आजू’

बारम्बार याद आ रही है और कुछ इसी तरह का भाव मन में लिए कोई ख़ुशी से नाच रहा था तो कोई मिठाई खिलाकर बधाइयां बांट रहा था। सभी लोग एक दूसरे को ‘जय श्रीराम’ कह कर अभिवादन कर रहे थे और शुभकामनाओं का आदान प्रदान कर रहे थे। कहीं आतिशबाजी की जा रही थी तो कहीं दीये जलाए जा रहे थे। घर, मंदिर एवं परिसर में अखंड रामायण पाठ, सुन्दर काण्ड, भजन कीर्तन आदि मंगल कार्य किए जा रहे थे। कमोबेश यही स्थित पूरे देश भर की थी। दीपावली सा माहौल पूरे देश भर में उस दिन देखा गया। अयोध्या नगरी तो दुल्हन की तरह सज गई थी। ऐसा लग रहा था मानो अयोध्या का पुराना गौरवमयी अतीत वापस लौट आया हो। सोशल मीडिया पर रात से ही राममय माहौल बन गया था। अधिकतर युवाओं ने रात भर जागरण कर पूरे सोशल मीडिया को राम में रमा दिया। बताया जाता है कि 5 अगस्त के दिन केवल सोशल मीडिया पर ही कई अरब ‘राम’ नाम लिखा गया, जो कि एक विश्व कीर्तिमान है।

ऐसे हुआ भूमिपूजन कार्यक्रम संपन्न

हनुमानगढ़ी में वीर बजरंगी के दर्शन आराधन करने के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने जन्मभूमि पर प्रभु रामलला के दर्शन किए और उनकी परिक्रमा की। तत्पश्चात वे भूमिपूजन के लिए बैठे। अभिजित मुहूर्त में उन्होंने कुर्म शिला सहित उन 9 शिलाओं का पूजन किया, जिन्हें 1989 में शिलादान के समय पूजा गया था। पूरे विधि विधान से वेद मंत्रों सहित यज्ञ संपन्न हुआ। कांचीपुरम के शंकराचार्य द्वारा भेजे गए हस्तलिखित ताम्रपत्र को प्रतीकात्मक रूप से नींव में डाला गया था। चांदी के फावड़े और चांदी की कन्नी से नींव भरी गई। भूमिपूजन के उपरांत जन्मभूमि के समीप ही प्रधान मंत्री मोदी जी के हाथों से पारिजात का पौधा लगाया गया। इसे हारसिंगार भी कहते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार पारिजात के वृक्ष को परम पवित्र माना जाता है। कहते हैं कि यह वृक्ष सदियों तक जीवित रहता है और मनोकामना पूर्ण करता है इसलिए इसे कल्पवृक्ष भी कहा जाता है। इस दौरान प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी जी ने प्रभु रामचन्द्रजी पर डाक टिकट भी जारी किया। 5-5 रूपये मूल्य के दो डाक टिकटों में से एक पर राम मंदिर के प्रस्तावित  मॉडल की तस्वीर और दूसरी डाक टिकट पर ग्लोबल इन्साइक्लोपीडिया ऑफ़ रामायण की तस्वीर अंकित थी। बता दें कि रामजन्मभूमि और हनुमानगढ़ी जाकर दर्शन व पूजन अर्चन करने वाले नरेन्द्र मोदी देश के पहले प्रधानमंत्री हैं।

विश्व में नंबर -1 पर ट्रेंड हुआ ‘पधारो राम अयोध्या धाम’

श्रीराम मंदिर भूमिपूजन कार्यक्रम केवल भारत में ही नहीं अपितु अखिल विश्व में धार्मिक आस्था के रूप में सर्वाधिक आकर्षण का केंद्र रहा। सोशल मीडिया पर पूरे विश्व के लोगों ने अपनी भावनाएं व्यक्त की। 5 अगस्त की सुबह 5 बजे से ही ‘पधारो राम अयोध्या धाम’ दुनिया भर में नंबर -1 पर ट्रेंड कर रह था। विश्व के करोड़ों लोगों ने भगवान राम से जुड़े पोस्ट कर अपनी गहरी आस्था प्रकट की। 5 अगस्त के दिन लोगों का जोश, उत्साह, जूनून पूरे उफान पर था।

अमेरिका के टाइम्स स्क्वायर पर राम की तस्वीर हुई प्रदर्शित

भारत की ही तरह अमेरिका में रहने वाले भारतवंशियों ने पूरे धूमधाम और भक्तिभाव के साथ राम मंदिर भूमिपूजन के अवसर पर अपनी खुशियां जाहिर कीं। सुबह से ही भारतीय पारंपरिक परिधान में टाइम्स स्क्वायर पर भारतीय समुदाय एकत्रित होने लगा। हाथों में भगवा ध्वज और राम जी की तस्वीर लेकर वह भगवान श्रीराम का जयघोष कर रहे थे। स्थानीय प्रशासन ने भारतीयों की आस्था का सम्मान करते हुए टाइम्स स्क्वायर की विशाल स्क्रीन पर भगवान राम, भव्य मंदिर और भारतीय तिरंगे झंडे की तस्वीर प्रदर्शित की, जिससे उपस्थित जन समुदाय का जोश उत्साह दोगुना हो गया। भारतीय समुदाय ने दिल खोलकर जश्न मनाया और अमेरिकी प्रशासन का आभार माना। भारत के बाहर सात समुन्दर पार भी अनेक देशों में भारतीय संस्कृति की भगवा ध्वजपताका पूरे शान से फहरा रही थी।

विश्व में फैले प्रवासी भारतीयों ने मनाया जश्न

प्रवासी भारतीय भले ही अपने मातृभूमि से दूर हो लेकिन उनके दिलों की धड़कनें भारत के लिए धड़कती रहती हैं। भारतीय संस्कृति संस्कार को उन्होंने संजोकर रखा है। भारत की हर हलचल पर वह नजर बनाए रखते हैं। अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर बनने का इंतज़ार वह भी लंबे समय से कर रहे थे और यथासंभव मदद भी कर रहे थे। भूमिपूजन कार्यक्रम के बारे में पल – पल की खबर जानने के लिए प्रवासी भारतीय सुबह से ही टीवी, मोबाईल, यूट्यूब पर चिपके हुए थे। प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी जी के द्वारा हुए भूमिपूजन कार्यक्रम को देखकर वह भी फूले नहीं समा रहे थे। उन्हें अपार आत्मगौरव की अनुभूति हुई।

अमेरिका और ब्रिटेन में सर्वाधिक देखा गया भूमिपूजन कार्यक्रम

दूरदर्शन के अनुसार अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, फ़्रांस, इटली, इंडोनेशिया, थाईलैंड, नेपाल, श्रीलंका, मॉरिशस, जापान, नीदरलैंड, न्यूजीलैंड, फिलिपीन्स, मलेशिया, बांग्लादेश, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, ओमान, सऊदी अरब में भूमिपूजन कार्यक्रम सबसे अधिक देखा गया। इनमें अमेरिका और ब्रिटेन सबसे आगे रहे, जहां पर भूमिपूजन कार्यक्रम का सजीव प्रसारण सबसे अधिक देखा गया। प्रसारण दिखाने के लिए सिग्नल समाचार एजेंसी, एशियन न्यूज इंटरनेशनल और एसोसिएटेड प्रेस टेलीविजन न्यूज के माध्यम से पूरी दुनिया में 450 मीडिया संगठनों को वितरित की गई थी। दूरदर्शन के समाचार चैनल डीडी न्यूज ने भूमिपूजन कार्यक्रम के दृश्य एशिया प्रशांत क्षेत्र के देशों में अलग से प्रसारित किए थे।

राष्ट्र, समाज, संस्कृति और सभ्यता के प्राण हैं राम

श्रीराम केवल आस्था नहीं है बल्कि राम जीवन की अवस्था और जीवन की आदर्श व्यवस्था है। जो रोम रोम में बसे हुए हैं, बस वही तो राम हैं। राम इस राष्ट्र, समाज, संस्कृति एवं सभ्यता के प्राण हैं और पावन राम मंदिर का निर्माण इस भारत वर्ष में मृतप्राय संवेदनाओं को जागृति प्रदान करने के साथ इस राष्ट्र में पुन: प्राणों का संचार करेगा।

राम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण का अर्थ है, उन मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु रामचन्द्रजी के महान आदर्शों की पुनर्स्थापना करना। जब राम को ही प्रतिष्ठा नहीं मिलेगी तो भला उनके आदर्शों को प्रतिष्ठा मिल पाना कैसे संभव हो सकता है? इसलिए अयोध्या में केवल भव्य दिव्य श्रीराम मंदिर नहीं बन रहा है अपितु प्रभु श्रीराम के आदर्शों की भी पुनर्स्थापना हो रही है, जो सदियों-सदियों तक मानव जाति के लिए एक संजीवनी का काम करने के साथ ही एक आदर्शवान, चरित्रवान और दैवीय परिवार, समाज एवं राष्ट्र का नवनिर्माण कराती रहेगी।

अनाथ से सनाथ हुआ भारतवर्ष

कहा जाता है कि जैसे बेटे आलिशान महल में हो और मां बाप टेंट के किसी झोपड़े में हो तो मां बाप होते हुए भी ऐसी संतान अनाथ ही होती हैं। ठीक उसी प्रकार हमारे आराध्य रामलला भी टेंट में विराज रहे थे तो ऐसी स्थिति में उनके होते हुए भी हम अनाथ जैसे ही थे। वास्तविक रूप से आज हम सभी और पूरा भारतवर्ष सनाथ हो गया है।

त्याग, समर्पण और बलिदान करने वाले महान आत्माओं को कोटि कोटि नमन

गत 500 वर्षों से राम मंदिर के लिए अनवरत संघर्ष करने वाले महान तपस्वी राष्ट्रधर्म योद्धाओं को देशवासी कभी नहीं भूलेंगे। देश आज उन्हें स्मरण कर रहा है। प्रभुरामचंद्र जी की कृपा के साथ जिन महान आत्माओं के अथक प्रयास और त्याग, समर्पण एवं बलिदान से देश को आज परम सौभाग्यशाली अवसर मिला है, उन सभी महात्माओं और बलिदानियों को ह्रदय से कोटि-कोटि नमन।

इस शुभ घड़ी पर एक बहुत ही प्रेरणादायी संघगीत प्रासंगिक लग रहा है, उसकी चार पंक्तियां हैं-

नवचैतन्य हिलोरे लेता, जाग उठी है तरुणाई

हिन्दुराष्ट्र निज दिव्य रूप में, उठा पुन: ले अंगड़ाई

जाग उठी है तरुणाई…

एक अभेद्य अखंड संस्कृति की बहती अमृत धारा

सत्य सनातन धर्म अधिष्ठित, शुभमंगल बेला आई

जाग उठी है तरुणाई….

जय श्रीराम।

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