भारतीय चिंतन में सूर्य ब्रह्माण्ड की आत्मा हैं

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सूर्य सभी राशियों पर संचरण करते प्रतीत होते हैं। वस्तुतः पृथ्वी ही सूर्य की परिक्रमा करती है। आर्य भट्ट ने आर्यभट्टीयम में लिखा है, ‘‘जिस तरह नाव में बैठा व्यक्ति नदी को चलता हुआ अनुभव करता है, उसी प्रकार पृथ्वी से सूर्य गतिशील दिखाई पड़ता है।" सूर्य धनु राशि के…

सनातन भारत से है ‘आइडिया ऑफ भारत’ वालों का संघर्ष

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“आइडिया ऑफ भारत” वालों का संघर्ष सनातन भारत से है। ऊपरी तौर पर यह संघर्ष संघ विचार धारा के विरुद्ध दिखाई देता है। संघ विचारधारा सनातन भारत की विचारधारा है। सनातन भारत याने सनातन समाज। सनातन समाज याने समय के साथ जो बदलता रहता है वह! वैदिक काल में हमारे…

हिंदू राष्ट्र बनाने की दिशा में सरकार का पहला कदम

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-लोकसभा के अंदर एक सवाल पूछा गया था कि क्या श्रीमद्भगवद्गीता को स्कूलों के पाठ्यक्रम में लागू किया जाएगा ? तो इस सवाल का जवाब देते हुए शिक्षा राज्य मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने यह कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2022 का पैरा नंबर 4.27 भारत सरकार को इस बात के…

2024 में पूरी दुनिया का भारत को नमस्कार होगा

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-मित्रों 2024 में भगवान श्री राम का भव्य मंदिर का प्रथम तल बनकर तैयार हो जाएगा इस मंदिर के बारे में अब तक जो जानकारियां सामने आई हैं वह निम्नलिखित हैं -भगवान राम का मंदिर अष्टकोणीय होगा । मंदिर में 44 दरवाजे होंगे सभी दरवाजे सागौन की लकड़ी से बनेंगे…

आयुर्वेद है भारत का प्राचीन स्वास्थ्य विज्ञान

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि दुनिया रोग उपचार के लिए आयुर्वेद की प्राचीन पद्धति की ओर लौट रही है। आयुर्वेद भारत का प्राचीन स्वास्थ्य विज्ञान है। बीते सप्ताह गोवा में विश्व आयुर्वेदिक कांग्रेस में अनेक विशेषज्ञों ने आयुर्वेद के सूत्रों पर व्यापक चर्चा की है। सम्मेलन में ‘औषधीय…

ज्ञान और श्रम का संयोग आवश्यक

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मनोबल का विकास ही  साहस, सूझबूझ, कुशलता, कलाकारिता, योग्यता का प्रतीक है, किंतु केवल बौद्धिक योग्यता ही मनुष्य को पूर्णतया संतुष्ट नहीं कर पाती । हृदय और उसके उद्गार ही ऐसे हैं, जिनकी आवश्यकता मनुष्य ही नहीं, साधारण जीवधारियों को भी होती है । प्रेम, स्नेह, वात्सल्य, श्रद्धा, निष्ठा, आस्था…

इतिहास की हत्या कितनी बेरहमी से हुई

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100साल बनने में लगे तोड़ने में लगभग 300साल लग गये विदिशा के विजय मंदिर को जो 300फ़िट ऊँचा था। मुग़ल इतिहासकार अलबरूनी ने लिखा है कि यह मंदिर 100 गज ऊँचा था और मीलों दूर से इसका शिखर दिखाई देता था। तीन सौ साल के ध्वंस के बाद भी जब…

भारतीय संस्कृति के कण कण में बसे है राम

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राम शब्द में दो अर्थ व्यंजित हैं। सुखद होना और ठहर जाना। अपने मार्ग से भटका हुआ कोई क्लांत पथिक किसी सुरम्य स्थान को देखकर ठहर जाता है। हमने सुखद ठहराव का अर्थ देने वाले जितने भी शब्द गढ़े, सभी में राम अंतर्निहित है, यथा आराम, विराम, विश्राम, अभिराम, उपराम,…

ज्ञानवापी में है शिवस्वरूप, ज्ञानस्वरूप जल

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यह ज्ञानवापी बड़ी दिव्य है इसके लिए स्कन्दपुराण के काशीखण्ड में स्वयं भगवान् विश्वनाथ कहते हैं कि, "मनुष्यों! जो सनातन शिवज्ञान है, वेदों का ज्ञान है, वही इस कुण्ड में जल बनकर प्रकट हुआ है।" सन्ध्या में व कलशस्थापना में जो "आपो हि ष्ठा" आदि तीन मन्त्र प्रयुक्त होते हैं,…

तेरा विश्वास शक्ति बने, याचना नही

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हे प्रभो! मेरी केवल एक ही कामना है कि मैं संकटों से डर कर भागूँ नहीं, उनका सामना करूँ। इसलिए मेरी यह प्रार्थना नहीं है कि संकट के समय तुम मेरी रक्षा करो बल्कि मैं तो इतना ही चाहता हूँ कि तुम उनसे जूझने का बल दो। मैं यह भी…

हिमालय की तरह अचल भारत- नेपाल मैत्री 

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर नेपाल की यात्रा की, यह यात्रा ऐसे समय में हुई है जब विश्व  का बहुत बड़ा हिस्सा युद्ध और हिंसा के वातावरण के दौर से गुजर रहा है। विश्व के कई देश कोविड महामारी के बाद आंतरिक अशांति से गुजर रहे…

ऐतिहासिक ज्ञानवापी क्या कह रही है?

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यह भारत में कानून के राज और प्रतिष्ठा का एक और उदाहरण है कि एक स्वयंसिद्ध मामला सर्वे, जांच, साक्ष्य और पक्ष-विपक्ष के तर्क-वितर्कों से होकर किसी निष्कर्ष की ओर जाता हुआ हम देख रहे हैं। एक ऐसा मामला, जो दिन की रोशनी की तरह साफ है। ज्ञानवापी के सफेद…

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