ज्ञान और श्रम का संयोग आवश्यक

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मनोबल का विकास ही  साहस, सूझबूझ, कुशलता, कलाकारिता, योग्यता का प्रतीक है, किंतु केवल बौद्धिक योग्यता ही मनुष्य को पूर्णतया संतुष्ट नहीं कर पाती । हृदय और उसके उद्गार ही ऐसे हैं, जिनकी आवश्यकता मनुष्य ही नहीं, साधारण जीवधारियों को भी होती है । प्रेम, स्नेह, वात्सल्य, श्रद्धा, निष्ठा, आस्था…

इतिहास की हत्या कितनी बेरहमी से हुई

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100साल बनने में लगे तोड़ने में लगभग 300साल लग गये विदिशा के विजय मंदिर को जो 300फ़िट ऊँचा था। मुग़ल इतिहासकार अलबरूनी ने लिखा है कि यह मंदिर 100 गज ऊँचा था और मीलों दूर से इसका शिखर दिखाई देता था। तीन सौ साल के ध्वंस के बाद भी जब…

भारतीय संस्कृति के कण कण में बसे है राम

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राम शब्द में दो अर्थ व्यंजित हैं। सुखद होना और ठहर जाना। अपने मार्ग से भटका हुआ कोई क्लांत पथिक किसी सुरम्य स्थान को देखकर ठहर जाता है। हमने सुखद ठहराव का अर्थ देने वाले जितने भी शब्द गढ़े, सभी में राम अंतर्निहित है, यथा आराम, विराम, विश्राम, अभिराम, उपराम,…

ज्ञानवापी में है शिवस्वरूप, ज्ञानस्वरूप जल

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यह ज्ञानवापी बड़ी दिव्य है इसके लिए स्कन्दपुराण के काशीखण्ड में स्वयं भगवान् विश्वनाथ कहते हैं कि, "मनुष्यों! जो सनातन शिवज्ञान है, वेदों का ज्ञान है, वही इस कुण्ड में जल बनकर प्रकट हुआ है।" सन्ध्या में व कलशस्थापना में जो "आपो हि ष्ठा" आदि तीन मन्त्र प्रयुक्त होते हैं,…

तेरा विश्वास शक्ति बने, याचना नही

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हे प्रभो! मेरी केवल एक ही कामना है कि मैं संकटों से डर कर भागूँ नहीं, उनका सामना करूँ। इसलिए मेरी यह प्रार्थना नहीं है कि संकट के समय तुम मेरी रक्षा करो बल्कि मैं तो इतना ही चाहता हूँ कि तुम उनसे जूझने का बल दो। मैं यह भी…

हिमालय की तरह अचल भारत- नेपाल मैत्री 

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर नेपाल की यात्रा की, यह यात्रा ऐसे समय में हुई है जब विश्व  का बहुत बड़ा हिस्सा युद्ध और हिंसा के वातावरण के दौर से गुजर रहा है। विश्व के कई देश कोविड महामारी के बाद आंतरिक अशांति से गुजर रहे…

ऐतिहासिक ज्ञानवापी क्या कह रही है?

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यह भारत में कानून के राज और प्रतिष्ठा का एक और उदाहरण है कि एक स्वयंसिद्ध मामला सर्वे, जांच, साक्ष्य और पक्ष-विपक्ष के तर्क-वितर्कों से होकर किसी निष्कर्ष की ओर जाता हुआ हम देख रहे हैं। एक ऐसा मामला, जो दिन की रोशनी की तरह साफ है। ज्ञानवापी के सफेद…

हिमालय में कम से कम होना चाहिए इंसानी दखल 

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केदारनाथ की यह तस्वीर 1882 में भूगर्भ सर्वेक्षण विभाग ने खींची थी। यह वो समय था जब हमारे पुरखे मानते थे कि ऊंचे हिमालयी इलाकों में इंसानी दखल कम से कम होना चाहिए। वे ऐसा मानते ही नहीं थे, अपने बरताव में इसका ख्याल भी रखते थे। जैसे बुग्यालों में…

सफलता पुरुषार्थ के मूल्य पर मिलती है

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Businessman with flag on mountain top. Concept for success.
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यदि हम स्वास्थ्य, शिक्षा, संपन्नता,  सम्मान,  सफलता से वंचित रहते हैं तो इसके लिए दूसरों को दोष देना व्यर्थ है। गहराई से उन कारणों को तलाश करना चाहिए जिनके द्वारा विपन्नता विनिर्मित होती है । आलस्य, प्रमाद, उपेक्षा, उदासीनता, आवारागर्दी जैसे दुर्गुणों में लोग अपनी अधिकांश शक्तियाँ नष्ट करते रहते…

मनहूस दिन नहीं है अमावस

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Phases of the Moon: waxing crescent, first quarter, waxing gibbous, full moon, waning gibbous, third guarter, waning crescent, new moon. On a starry sky. The elements of this image furnished by NASA.
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धर्म को तोड़ मरोड़ कर पेश किये जाने की हम हमेशा बात करते हैं | अब जैसे एक वाक्य की कल्पना कीजिये “अमावस्या की काली रात थी !” इसकी कल्पना मात्र से ही किसी खतरे की घंटी दिमाग में बजने लगती है | अचानक मनहूस कुत्तों के रोने जैसी आवाज…

सभी कर्मों का फल हो जाता है अक्षय

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सभी कर्मों का फल हो जाता है अक्षय, इसलिए यह तिथि कहलाती है, अक्षय तृतीया वैशाख शुक्लपक्ष की तृतीया को अक्षय तृतीया, आखातीज, या आखा तृतीया कहते हैं। इस दिन दिए हुए दान और किए हुए स्नान, होम, जप आदि का फल अनन्त होता है, अर्थात् सभी शुभ कर्म अक्षय…

धर्म परंपरा : जैसा बोएंगे, वैसा ही पाएंगे

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मेरा एक मित्र हैदराबाद के एक पाठशाला में प्रधानाध्यापक हैं। उनके घर में दूध देने वाला कृष्णा एक दिन अचानक भागा भागा आया और उनके पैरों में पड़ गया। बोला की उनकी लड़की ने घर से भागकर एक मुसलमान लड़के से शादी कर ली है, और उसके परिवार के साथ…

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