सौ साल का जायका – बेडेकर

‘बेडेकर’ नाम जनमानस में इस तरह से बैठ गया है कि उच्चारण करते ही अचार और मसाला स्मरण हो आता है। वस्तुत: बेडेकर अचार व मसाला का समानार्थी शब्द हो गया है। यह गौरव का विषय है कि विगत एक शताब्दी से एक उद्योग के रूप में बेडेकर लोकप्रियता में दिनोंदिन बढ़ता ही जा रहा है।

मसाला एवं अचार

वर्ष 1910 ई. में स्थापित बेडेकर द्वारा स्वादिष्ट, सात्विक और रूचिकर खाद्य पदार्थों के माध्यम से जिह्वा को तृप्त किया जा रहा है। ग्राहकों द्वारा प्राप्त उत्तम प्रतिसाद के आधार पर ही ‘व्ही. पी. बेडेकर एण्ड सन्स प्रा. लि.’ ने दिसम्बर, 2010 में ‘स्वादिष्ट शतकपूर्ति’ समारोह पूर्वक मनाई।

मुंबई के गिरगांव भूषण बेडेकर कोंकण के राजापुर में गोवल गांव में प्रवचनकार के रूप में प्रसिद्ध थे। वर्तमान संचालक श्री वसंतराव बेडेकर के पूर्वज समुद्री मार्ग से चावल का व्यापार करने मुंबई पहुंचे थे। यहां आकर उन्होंने व्यवसाय शुरू किया। समय बीतता गया। उन्होंने गिरगांव में मुगभाट में किराना की दूकान शुरू की। श्री वासुदेवराव बेडेकर उपाख्य अण्णासाहेब ने सन् 1917 में स्वयं मसाले तैयार करके बेचना पारम्भ किया। अण्णासाहेब अत्यन्त जुझारू व्यक्तित्व के धनी थे। पु. भा. भावे के शब्दों में कहा जाए तो ‘कबूतर को गरूड़ के पंख लगाए भी जा सकेंगे, परंतु गगन में उड़ान भरने का माद्दा रक्त में होना चाहिए’। अण्णासाहेब इस कथन पर खरे थे। इसीलिए व्ही. पी. बेडेकर एण्ड सन्स प्रा. लि. की गरुड उड़ान सात समुद्र के पार स्वतन्त्रता प्राप्त होने से पहले ही निर्यात के स्वरूप में पहुंच गयी।

केवल एक दूकान से अपना पूरा उत्पादन नहीं बेचा जा सकता, यह सोचकर अण्णासाहेब ने मुंबई के ठाकुरद्वार, फोर्ट, दादर, परेल इत्यादि स्थानों पर भी दूकानें शुरू कीं। उन्होंने आरम्भ से ही यह तय कर रखा था कि ‘‘उधार नहीं देना है’’ जो आज तक भी कायम है। दूकानदारी की शुरुआत से ही ग्राहकों की पसन्द को बेडेकर ने पहचान लिया था, इसीलिए उनकी सफलता में चार चांद लग गये। शुरू के दिनों में ही मसाला कूटना, अचार तैयार करना किस प्रकार का व्यवसाय है, इसका गम्भीर अनुभव बेडेकर को प्राप्त हुआ।

व्यवसाय के विषय में लोंगों की टीका-टिप्पणी पर ध्यान न देते हुए और केवल अपने व्यवसाय पर लक्ष्य केन्द्रित करके अण्णा साहेब ने वर्ष 1943 में ‘व्ही. पी. बेडेकर एण्ड सन्स प्रा. लि.’ नाम से अपने स्वयं के प्रयास और उद्यम से अन्तरराष्ट्रीय बाजार में पदार्पण किया। आज देश-विदेश में बेडेकर के उत्पादनों के खरीददार बड़ी संख्या में हैं। बेडेकर ने शुरू से ही गुणवत्ता को सर्वोपरि महत्व दिया है। मसाला, अचार, पापड़ बेचना शुरू करने पर किराना की अन्य वस्तुएं भी साफ-सुथरा करके बेचने से बिक्री बढ़ गयी और लाभ का प्रतिशत भी बढ़ गया। बाजार में वस्तुओं की मांग बढ़ने से विश्वसनीयता बढ़ी। आन्तरराष्ट्रीय बाजार में निर्यात के लिए कड़ी स्पर्धा का सामना करना पड़ता है, इसलिए गुणवत्ता बरकरार रखना पड़ता है। कठोर नियमों का पालन करना पड़ता है। बेडेकर ने हमेशा सचेत होकर व्यवसाय किया, इसलिए कभी भी विपरीत परिस्थिति का सामना नहीं करना पड़ा। अमेरिका, आस्ट्रेलिया, कनाडा इत्यादि देशों में जें स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया जाता है, बेडेकर के उत्कृष्ट उत्पादन बहुत ही लोकप्रिय हुए।

बेडेकर ने उत्पादनों की उत्कृष्ट गुणवत्ता बनाये रखी। फलत: भारत सरकार द्वारा आयोजित फलोत्पादन व प्रक्रिया की प्रदर्शनी में बेडेकर को सन् 1959 से ही प्रथम अथवा द्वितीय स्थान प्राप्त होता रहा है। व्यवसाय का यह हुनर बेडेकर परिवार में एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को मिलता गया।

सन् 1962 में उद्योग को विस्तार देते हुए कुर्ला में एक नया कारखाना स्थापित किया। उसे सन् 1974 में अत्याधुनिक मशीनों से सुसज्ज किया। इस समय बेडेकर द्वारा एक वर्ष में पांच लाख टन अचार का उत्पादन किया जाता है। यद्यपि वर्ष में एक बार ही तैयार किए जाने वाले अचार के व्यवसाय में उन्हें अब तक तीन बार भारी नुकसान उठाना पड़ा है। 26 जुलाई, 2005 की भयंकर बाढ़ के कारण लगभग पांच सौ टन तैयार अचार खराब हो गया। उसे फेंक देना पड़ा। कुर्ला में इस तरह की दुर्घटना की आशंका के कारण वाड़ा में नया कारखाना स्थापित किया गया है।

अन्य व्यवसाय

मसाला तथा अचार उत्पादन के साथ ही बेडेकर ने अन्य व्यवसायों में भी पदार्पण किया। उन्होंने भवन निर्माण का कार्य शुरू किया। घर बनाकर उसे किराए पर देने का उद्योग स्थापित किया। इस कार्य को आज श्री वसंतराव और श्री त्र्यम्बक जी उपाख्य बंडूभाऊ सम्भाल रहे है। इसी तरह अपने उद्योग का प्रचार करने के साथ ही व्यवसाय के रूप में वर्ष 1964 में श्री वसंतराव बेडेकर ने ‘बी. वसंत पब्लिसिटी’ नाम से अपनी विज्ञापन एजेन्सी शुरू की। दोनों कार्यों में अच्छी सफलता मिली।
अगली पीढ़ी के अतुल, अजीत और मन्दार घर और कार्यालय का भार उठाने वाली गृहणियों की सुविधा व रुचि को ध्यान में रखकर ‘पांच मिनट में तैयार होने वाले बेडेकर के ‘इंस्टन्ट बेसन लड्डू’ का आविष्कार किया। इस समय इस लड्डू की मुंबई सहित अन्य भागों में खूब मांग है। यह स्वादिष्ट व्यवसाय आगे सफलता पूर्वक ले जाने में नयी पीढ़ी पूरी तरह से सक्षम है।

ग्राहकों का ऋणानुबंध

उत्तम गुणवत्ता वाला उत्पादन, ग्राहकों के स्वाद की परख, अपेक्षानुरूप बदलाव और समय के साथ सामंजस्य बनाकर व्यवसाय को आगे बढ़ाने की अनुभवशील निपु़णता के कारण बेडेकर को ग्राहकों का अमूल्य विश्वास प्राप्त हुआ है। बेडेकर केवल व्यापार और उद्योग संचालन ही नहीं करते अपितु उन्होंने चार पीढ़ियों से समाज व ग्राहकों के साथ आत्मीयता का सम्बन्ध जोड़ा है। ग्राहकों व उपभोक्ताओं का अटूट विश्वास ही उनकी वास्तविक व्यावसायिक पूंजी है। उनके उत्पादनों को देश-विदेश में एक सम्मान अर्जित हुआ, यह केवल मराठी समाज को ही नहीं अपितु पूरे भारतवासियों के लिए गर्व का विषय है।

सामाजिक दायित्व

एक सफल उद्योगपति और व्यवसायी होने के साथ-साथ बेडेकर परिवार सामाजिक कार्यों में भी अग्रपंक्ति में रहता है। बेडेकर ने सांस्कृतिक उत्थान हेतु ‘व्यासपीठ ज्ञान-मनोरंजन’ के माध्यम से ‘मार्गशीर्ष महोत्सव’ और ‘वसंत महोत्सव’ का आयोजन शुरू किया है। वर्ष 2004 से प्रारम्भ इस उत्सव में भाग लेने वाले लोगों को भी वे अपनी खुशी में शामिल करते हैं। यही कारण है कि यह उत्सव आज केवल बेडेकर परिवार का नहीं, अपितु गिरगांव के सभी निवासियों का एक मंगल उत्सव बन गया है। इस आयोजन में प्रा. राम शेवालकर, वा. ना. उत्पात, किशोरजी व्यास, राहुल देशपांडे इत्यादि सम्माननीय कथावाचकों और शास्त्रीय संगीतकारों को सुनने का स्वर्णिम अवसर गिरगांव वासियों को मिला है। इस समारोह में वर्ष में दो बार श्रेष्ठ व ज्येष्ठ कथाकार, कीर्तनकार, गायक, लोक कलाकार गिरगांव आते रहते हैं। इसी तरह गिरगांव में आयोजित होनेवाले अन्य सामाजिक-सांस्कृतिक कार्यों, यथा-नववर्ष स्वागत यात्रा, गणेशोत्सव में बेडेकर परिवार की अग्रणी भूमिका रहती है। ‘चित्तपावन ब्राह्मण संघ’ के ट्रस्टी के रूप में बेडेकर परिवार ने चिकित्सा समूह, विद्यालयों में सेवाकार्य शुरू किया है। वर्ष 1960 में अपने स्वर्ण महोत्सव में अण्णासाहेब बेडेकर जी ने ब्राह्मण सभा के माध्यम से विद्यार्थियों को 25 हजार रुपये पुरस्कार व अन्य रूप में दिए। श्री त्र्यम्बक उपाख्य बंडूभाऊ अपनी दानशीलता के लिए प्रसिद्ध थे। वर्तमान संचालक श्री वसंतराव बेडेकर जी ने उद्योग संचालन के साथ ही समाजसेवा का कार्य बड़ी कुशलता से सम्हाला है।

सौ वर्ष की विश्वसनीय परम्परा के सम्वाहक बेडेकर परिवार ने आदर्श उद्योगपति, कुशल व्यवसायी और जिम्मेदार समाजसेवक के साथ ही राष्ट्रीय विचारधारा के पोषक के रूप में समाज व व्यवसाय जगत में जो उच्च स्थान प्राप्त किया है, उससे स्वत:सिद्ध है कि वे ‘गिरगांव भूषण’ ही है।

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